भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Definitional Dictionary of Management Science (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Product market expansion matrix

उत्पाद बाज़ार विस्तार मट्रिक्स
देo Intensive growth matrix.

Product-market grid

उत्पाद-बाज़ार ग्रिड
उत्पाद-बाज़ार ग्रिड एक ऐसी विधि है जिसको सहायता से विखंडन एक लाभकारी ढंग से किया जाता है । इसे कालम पंक्ति के रूप में प्रदर्शित किया जाता है । ग्राहक आवश्यकताओं को दर्शाने वाले विभिन्न पदार्थों को पंक्तियों में तथा बाज़ार विखंडों (अर्थात् ग्राहक वर्गों) को कालमबद्ध किया जाता है । उदाहरण के लिए एक टायर बनाने वाली कंपनी अपना उत्पाद-बाज़ार ग्रिड इस प्रकार बना सकती हैं :-
बाज़ार
(ग्राहक समूह)
—————————————————-
स्कूटर निर्माता कार निर्माता वायुयान निर्माता
—————————————————-
उत्पाद
(ग्राहक आवश्यकताएँ)
लघु आकार
का टायर —————————————————-
मध्यम आकार
का टायर ………….. …………….
………….. …………….
—————————————————–
विशाल आकार
का टायर —————————————————–
उपरोक्त ग्रिड में बिंदुकित वर्ग एक कंपनी की विपणन शक्ति का दो चरों (अर्थात् पदार्थ एवं बाज़ार) के आधार पर बोध कराता है । यह कंपनी मध्यम आकार के टायर स्कूटर निर्माताओं को बेचने में विशेष पटुता रखती है । इस प्रकार वह अपने लक्षित बाज़ार तक पहुँच जाती है और साथ ही प्रतियोगियों की स्थिति को भी ग्रिड पर उतार कर प्रतियोगिता के ढाँचे का मूल्यांकन कर सकती हैं ।

Product mix

उत्पाद मिश्रण
किसी फर्म द्वारा विनिर्मित विभिन्न पदार्थों के मिश्रण । ये पदार्थ मिश्र संबद्ध और असंबंद्ध दोनों ही प्रकार के हो सकते हैं । असंबद्ध पदार्थ मिश्रणों में रसायनिक खाद और इंजीनियरिंग सामान जैसे विषम पदार्थों का समावेश हो सकता है ।

Product positioning

उत्पाद स्थितीयन
उत्पाद स्थितीयन विपणनकर्ताओं द्वारा किया गया वह प्रयत्न है जिसकी सहायता से वे लक्षित बाज़ारों में अपने उत्पादों को प्रतियोगी के उत्पादों के मुकाबले में अधिक श्रेष्ठ जताकर उपभोक्ताओं से स्वीकृत कराते हैं । प्रतियोगी पदार्थों की अपेक्षा स्थितीयन करने वाली फर्म के उत्पाद या तो इस अर्थ में उत्कृष्ट हो सकते हैं कि वे किसी विशिष्ट माँग को पूरा करने का अधिक उत्तम माध्यम प्रस्तुत करते हैं अथवा इस अर्थ में उत्कृष्ट हो सकते हैं कि उनकी अपनी स्वयं की विशेषताएँ प्रतियोगी ब्रांडों की विशेषताओं से उत्तम होती हैं ।

profit centre

लाभ केंद्र
किसी भी फर्म का एक विभाग, प्रभाग या किसी अन्य प्रकार से परिभाषित परिचालन इकाई जिसे लाभ कमाने की दृष्टि से एक स्वतंत्र और पृथक् इकाई माना जाए । ऐसी इकाइयों के लिए शीर्ष प्रबंध द्वारा प्रायः लाभ-लक्ष्य पूर्व निर्धारित कर दिए जाते हैं । लाभ केंद्र छोटा या बड़ा हो सकता है और उसका मैनेजर सर्वोच्च प्रबंधकों द्वारा निर्धारित लाभ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी होता हैं ।

profit margin

पड़ता
इसकी गणना निवल विक्रय आय में से बिक्रीत वस्तुओं की कुल गणता घटाकर की जाती है । इस रूप में इसे सकल पड़ता कहा जा सकता है । निवल विक्रय आय में से सभी व्ययों के घटाने के पश्चात् जो राशि बचती है उसे निवल पड़ता कहा जाता है । निवल विक्रय आय में से केवल परिवर्तनशील लागतें घटाने पर जो शेष बचता है उसे योगदान पड़ता (contribution margin) के रूप में जाना जाता हैं ।

Profit sharing

लाभ-सहभाजन
वे योजनाएँ जिनके अधीन फर्म के लाभ का एक भाग कर्मचारियों के वितरित किया जाता है । ऐसी योजनाओं का उद्देश्य उत्पादिता वृद्धि के लिए कर्मचारियों को अभिप्रेरित करना होता है और इनका प्रबंध-कर्मचारी संबंधों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है ।

Programme evaluation and review technique (PERT)

कार्यक्रम मूल्यांकन और पुनर्विलोकन तकनीक (पर्ट)
देo PERT.

Promoter contribution

प्रवर्तक-अंशदान
एक संयुक्त पूंजी वाली कंपनी की कल्पना व उसका निर्माण करने वाला व्यक्ति प्रवर्तक कहलाता है । ऐसे प्रवर्तक व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा कंपनी में किया गया वित्तीय विनियोग उनका अंशदान कहलाता हैं । ऐसी कंपनी प्रायः जनता से धनराशि एकत्र करती है और उसके पूंजी कलेवर में वित्तीय संस्थाओं के दीर्घकालीन ऋण भी सम्मिलित होते हैं । निवेश करने वाली जनता और ऋणदाता वित्तीय संस्थाएँ अपेक्षा करती हैं कि प्रवर्तक का भी धन उसके उपक्रम में निविष्ट हो ताकि उपक्रम की सफलता में उसका दाब बना रहे। वित्तीय संस्थाएँ तो प्रायः ऐसे दाब को अपने द्वारा दिए गए ऋणों की एक आवश्यक शर्त के रूप में निर्धारित करती हैं ।

Protecting market leadership

बाजार नायक सुरक्षा
किसी नई और तेज़ी से उभरती हुई फर्म के कारण विद्यमान अग्रणी फर्म की स्थिति को पैदा होने वाले खतरे तथा उसके बाज़ार अंश में होने वाली संभाव्य गिरावट को सुरक्षित करने का प्रयास । ऐसे प्रयासों में अनेक कार्यनीतियों को सम्मिलित किया जा सकता है । इनका प्रमुख आधार चालाकी और चतुराई, हिंसा की कूटनीति, भीषण प्रतिशोध, सीमित संघर्ष तथा धमकी प्रणालियाँ हो सकते हैं । मोटे तौर पर ये कार्यनीतियाँ नव-प्रवर्तन, क़िलाबंदी, आमने-सामने मुकाबला करने तथा सताने से संबंधित होती हैं ।
देo innovation strategy, fortification strategy, confrontation strategy.

Psychographic segmentation

मनोवृत्तिपरक खंडीकरण
यह बाज़ार के विखंडीकरण की ऐसी रणनीति है जिसके अनुसार किसी भावनात्मक अपील पर एक जैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले या एक जैसे व्यवहार प्रतिमान रखने वाल सभी ग्राहकों को एक समजातीय खंड में रख दिया जाता है ।

Public company

सार्वजनिक कंपनी
सार्वजनिक कंपनी’ से आशय ऐसी कंपनी से है जो निजी कंपनी नहीं है और जिसके अंतर्नियमों के अनुसार उसकी सदस्यता जनता के लिए खुली है । सदस्यों की संख्या सात और अधिक से अधिक चाहे जितनी हो सकती है । सार्वजनिक कंपनी विवरण पत्रिका जारी करके जनता को अपने शेयर और डिबेंचर लेने के लिए आमंत्रित कर सकती हैं ।
तुलo देo private company.

Public enterprise

सरकारी उद्यम, लोक उद्यम
राज्य अथवा सरकारी, अर्धसरकारी या स्वशासी निकायों के स्वामित्व वाले उद्यम । सामायतः इसमें वे उद्योग भी शामिल किए जाते हैं जिनमें निजी पूंजी भी लगी हो, लेकिन सरकार की अंशपूंजी कुल अंशपूंजी की 50 प्रतिशत से अधिक हो ।

Public relations

जन-संपर्क
व्यापारिक फर्में विभिन्न हित-वर्गों जैसे-ग्राहक, माल विक्रेता, प्रतियोगी, कर्मचारी, पूंजीदाता, ऋणदाता, स्थानीय जन समुदाय तथा सरकार आदि को अपने बारे में अधिकाधिक जानकारी प्रदान करना चाहती हैं ताकि ऐसे हित वर्गों का संबंधित कंपनी में विश्वास बढ़ता रहे । जानकारी और विश्वास जागृति के इन उद्देश्यों को प्राप्ति के लिए जिन नीतियों का कार्यान्वयन किया जाए उन्हें जन-संपर्क कार्यक्रम के अधीन सम्मिलित किया जाता हैं ।

Purchasing power

क्रय-शक्ति
द्रव्य द्वारा वस्तुओं तथा सेवाओं की खरीद पाने की क्षमता । द्रव्य अपने धारक की क्रय शक्ति प्रदान करता हैं, परन्तु वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों में परिवर्तनों के साथ इस शक्ति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं । ऐसे उतार-चढ़ाव का मापन प्रायः अनेक वस्तुओं और सेवाओं के सम्मिलित मूल्य सूचकांक के संदर्भ में किया जाता है । यह मूल्य सूचकांक सामान्य मूल्य स्तर के रूप में जाना जाता है । जब मूल्य चढ़ते हैं तो धन की क्रय शक्ति घटती है और यह विलोम संबंध सामान्य मूल्य स्तर और धन की क्रय शक्ति के मध्य बराबर बना रहता है । क्रय-शक्ति के इन उतार-चढ़ावों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सरकारें अपनी मूल्य नीतियाँ, मुद्रा नीतियाँ तथा विनिमय-दर नीतियाँ निर्धारित है ।

Put and call option

मंदी व तेजी विकल्प
इसके अधीन एक निर्दिष्ट मूल्य पर किसी शेयर की एक निश्चित मात्रा खरीदने या बेचने का विकल्प प्राप्त किया जाता है । ऐसे विकल्प तेज़ी और मंदी दो प्रकार के हो सकते हैं । मंदी विकल्प के अनुसार जिस व्यक्ति द्वारा यह विकल्प खरीदा जाता हैं वह अंश के मूल्य में गिरावट की आशा करता है और इसलिए वह ऐसे अंशों को आज के चढ़े हुए मूल्यों पर भविष्य में बेचने का विकल्प प्राप्त करना चाहता हैं । मंदी विकल्प धारक को अंशों के बेचने का अधिकार प्रदान करता है, वह विकल्प संविदा के विक्रेता को ऐसे अंशों को खरीदने के लिए बाध्य करता है । यदि अंशों के मूल्य भविष्य में आशा के अनुसार न गिरे तो विकल्प संविदा के खरीदार को यह अधिकार रहेगा कि वह मंदी के विकल्प का प्रयोग न करे ।
तेज़ी विकल्प मंदी विकल्प का ठीक विलोम होता हैं और इसके अधीन भावी मूल्य में बढ़ोत्तरी की आशा करते हुए विकल्पधारी निहित अंशों को आज के मूल्य पर (जो कम होते हैं ) खरीदने का विकल्प प्राप्त करता है । आशा फलित होने पर विकल्पधारी अंशों को खरीद लेता है और आशानुकूल मूल्य वृद्धि न होने पर विकल्प का प्रयोग नहीं करता है ।

Pyramiding

पिरामिडीकरण
संबद्ध इकाइयों तथा व्यापारिक व्यवहारों की श्रृंखलाओं का एक तलबद्ध रूप में फैलाव पिरामिडीकरण कहा जा सकता हैं । यह फैलाव ऊर्ध्वगामी अथवा अधोगामी हो सकता है । वित्त और व्यापार के क्षेत्र में इस अवधारणा का प्रकार से प्रयोग किया जाता है । इसके कुछ स्वरूप निम्न हैं :-
(1) निवेश औत पिरामिडीकरण investment and pyramiding.
(2) नियंत्रण-सहायक कंपनी पिरामिडीकरण holding-subsidiary pyramiding.
(3) संगठन पिरामिडीकरण organisation pyramiding.

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