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Dictionary

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)(CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Taiwan

ताइवान
चीन का एक भाग ताइवान और कुछ अन्य टापू, जिन्हें पहले फारमोसा कहा जाता था । 1949 में चीनी भू – भाग पर माओ-त्स-तुंग के नेतृत्व में साम्यवादी दल का आधिपत्य हो जाने के उपरांत चांगकाई शेक की राष्ट्रवादी सरकार ताइवैन में शरण ल ने के लिए विवश हुई और वहीं से पूरे चीन का शासक होने के दावा करने लगी, यहाँ तक कि सुरक्षा परिषद् के स्थायी स्थान पर भी उसी का प्रतिनिधि आसीन रहा । तब से 1971 तक बराबर यह प्रयास होता रह कि राष्ट्रवादी चीन का स्थान साम्यवादी चीन को दे दिया जाए । 1971 में यह प्रयास सफल हुआ परंतु ताइवान पर राष्ट्रवादीयों का आधिपत्य बना रहा । वस्तुतः ताइवान अब एक स्वतंत्र इकाई हो गाय है यद्यपि चीन का उस पर दावा बराबर बना हुआ है ।

termination of diplomatic mission

राजनयिक मिशन की स्माप्ति
राजनयिक मिशन की समाप्ति अनेक प्रकार से हो सकती है । इनमें निम्न लिखित विधियाँ प्रमुख हैं :-
1. प्रत्यायित राज्य द्वारा अपने राजदूत को वापस बुला लाय जाना ;
2. प्रत्यायित राज्य द्वारा इस बात की अधिसूचना देने पर कि राजदूत का कार्य समाप्त हो गाय है ;
3. जहां राजदूत प्रत्यायित है, उस देश द्वारा उसे वापस बुलाए जाने की मां किए जाने पर ;
4. जहाँ राजदूत प्रत्यायितहै, उस राज्य द्वारा किसी राजदूत को अवाँछित व्यक्तिघोषित कर दिए जाने पर ; और
5. विशेष मिशनों का समापन उनके उद्देश्य की पूर्ति के साथ हो जाता है ।

termination of occupation

आधिपत्य की समाप्ति
आधिपत्य के अंत का अर्थ यह है कि वैध संप्रभु द्वारा पुनः सत्ता प राप्त कर लेना अथवा संबंधित प्रदेश का अंतिम रूप से निपटारा कर दिया जाना । अधिपत्य की समाप्ति के निम्नलिखित उपाय हैं :-
1. प्रदेश को वैध संप्रभु द्वारा शत्रु आधिपत्य से मुक्त करा लिया जाए ;
2. स्थानीय जनता के सफल विद्रोह से विदेशी आधिपत्य समाप्त हो जाए ;
3. शआंति – संधि के अंतर्गत प्रदेश को मूल संप्रभु को लौटा दिया जाए या वह शत्रु – राज्य में मिला लिया जाए और
4. प्रदेश को एकपक्षीय घोषणा द्वारा विजेता राज्य अपने प्रदेश का भाग बना ले ।

termination of treaty

संधि की समाप्ति
प्रायः संधियाँ एक निश्चित अवधि के लिए की जाती हैं । अवधि समाप्त हो जाने पर संधि स्वतः समाप्त समझी जाती है जब तक कि संबंधित पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से निर्धारित प्रक्रिया द्वारा उसका नवीकरण न कर दिया जाए ।
अंतर्राष्ट्रीय विधि अवधि पूर्ण होने से पूर्व भी संधि की समाप्ति के नियम निर्धारित करती है, जो इस प्रकार है :-
1. संबंधित पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से ;
2. संबंधित राज्यों में युद्ध छिड़ जाने से भी कुछ संधियाँ विशेषकर द्विपक्षीय संधियाँ समाप्त हो जाती है ;
3. यदि एक पक्ष द्विपक्षीय या बहुपक्षीय संधि का पालन न करे तो दूसरा पक्ष या अन्य पक्ष उस संधि के पालन न करने का दावा कर सकते हैं ;
4. यदि उन परिस्थितियों मे आमूल – चूल परिवर्तन आ जाए जो संधि – संपादन की आवश्यक दशाएँ थी ; और
5. यदि एक पक्षकार का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए तो द्विपक्षीय संधियाँ समाप्त मानी जाती हैं ।

termination of war

युद्ध की समाप्ति
युद्ध की समाप्ति निम्न तरीकों से हो सकती है :-
1. सशस्त्र कार्रवाई रोक दिए जाने से ;
2. शत्रु – प्रदेश पर विजय प्राप्ति के उपरांत युद्धकारी द्वारा एकपक्षीय घोषणा करके शत्रु – प्रदेश को अपने राज्य में मिला लिए जाने से ;
3. शांति – संधि के द्वारा और
4. संबंधित युद्धकारियों के द्वारा स्वीकृत किसी भी अन्य उपाय द्वारा ।

terra nullius

स्वामीविहीन भूमि
दे. No man’s land.

territorial asylum

प्रादेशिक शरण
जब कोई राज्य किसी व्यक्ति को अपने प्रदेश में शरण देता है तो वह प्रादेशिक शरण कहलाती है । प्रदेश पर पूर्ण प्रभुसत्ता होने के कारण राज्य को यह अधिकार है कि वह किसी भी व्यक्ति को चाहे वह किसी प्रकार का अपराधी भी क्यों न हो अपने यहाँ प्रवेश करने ठहरने की अनुमति प्रदान कर शरण दे सकता है बशर्ते किसी संधि द्वारा उसने ऐसा करने पर कोई प्रतिबंध लगाना स्वीकार न कर लिया हो ।

territorial controversies

भूभागीय विवाद
राज्यों के भूभाग संबंधी पारस्परिक मतभेद अथवा विवादि जिनेहें वे अंतर्राष्ट्रीय विधि के विभिन्न नियमों के अंतर्गत पारस्परिक वार्ताओं द्वारा सुलझाने का प्रयत्न करते हैं । प्रायः राज्यों के पारस्परिक दावे ऐतिहासिक तथ्यों, खोज,. आधिपत्य आदि पर आधारित होते हैं ।

territoriality principle

प्रादेशीयता सिद्धांत
वह सिद्धांत जिसके अनुसार किसी राज्य द्वारा क्षेत्राधिकार का दावा इस आधार पर किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति अथवा वस्तु उसकी प्रादेशिक सीमाओं में है अथवा संबंधित घटना उसकी प्रादेशिक सीमा में घटित हुई है ।

territorial jurisdiction

भूभागीय अधिकार – क्षेत्र
प्रादेशिक सीमा से निर्धारित अधिकार – क्षेत्र जिसमें व्यापक रूप से (1) भीतरी भूभाग (2) अंतर्देशीय जल – क्षेत्र (3) भूभागीयसमुद्र, और (4) एक निश्चित सीमा तक आकाशीय भाग एवं इन विभिन्न क्षेत्रों में निवास करने वाले निवासी तथा वस्तुएँ सम्मिलित होती है । उनमें स्थित प्रत्येक वस्तु, रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति और घटने वाली प्रत्येक घटना पर उस राज्य के कानून लागू होते हैं ।

territorial sea

प्रादेशिक समुद्र
समुद्रतटीय देश के समुद्र तट से संलग्न समुद्र जिस पर तटवर्ती राज्य की संप्रभुता मानी जाती है । किंतु इसका विस्तार क्या हो और उसे निश्चित करने के लिए कहां से उसे नापा जाए, इसके बारे में विभिन्न राज्यों के बीच परस्पर – विरोधी विचार हैं । समुद्रतट के किस हिस्से से प्रादेशिक समुद्र की नाप शुरू की जाए इसके बारे में सामान्य सिद्धांत यह है कि इस नाप की आधार रेखा निम्न जलचिन्ह अर्थात् भाटे में समुद्र के पानी हटन की सबसे पिछली रेका को माना जाए । किंतु इस रेखा से प्रारंभ करके प्रादेशिक समुद्र की चौड़ाई कितने मील मानी जाए इसके बारे में काफी मतभेद हैं । शुरू में बिंरशॉक ने कहा था कि तोप के गोले की मार तक का समुद्री क्षेत्र प्रादेशिक समुद्र होना चाहिए । किंतु बाद मे सन् 1958 में जेनेवा में समुद्री क़ानून सम्मेलन बुलाया गया । प्रादेशिक समुद्र की सीमा क्या हो, इस विषय पर विभिन्न देशों में गंभीर मतभेद थे, इसलिए कोई एकमत निर्णय नहीं लिया गाय और विभिन्न देशों ने तीन मील से लेकर बारह मील तक की दूरी होने का समर्थन किया । अंततः सन्म 1982 में स्वीकृत समुद्र विधि अभिसमय में भूभागीय या प्रादेशिक समुद्र (जिसे भू – भागीय जल क्षेत्र अथवा समुद्री मेखला कहते हैं ) की दूरी बारह मील निश्चित कर दी गई ।

territorial sovereigaty

प्रादेशिक प्रभुसत्ता
राज्य के विशिष्ट तत्वों में निश्चित भूप्रदेश और उस पर पूर्ण तथा अनन्य सर्वोच्च सत्ता का होना अनिवार्य तत्व है । इस प्रभुसत्ता का अर्थ यह है कि राज्य के प्रदेश में विद्यमान व्यक्तियों, संपत्ति, प्रकृतिक संपदा पर राज्य का पूर्ण, अनन्य और स्वतंत्र अधिकार है , अन्य राज्य किसी भी परिस्थति में उस अधिकार को सीमित अथवा मर्यादित नहीं कर सकता । राज्यों के संबंद में प्रभुसत्ता का अर्थ स्वतंत्रता है और इसलिए यह अपेक्षा की जाती है कि विश्व के विभिन्न राज्य एक दूसेर की प्रादेशिक प्रभुस्त्ता का सम्मान करेंगे ।

territorial waters

भूभागीय समुद्र, प्रादेशिक जलक्षेत्र
दे. territorial sea.

terrorism

आतंकवादी
राजनीतिक और सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए व्यक्तियों अथवा व्यक्ति समूहों द्वारा अवैध हिंसात्मक और ध्वंसात्मक उपायों का सहारा लेना जिसका लक्ष्य प्रायः निर्दोष व्यक्ति अथवा व्यक्ति – समूह होते हैं और जिसमें अनेकि प्रकार के तरीके अपनाए जाते हैं जैसे हत्याएँ, विमान – अपहरण भयादोहन (blackmail) आदि ।
वर्तमान समय में आतंकवादी गतिविधियों ने अंतर्राष्ट्रीय विधिशास्त्रियों का ध्यान आकर्षित किया है और इस अंतर्राष्ट्रीय समस्या को नियंत्रित करन में अंतर्राष्ट्रीय विधि शात्रियों ने भी योगदान दिया है । उन्होंने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि आतंकवाद निर्दोष व्यक्तियों और निकायों के विरूद्ध किया गया अपराध मात्र है जिसको निर्धारित और दंडित करने के लिए राजनीतिक तर्क को प्रश्रय नहीं दिया जाना चाहिए । अनेक प्रत्यर्पण संधियों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आतंकवादियों को राजनीतिक अपराधियों की श्रेणी मे नहीं रखा जाएगा । कनाडा और ब्रिटेन के साथ हुई भारत की प्रत्यर्पण संधियों में आतंकवादियों को दंड देने और उनके प्रत्यर्पण स्पष्ट व्यवस्था की गई है ।
आतंकवाद का एक क्षेत्र वायु उड़ान है । इन क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधोयं को रोकने के हेतु मांट्रियल अभिसमय और टोकियो अभइसमय में व्यवस्थाएँ की गई हैं ।

thalweg

थाल्वेग सिद्धांत
नौगम्य नदियों में सबसे गहरी जलधारा जिसे जर्मन भाषा में थाल्वेग कहते हैं । ऐसी नदियों में विभाजन इसी धारा के बीच से किया जाता है । ओपेनहायम ने इसे नदी की मध्यधारा कहा है ।
दे. Medium filma aquaeभी ।

theatre of war

युद्ध क्षेत्र
वे समस्त भू, समुद्री तथा आकाशी प्रदेश जो प्रत्यक्ष रूप से युद्ध एवं विभिन्न प्रकार की युद्धात्मक कार्रवाइयों, गतिविधियों, क्रियाकलापों एवं संक्रियाओं में अंतर्गस्त हो जाते हैं ।

theory of contiguity

समीपता सिद्धांत
दे. Contiguity theory.

theory of dualism

द्वैधता सिद्धांत
दे. Dualistic theory.

theory of positivism

यथार्थवादी सिद्धांत
दे. Positivist school.

three mile rule

तीन मील का नियम
परंपरा से भूभागीय समुद्र की तट से दूरी तीन समुद्री मील मानी जाती रही है । पंद्रहवीं शताब्दी में अनेक ऐसे दृष्टांत मिलते हैं जिनमें राज्यों ने अपने – अपने समीपस्थ समुद्रों के स्वामित्व का दावा किया जिनके विरोध में ग्रोशस ने मुक्त समुद्र का सिद्धांत प्रतिपादित किया । सन् 1702 में बिंकरशॉक ने ग्रोशस के सिद्धांत को संशोधिक करते हुए यह स्वीकार किया कि तट से जिस सीमा तक समुद्र पर प्रभावकारी आधिपत्य किया जा सके वहाँ तक का समुद्र तटवर्ती राज्य का भूभाग समजा जाना चाहिए । उस समय तोप के गोले की अधिकतम मार तीन मील तक समझी जाती थी । अतः यह नियम प्रतिपादित किया गया कि तटवर्ती राज्य की समुद्रवर्ती सीमा तोप के गोले की मार तक अर्थात् तीन मील तक होनी चाहिए और महासमुद्र के तट से संलग्न तीन मील की दूरी तक के भाग को भूभागीय समुद्र कहा जाना चाहिए । इस प्रकार भूभागीय समुद्र की दूरी निर्धारित करने के लिए तीन मील के नियम का प्रादुर्भाव हुआ ।
ऐंग्लो – सेक्सन राज्य बराबर इस नियम का पालन करते रहे । परंतु लातीनी – अमेरिकी राज्य इससे संतुष्ट नहीं थे और उनके राष्ट्रीय दावने दो सौ मील के भूभागीय समुद्र के थे ।
सन् 1930 से बराबर यह प्रयास किया जाता रहा कि भूभागीय समुद्र की दूरी नियमबद्ध कर दी जाए । सन्म 1930 में आयोजित हेग संहिताकरण सम्मेलन में तीन मील के नियम पर राज्य सहमत न हो सके । सन्म 1958 में जेनेवा सम्मेलन में भी भूभागीय समुद्र की दूरी पर कोई समझौता नहीं हो सका । वास्तव में सन् 1958 तक तीन मील के समर्थक केवल ऐंगल् – सेक्सन राज्य ही रह गए थे । अधिकतर साम्यवादी राज्य बारह मील के भूभागीय समुद्र के पक्ष में जबकि लातीनी – अमेरिकी राज्य अपने 200 मील के भूभागीय समुद्र दावे पर अड़े रहे ।
अंत में तृतीय समुद्र विधि सम्मेलन में इस प्रश्न का समाधान हो पाया । 10 दिसंबर, 1982 को स्वीकृत समुद्र विदि अभिसमय में यह प्रावधान किया गया कि भूभागीय समुद्र तट से 12 मील की दूरी तक का होगा । इस प्रकार तीन मील के नियम का स्थान अब बारह मील के नियम ने ले लिया है ।
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