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Dictionary

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)(CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Namibia

नामीबिया
दक्षिणी – पश्चमी अफ्रीका को सन् 1966 के पश्चात् नामीबिया कहा जाने लगा । दक्षिणी – पश्चिमी अफ्रीका दक्षिणी अफ्रीकी संघ को अधिदेश व्यवस्थआ के अंतर्गत दिया गया एक अधिदेशित प्रदेश था । यह अधिदेशित प्रदेश था । यह अधिदेशित प्रदेशों में निम्नतम अथवा सी कोटि का प्रदेश था ।
दूसररे महायुद्ध की समाप्ति पर राष्ट्र संघ का विघटन हो गया और दक्षिणी अफ्रीकी संघ ने यह दृष्टिकोण अपनाया कि राष्ट्र संघ के विघटन से वह अधइदेश व्यवस्था के दायित्वों से मुक्त हो गाय है और उसे संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में याचिका प्रस्तुत की कि उसे दक्षिणी – पश्चिमी अफ्रीका को अपने राज्य में मिलाने की अनुमति दी जाए । महासभा ने इसे अस्वीकार कर दिया । लेकिन दक्षिणी – अफ्रीकी संघ अपनी नीति पर अडिग रहा । उसने नामीबिया के विय में महासभा को भेजे जाने वाले प्रतिवेदन बंद कर दिए ।
इधर दक्षिणी – पश्चीमी अफ्रीका में स्वतंत्रता आंदोलन प्रारंभ हो गया और महासबा ने भी 28 अक्तूबर 1966 को एक प्रस्ताव पारित कर याह घोषित कर दिया कि दक्षिणी – पश्चिमी अफ्रीका पर दक्षिणी – अफ्रीकी संघ को दिया गया अधिदेश तत्काल समाप्त किया जाता है और इस प्रदेश के शासन का दायित्व अब प्रत्यक्ष रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ का होगा । शासन संचालन के लिए महासबा ने एक समिति का गठन भी कर दिया परंतु दक्षिणी अफ्रीका इस प्रदेश से अपने दावे का परित्याग करने पर सहमत नहीं हुआ । उसने समिति के सदस्यों को प्रदेश में प्रवेश करने की भी अनुमति नही दी ।
अब दक्षिणी – पश्चिमी अफ्रीका का नाम बदलकर नामीबिया कर दिया गया । विधि की दृष्टि से यह संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा एक शासित प्रदेश बन गाय जोकि अपने – आप मे एक नवीन अवधारण है । परंतु सथ्यात्मक दृष्टि से नामीबिया पर दक्षी – अफ्रीकी संघ का शासन और नियंत्रण बना रहा ।
यह एक अंतर्राष्ट्रीय विषमता और तनाव की स्थिति थी । इसे समाप्त कनरे के लिए दक्षिणी – अफ्रीकी संघ पर निरंतर दबाव डाला जाता रहा । अंत में दक्षिणी – अफ्रीकी संघ नामीबिया को स्वतंत्र करने प्र सहमत हो गाय ।

nationality

राष्ट्रिकता, राष्टरीयता
किसी व्यक्ति द्वारा जन्म के आधार पर अथवा देशईयकरण की प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त नागरिकता । वस्तुतः नागरिकता और राष्ट्रिकता पर्यायवाची कहे जा सकते हैं ।
विदेशियों द्वारा नागरिकता अथवा राष्ट्रिकता की प्राप्त संबंधित राज्य के नियमानुसार की जा सकती है ।
सन् 1948 के मानव अधिकार घोषण – पत्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रिकता का अधिकार है ।
वास्तव में राष्ट्रिकता अथवा नागरिकता व्यक्ति को राज्य से जोड़ने वाली कड़ी है जिससे उसेक अधिकार और कर्तव् निर्धारित होते हैं । राष्ट्रिकता के कारण प्रत्येक व्यक्ति राज्य के कानूनों के अधीन रहता है । रपाज्य के प्रति व्यक्ति की निष्ठा का भी यही आधार हैं ।
अधिकार के रूप में व्यक्ति को सदैव अपने राज्य से संरक्षण पाने का अधिकार रहता है, विशेषकर यदि वह किसी अन्य देश में है और वहाँ उसके जान एवं माल की हानि होती है या उसके साथ न्याय वंचन होता है तो वह अपने राज्य से अपने संरक्षण के लिए उचित उपाय करने की माँग कर सकता है ।
बहुथा राज्य अपने नागरिकों का प्रत्यर्पण किसी दूसरे देश को नहीं करते, दूसरे देशों मे उनके द्वारा अपराध होने पर वे स्वयं उसके विरूद्ध कार्यवाही करने का दावा करते हैं ।
राष्ट्रिकता को लेकर अनेक वैधिक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं जिनमें दोहरी नागरिकता और राज्यविहीनता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं ।

nationality principle

राष्ट्रिकता सिद्धांत
वह सिद्धांत जिसके अनुसार किसी भी घटना में क्षेत्राधिकार का दावा राष्ट्रिकता के आधार पर किया जाता है ।
दे. Active natinalilty principle भी ।

nationality theory of jurisdiction

क्षेत्राधिकार का राष्ट्रीयता सिद्धांत
वह सिद्धांत जिसके अनुसार क्षेत्राधिकार का निर्धारण घटना स्थल से न होकर घटना अथवा अपराध के कर्ता की राष्ट्रीयता से होता है । विदेशों में अपने नागरिकों पर किसी राज् के क्षेत्राधिकार का यही आधार है । इस प्रकार के क्षेत्राधिकार को वैयक्तिक क्षेत्राधिकार कहा जाता है ।

national self determination

राष्ट्रीय आत्मनिर्णय
प्रत्येक राष्ट्र का अपनी शासन प्रणाली स्वेच्छानुसार निर्धारित करने का अधिकार जिसके लिए उसका एक

national waters

राष्ट्रीय जलक्षेत्र
किसी राज्य के प्रदेश में स्थित वे जलक्षेत्र जैसे, नदियाँ, खाड़ियाँ, बंदरगाह, महरें, झीलें आदि जो राज्य के पूर्म क्षेत्राधिकार एवं नियंत्रण मे होते हैं । राष्ट्रीय जलक्षेत्रों मे संभवतः देश के भूभागीय समुद्र एवं मत्स्यहरण – क्षेत्र को भी शामिल किया जा सकता है ।

NATO

नाटो, उत्तरी एटलांटिक संधि संगठन
साम्यवादी प्रसार के खतरे के विरूद्ध 1949 म गठित एक क्षेत्रीय सैनिक संगठन । इसका गठन संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रयासों के फलस्वरूप किया गया था । उक्त संगठन के सदस्य देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका,युनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इली,पुर्तगाल, डेनमार्क, नावे, आइसलैंड, बैल्ज़ियम, हालैंड, लक्समब्रग, ग्रीस तथा टर्की शामिल हैं । इस संगठन का मुख्य उद्देश्य संबंधित देशों की सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था करना है । इसका स्थायी सैनिक मुख्यालय बैल्ज़ियम की राजधानी ब्रुसेल्स मे स्थित है ।

natural boundary

प्राकृतिक सीमा
दो राज्यों के भूभागों को पृथक् करने वाले प्राकृतिक विभाजक जैसे नदी – नाले, चट्टानें, समुद्रतट, पर्वतमाला आदि ।

naturalist school

प्रकृतिवादी संप्रदाय
अंतर्राष्ट्रीय विदि के आधार के संबंध में विद्वानों का वह समूह जो प्राकृतिक विधि को अंतर्राष्ट्रीय विदि का आधार एवं स्रोत मानता है । इन विद्वानों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय विदि को प्राकृतिक विधि के उन सर्वव्यापी नियमों का संग्रह कहा जा सकात है जो राज्यों के पारस्परिक संबंधों में लागू होते हैं ।
प्राकृतिवादी के समर्थकों में प्यूफनडार्फ, टामसियम, फ्रांसिस अचेसन, टॉमस रदरफोर्थ, जीन बार्बेरक, जीन जैक्स बर्लामाकी आदि के नाम उल्लेखनीय हैं ।

naturalization

देशीयकरण
व्यक्तियों द्वारा किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करना । ऐसा विदेशी राज्य के काननों के अंतर्गत निर्धारित शर्तों को पूरा करके काय जा सकता है जैसे दीर्घ निवास से, अचल संपत्ति प्राप्त करके, विवाह आदि से । परंतु विभिन्न देशों में इसके लिए विभिन्न नियम हैं ।
दे. acquisition of citizenship भी ।

natural law

नैसर्गिक विधि, प्राकृतिक विधि
दे. Jus naturale.

naval blockade

समुद्री नाकाबंदी
युद्धकारी द्वारा अनपे शत्रु देश के बंदरगाहों एवं तट से आवागमन का मार्ग अवरूद्ध कर देना ताकि उसका संपूर्ण समुद्री व्यापार बंद हो जाए और उसे बाहर से कोई अस्त्र – शस्त्र अथवा रसद पूर्ति प्राप्त न हो सके और न ही उसके तट एवं बंदरगाहों से कोई जलपोत बाहर जा सके । यह नौसैनिक युद्ध में अंतर्राष्ट्रीय विधि द्वारा मान्यताप्राप्त एक वैध संक्रिया है जिसके नियम समय – समय पर निर्धारित हुए हैं और जिनमें मुख्य नियम यह है कि वैध होने के लिए नाकाबंदी प्रभावकारी होनी चाहिए और इसकी विधिवत सार्वजनिक घोषणा की जानी चाहिए ।

navy cert

नौ पत्र
युद्धकाल में सद्भावी तटस्थ व्यापार को संरक्षण देने हेतु युद्धकारियों द्वारा तटस्थ नौ परिवहन कंपनियों को उनके जलपोतों में लदे नौभार का परीक्षण कर प्रदान काय जाने वाला प्रमाणपत्र जिसका उद्देश्य यह था कि इस नौभार का मार्ग में निरीक्षण न हो और यह विलंब व अन्य असुविधाओं से बच सके । अगस्त, 1940 में एक अन्य प्रणआली प्रारंभ की गई जिसके अंतर्गत जलपोतों को उनके स्वामियों द्वारा निषिद्ध व्यापार न करने का वचन देने पर अधिपत्र दिए जाते थे । अगस्त, 1942 के उपरांत अधिपात्र प्राप्त जलपोत ही नौ पत्र प्राप्त कर सकते थे ।

negotiation

वार्ता संधिवार्ता, समझौते की बातचीत
दो या दो से अधिक देशओं के अध्यक्षों अथवा उनके राजनयिक प्रतिनिधियों के बीच कोई राजनीतिक, वाणिज्यिक अथवा किसी भी विषय से संबंधित संधि संपन्न करने, किसी अंतर्राष्ट्रीय मामले में मतैक्य स्थापित करन या किसी विवाद का समाधान ढूंढ निकालने की दृष्टि से की गई पारस्परिक चर्चा, वार्ता अथवा पत्राचार ।
अंतर्राष्रीय विवादों के समाधान के शांतिपूर्ण उपायों में वाता को प्रथम स्थान दिया जाता है । सुंक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 33 मे बी वार्ता को अंतर्राष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए प्रथम स्थान दिया गया है ।

neutral duties

तटस्थ कर्तव्य
युद्दकारी के प्रति तटस्थ राज्यों के कर्तव्यों को तटस्थ कर्तव्य कहते हैं । इन कर्तव्यों का सर्वप्रथम निरूपण अलाबामा नियमावली में किया गया था । दूसरे हेग सम्मेलन (1907) के एक अभिसमय में भी तटस्थ राज्यों के अधिकारों और कर्तव्यों का विस्तृत निरूपण किया गया था । ओपेननहायम के मतानुसार तटस्त राज्यों के दो मूल कर्तव्य हैं :-
1. युद्धकारियों के प्रति तटस्थता के अनुरूप व्यवहार करना और
2. युद्धकारियों द्वारा तटस्थ वणिक पोतों की तलाशी लेने और उनके दोषी पाए जाने पर उनको दंडित करने पर कोई विरोध न करना अर्थात् इसे मौन रहकर अपनी सहमति प्रदान करना ।

neutral goods

तटस्थ माल
ऐसा सामान जोतटस्थ राज्य के नागरिकों या स्वयं तटस्थराज्य का हो, चाहे वह शत्रु पोत पर पाया जाए या तटस्थ पोत पर । ऐसा मालयुद्धकाल मं युद्धकारी संक्रिया से उन्मुक्त होता है ।

neutralism

तटस्थतावाद
संघर्षरत राज्यों मं से किसी भी राज्य का पक्ष न लेने तथा दोनों के प्रति समभाव बनाए रखने की नीति ।
कुछलेखक इस शब्द का प्रयोग उन दोशों के लिए करते हैं जो द्वितीय महायुद्ध के उपरांत शीत युद्ध के परिप्रेक्ष्य में गुट – निरपेक्षता अथवा अंसलग्नता की नीति अपना रहे ते ।

neutrality

तटस्थता
युद्ध प्रारंभ होने की स्थिति मे युद्धकारी राज्यों के संघर्ष में भाग न लेने या किसी भी प्रकार से उनकी सहायता न करने की अवस्था । यह एक विशेष प्रकार की वैधिक स्थिति है जिसको युद्धकारी भी मान्यता देते हैं और जिससे युद्ध में भाग न लेने वाले राज्यों को कुछ अधिकार व कर्तव्य प्राप्त होते हैं । वास्तव में तटस्थता से युद्धकारी व तटस्थ दोनों देशों को कुछ अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं । जो युद्धकारी के अधाकर हं, वे तटस्थ राज्यों के कर्तव्य होते हं और जो युद्धकारी के कर्तव्य हैं, वे तटस्थ राज्यों के अधिकार होते हं । तटस्थता वस्तुतः इन अधइकारों और कर्तव्यों का ही दूसरा नाम हैं ।

neutrallity treaty

तटस्थता संधि
किन्हीं दो या दो से अधिक राज्यों के बीच इस आशय से निष्पादित संधि या समझौता कि संधिकर्ता राज्यों में से किसी राज्य का किसी अन्य राज्य के साथ सैनिक संघर्ष होने की स्थिति में संधिकर्ता राज्य निष्पक्ष तथा तटस्थ रहेंगे और साथ ही युद्धकारी राज्यों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, किसी भी रूप में सैनिक या आर्थिक सहायता प्रदान नही करेंगे ।

neutralization

तटस्थीकरण
महाशक्तियों द्वारा एक सामूहिक समझौते के माध्यम से किसी राज्य को स्थायी रूप से तटस्थ गोषित कर देने की प्रक्रिया जिसके फलस्वरूप वह राज्य कभी भी युद्ध होने पर तटस्थ रहने के लिए वचनबद्ध रहता है अथवा उसको युद्ध में सम्मिलित रहने का अधिकार नही रहता । इसके बदले मे इसी समझौते के अंतर्गत इस राज्य को उसकी स्वतंत्रता तथा प्रादेशिक अखंडता की गारंटी भी दी जाती है ।
तटस्थीकरण के पीछे दो कारण होते हैं । पहला, शक्तिशाली राज्यों की सीमाओं के बीच यदि कोई राज्य स्थित है (जैसे स्विटज़रलैंड) तो वह इन राज्यों के मद् अंतःस्थ राज्य (buffer state) का कार्य करे और इनके बीच शांति बनाए रखने में योगदान दे । दूसरा, छोटे राज्यों की शक्तिशाली पड़ौसी राज्यों से रक्षा की जाए ताकि पड़ौसी शक्तिशाली राज्य छोटे राज्यों को हड़पकर शक्ति संतुलन न बिगाड़ दें ।
तटस्थीकृत राज्य का सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक उदाहरण स्विटड़लैंड है, जो 1815 की वियना संधि के अंतर्गत तटस्थीकृत राज्य घोषित किया गया था और जो निरंतर अपनी तटस्थता बनाए हुए है । यहाँ तक कि स्विटड़रलैंड संयुक्त राष्ट्र संघ का भी सदस्य नहीं है ।
1. विश्व मे विद्यामान वर्तमान आर्थिक असमानताओं का अंत किया जाना और इसके लिए सभी राज्यों का सहयोग ;
2. बहुराष्ट्रीय निगमों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के हित में नियमन और निरीक्षण ;
3. विकासशील राज्यों द्वारा निर्यात किए जाने वाले कच्चे माल तथा नके द्वारा आयात किए जाने वाले माल के मूल्यों में उचित संबंध ;
4. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा विकासशील देशों को राजनीतिक अथवा सैनिक शर्तों से मुक्त सहायता का प्रसार ; और
5. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्था में विकासशील देशों के हित मे सुधार ।
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