भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

गुदरैन

स्त्री.

पढ़ा हुआ पाठ सुनाना।
Category: संज्ञा
Etamology: [हिं. गुदरना]

गुदरैन

स्त्री.

परीक्षा, इम्तहान।
Category: संज्ञा
Etamology: [हिं. गुदरना]

गुदाना

गोदने का काम कराना या गोदने की प्रेरणा देना।
Category: क्रि. स.
Etamology: [हिं. गोदना (प्रे.)]

गुदार

गूदेदार, मांसल।
Category: वि.
Etamology: [हिं. गूदा]

गुदारना

ध्यान न देना।
Category: क्रि. स.
Etamology: [हिं. गुदरना]

गुदारना

सेवा में उपस्थित करना।
Category: क्रि. स.
Etamology: [हिं. गुदरना]

गुदारना

बिताना, गुजारना।
Category: क्रि. स.
Etamology: [हिं. गुदरना]

गुदारा

पुं.

नाव पर नदी पार करना।
Category: संज्ञा
Etamology: [फ़ा. गुज़ारा]

गुदारा

पुं.

नाव की उतराई।
Category: संज्ञा
Etamology: [फ़ा. गुज़ारा]

गुदारा

पुं.

निर्वाह
Category: संज्ञा
Etamology: [फ़ा. गुज़ारा]

गुदारा

गूदेदार, मांसल।
Category: वि.
Etamology: [हिं. गुदार]

गुदी, गुही

स्त्री.

गुद्दी, ल्योंड़ी गरदन के पीछे का भाग।
Discription with Examples: गुदी चाँपि लै जीभ मैरोरी – १० – ५७।
Category: संज्ञा
Etamology: [हिं. गुद्दी]

गुदी, गुही

स्त्री.

मींगी, गिरी।
Category: संज्ञा
Etamology: [हिं. गुद्दी]

गुदी, गुही

Muhavara: आँखें गुद्दी में होना :- (१) दिखायी न देना।
(२) समझ में न आना।
गुद्दी नापना :- गुद्दी पर चाँटा (धौल) देना।
गुद्दी से जीभ खींचना :- जबरन खींचना, कड़ा दण्ड देना।
Category: मु.

गुदी, गुही

स्त्री.

हथेली का गुदगुदा भाग।
Category: संज्ञा
Etamology: [हिं. गुद्दी]

गुन

पुं.

किसी वस्तु या व्यक्ति की विशेषता या धर्म जो उससे अलग न हो सके।
Discription with Examples: बेद धरत न सुन्न गुन के नखत टारन केर – सा. ६०।
Category: संज्ञा
Etamology: [सं. गुण]

गुन

पुं.

सत्व, रज और तम।
Discription with Examples: रूप – रेख – गुन – जाति, जुगति बिनु निरालंब कित धावै – १ – २।
Category: संज्ञा
Etamology: [सं. गुण]

गुन

पुं.

कला, विद्या।
Discription with Examples: तंत्रन चलै, मन्त्र नहिं लागै, चले गुनी गुन हारे – ३२५४।
Category: संज्ञा
Etamology: [सं. गुण]

गुन

पुं.

प्रभाव, फल।
Category: संज्ञा
Etamology: [सं. गुण]

गुन

पुं.

शील, सद्वृत्ति, सदाचरण, पुण्य कार्य।
Discription with Examples: (क) तिनुका सौं अपने जन कौ गुन मानत मेरु समान। सकुचि गनत अपराध समुद्रहिं बूँद – तुल्य भगवान – १ – ८।
(ख) ऐसैं कहौ कहाँलगि गुनगन लिखत अन्त नहिं लहिए – १ – ११२।
Category: संज्ञा
Etamology: [सं. गुण]

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