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Dictionary

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)(CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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vassal state

अवराज्य, अधीनस्थ राज्य
ऐसा राज्य जो किसी दूसरे संप्रभु राज्य के अधीन हो और विशेषकर विदेशी मामलों में इस दूसरे राज्य का नियंत्रण स्वीकार करता हो । अंतर्राष्ट्रीय विधि में ऐसा राज्य सीमित राज्यों की श्रेणी में आता है । यह सामंती और उपनिवेशवादी युग की व्यवस्था थी जिसका अब मात्र ऐतिहासिक महत्व रह गया है ।

Vatican City

वेटिकन नगर
इटली में रोम के निकट एक नगर – राज्य जिसका प्रधान ईसाइयों का धर्मगुरू पोप है । इसका क्षेत्रफल लगभग 100 एकड़ है और जनसंख्या केवल दो सौ । यद्यपि पोप को परंपरा और राज व्यवहार के अंतर्गत वे सभी अधिकार प्राप्त हैं जो अन्य राज्याध्यक्षों को अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत प्राप्त होते हैं परंतु इस नगर के क्षेत्रफल व अनसंख्या और इसके विशिष्ट उद्देश्यों को देखते हुए यह विवादग्रस्त है कि इस नगर को एक राज्य कहा जा सकता है या नहीं ।
दे. Holy see भी ।

veto

निषेधाधिकार, वीटों
किसी पदाधिकारी अथवा राज्य अथवा राज् समूह को किसी सामूहिक निर्णय के विरूद्ध मत देकर उसे निरस्त कर सकने का अधिकार निषेधाधिकार कहलाता है ।
संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् मे कोई भी निर्णय उस समय तक नहीं लिया जा सकता जब तक उसके पाँचों स्थायी सदस्य उस निर्णय के पक्ष में न हों । इन स्थायी सदस्यों में से यदि कोई भी एक या अधिक राज्य नरिणय के विपक्ष में मतदान क रते हैं तो उक्त निर्णय निरस्त माना जाता है और यह उनका निषेधाधिकार कहा जाता है ।

Vienna Congress

वियना सम्मेलन
यह सम्मेलन सितंबर 1814 से जून, 1815 तक हुआ और यद्यपि इसका मुख्य उद्देश्य नेपोलियन के यूद्दों से अस्त – व्यस्त ह ए यूरोप में शक्ति संतुलन की पुनः स्थापना करन था परंतु इस सम्मेलन ने अंतर्राष्ट्रीय विधि के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया । सर्वप्रथम इसने राजदूतों का वर्गीकरण और उनका वरीयताक्रम निर्धारित करने के लिए एक वनिनियम स्वीकार कीय जिसे वियना – विनियम कहा जाता है । इसके अंतर्गत राजदूतों के वरीयताक्रम अनुसार तीन व र्ग किए गए यथा, राजदूत या पोप के नन्सियों, दूत और मंतर् तथा कार्यवाहक दूत । दूसरे, आठ राज्यों ने एक संयुक्त घोषणा की कि दास व्यापार का उन्मूलन ऐसा विषय है कि जिस पर विचार किया जाना चाहिए और वे समय आने पर इसके लिए उपयुक्त कदम उठाएँगे ।

Vienna Convention on Consular Relations, 1963

वाणिज्य दूत संबंदं पर वियना अभिसमय, 1963
वाणिज्य दूत संबंधित वियना अभिसमय पर 24 अप्रैल, 1963 को हस्ताक्षर हुए थे । इनसे संबंधित प्रारूप अंतर्राष्ट्रीय विधि आयोग द्वारा तैयार किया गया था । इस अभिसमय में वाणिज्य दूतों के वर्गीकरण, उनके विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियाँ तथा इनसे संबंधित अन्य बातों का विस्तार से वर्णन किया गया था । वाणिज्य दूतों को चार श्रेणी में बाँटा गया है (1) महावाणिज्यदूत, (2) वाणिज्यदूत, (3) उपवाणिज्यदूत, (4) काउंन्सली एजेंट ।
इस अभिसमय से वाणिज्य दूतों के विशेषाधिकरों और उन्मुक्तियों का पूरी तरह संहिताकरण कर दिया गाय है ।

Vienna Convention on Diplomatic Relations, 1961

राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसम, 1961
इस अभिसमय पर 18 अप्रैल, 1961 को हस्ताक्षर हुए थे । इसका उद्देश्य राजनयिक प्रतिनिधियों के विशेषाधिकारों एवं उन्मुक्तियों को संहिताबद्ध करना था । इसका प्रारंभिक प्रारूप अंतर्राष्ट्रीय विधि आयोग द्वारा तैयार किया गया था । इस अभिसमय ने राजनयिक प्रतिनिधियों के उसी वर्गीकरण को स्वीकार किया जिसका निरूपण सर्वप्रतम 1815 के वियना विनियम द्वारा किया गाय था । अभिसमय में राजनयिक प्रतिनिधियों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों तता उनसे संबंधित अन्य बातें का विस्तृत वर्णन किया गया है । इब यह कहा जा सकता है कि इस अभिसमय से राजनयिक प्रतिनिधियों संबंधी अंतर्राष्ट्रीय क़ानून पूर्णतया संहिताबद्ध हो गया है ।

Vienna Convention on the law of treaties, 1969

संधि – विधि पर वियना अभिसमय, 1969
इस अभिसमय पर 23 मई, 1969 को हस्ताक्षर हुए थे और यह 35 राज्यों की संपुष्टि प्राप्त करने के उपरांत 27 जनवरी, 1980 से प्रबावकारी ह ई । इसका प्रारूप अंतर्राष्ट्रीय विधि आयोग ने वर्णों के सतत एवं अथक प्रयास से तैयार किया था । अमेरिकी विदेश विभाग ने 1971 में जारी किए गए एक वक्तव्य में यह घोषित किया कि वियना भिसमय संधि को संबंधी वर्तमान विधि एवं व्यवहार के पथ – प्रदर्शक के रूप मे समझा जाना चाहिए ।
अभिसमय में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जिन प्रश्नों का नियमन अभिसमय में नहीं किया गया है वे परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि व्यवहार द्वरा नियमित होते रहेंगे ।
यह अभिसमय संधि – विषयक अंतर्राष्ट्रीय विधि की एक व्यापक संहिता है । इसका अधिकांश भाग प्रचलित नियमों का संहिताकरण मात्र है । परंतु अभिसमय की अनेक व्यवस्थाएँ नवीन हैं जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय विधि के विकास का प्रमाण माना जा सकता है ।

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