भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Definitional Dictionary of Management Science (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Need-size-form-brand market

आवश्यकता-आकार-स्वरूप और ब्रांड बाज़ार
देo market partitioning theory.

Negative cash flow

ऋणात्मक नक़दी प्रवाह
किसी कंपनी अथवा उद्यम में, एक अवधि विशेष के दौरान नक़दी के आने की अपेक्षा नक़दी का बाहर ज्यादा जाना ।

Net capital formation

निवल पूंजी निर्माण
स्थायी परिसंपत्तियों में किया गया निवल निवेश । इसमें मूल्यह्रास, मरम्मत और रख-रखाव पर किए गए व्यय सम्मिलित नहीं होते ।

Net present value

निवल वर्तमान मूल्य
निवेश निर्णयों के संदर्भ में प्रयोग किया जाने वाला एक निकष । इसके अनुसार निवेश के वर्तमान मूल्य को उससे प्राप्य भावी रोकड़ प्रवाह के बट्टाकृत मूल्यों में से घटाया जाता हैं । बट्टे की दर प्रायः संबंधित प्रतिष्ठान की पूंजी की लागत होती है । अंतरफल शुद्ध मूल्य के नाम से जाना जाता हैं । जिन रोकड़ प्रवाहों का शुद्ध वर्तमान मूल्य घनात्मक होता है उनसे संबंधित निवेश प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया जाता है । निर्णय की यह विधि परंपरागत विधियों से इस रूप में भिन्न है कि इसमें धन के समय मूल्य को विचाराधीन किया जाता है जो परंपरागत विधियों में नहीं किया जाता ।

Net working capital

निवल कार्यशील पूंजी
चालू परिसंपत्तियों का चालू दायित्वों पर अधिक्य ही शुद्ध कार्यशील पूंजी कहलाता है। किसी भी प्रतिष्ठान के पूंजी अनुमानों का यह एक महत्वपूर्ण घटक होता है क्योंकि इसका सीधा संबंध प्रतिष्ठान के दैनिक कार्यकलापों से होता हैं । यह एक फर्म की मालियत का हिस्सा होता हैं ।

Non-current liabilities

अप्रचलित देयताएँ
किसी भी प्रतिष्ठान की वे देनदारियाँ जो एक से अधिक वर्ष के पश्चात देय हों। ऐसी देनदारियाँ प्रायः परिसंपत्तियों पर स्वीकार किए गए बंधकों के फलस्वरूप अस्तित्व में आती हैं ।

Non-operating revenue

प्रचालनेतर आय
ब्याज, भाड़ा और लाभांश जैसे स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय, जो फर्म के प्रमुख व्यवसाय से सीधा संबंध नहीं रखती, प्रचालनेतर आय कहलाती हैं ।

Null hypothesis

निराकरणीय परिकल्पना
निराकरणीय परिकल्पना यह करती है कि समष्टि के किसी माने हुए प्राचलों तथा समष्टि से उद्धृत यादृच्छिक प्रतिदर्श के अभिकलित अनुमान में कोई अंतर नहीं है । वस्तुतः निराकरणीय परिकल्पना एक प्रकार की जाँच है जिसका प्रयोग इसलिए किया जाता है कि आकार विशाल होने के कारण समष्टि की सीधी जाँच नहीं हो सकती । यदि निराकरणीय परिकल्पना के अनुसार प्रतिदर्श और समष्टि में कोई अंतर पाया जाता है तो ऐसे अंतर के आकार का मूल्यांकन करना होगा । इस अंतर की सार्थकता का निर्धारण करने के लिए सांख्यिकीय विधियाँ उपलब्ध हैं । उदाहरण के लिए, एक निराकरणीय परिकल्पना यह हो सकती है कि कुल टेलिविजन सेटों को कम से कम 20 प्रतिशत एक विशेष कार्यक्रम पर लगाया गया था । जाँचकर्ता टेलिविजन सेटों की पूरी समष्टि में से 1000 सेटों का यादृच्छिक प्रतिदर्श लेता है और वह पाता है कि 205 सेट वास्तव में उस कार्यक्रम पर लगाए गए थे । यदि जाँचकर्ता इसके आधार पर निराकरणीय परिकल्पना को स्वीकार कर लेता है तो वह एक गलत परिकल्पना को स्वीकार करने की जोखिम उठा सकता है । जैसे यदि समष्टि का केवल 19 प्रतिशत ही वास्तव में उस कार्यक्रम को लगाता था तो प्रतिदर्श की उपरोक्त जाँच एक गलत परिकल्पना को परिपुष्ट कर देगी और जाँचकर्ता की यह त्रिटि बीटा त्रुटि के नाम से कही जाएगी । इसके विपरीत यदि प्रतिदर्श में केवल 150 सेट ऐसे पाए जाते हैं जो उस कार्यक्रम पर लगाए गए थे जबकि वास्तव में समष्टि के 20 प्रतिशत सेट कार्यक्रम में लगाए गए थे तो जाँचकर्ता परिकल्पना का निराकरण कर देगा और ऐसी सूरत में वो एल्फा नाम की त्रुटि करता हुआ कहा जाएगा अर्थात् एक सही परिकल्पना को अस्वीकार कर देगा ।

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