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Dictionary

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)(CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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federation

संघ, संघ – राज्य
दो अथवा अधिक राज्यों द्वारा कुछ सामान्य उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु किसी संधि अथवा समझौतों के माध्यम से स्थायी सम्मिलन । इस रूप में सम्मिलित हुए राज्य अपने अधिकारों और शक्तियों तथा उनके द्वारा निर्मित केन्द्रीय सत्ता के अधिकारों और शक्तियों का निर्णय और उपभाग इस हेतु अपनाए गे संविदान द्वारा तय करते हैं । संघ अपने सदस्य – राज्यों के साथ एक नवीन राज्य का रूप धारण करता है और इसे अपने सदस्य – राज्यों तता उनके नागरिकों पर पूरा अधिकार प्राप्त होता है । सदस्य – राज्य अपने आंतरिक मामलों में स्वायत्त होते हैं किंतु विदेशी मामले संघ – राज्य के एकाधिकार मे होते हैं, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि और कानून में संघ – राज्य का ही अस्तित्व माना जाता है और संघांतरित इकाइयों को अंतर्राष्ट्रीय व्यक्ति नहीं माना जाता । संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विटज़रलैंड, भारत, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि इस प्रकार के संघ – राज्यों के प्रसिद्ध उदाहरण हैं ।

final act (=acte finale)

वृत्त् सार
जिस प्रपत्र में किसी संधि – निर्मात्री – सम्मेलन की कार्यवाही के अंतिम निष्कर्षों अथवा निर्णयों को लिपिबद्ध किया जाता है, उसे वृत्तासार कहते हैं । इसमें सम्मेलन के विचारार्थ विषयों का सारांश, सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्यों और राज्याध्यक्षों के नाम, सम्मेलन द्वारा अपनाए गए अभिसमय अथवा संधि का सारांश दिया रहता है । इसमें उन प्रस्तावों, घोषणाओं एवं संस्तुतियों का भी उल्लेख रहता है जिन्हें सम्मेलन ने स्वीकार किया है, परंतु यह अभिसमय अथवा संधि के भाग के रूप में नहीं होता । कभी – कभी इसमें संधि अथवा अभिसमय के प्रावधानों की व्याख्याएँ भी रहती हैं । वृत्त सार पर सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्य हस्ताक्षर करते हैं परंतु प्रायः इसकी पुष्टि की आवश्यकता नहीं होती
कभी – कभी फाइनल ऐक्ट पद का प्रयोग संधि के पर्याय के रूप में बी किया जाता है ।

fisheries zone (=fishries)

मत्स्यहरण क्षेत्र
तट से संलग्न समुद्र का वह भाग जिसमें तटवर्ती राज्य को मत्स्याहरण एवं तत्संबंधी अधिकार प्राप्त होते हैं । यह विवादग्रस्त है कि तटवर्ती राज्य कितनी दूरी तक मत्स्याहरण के अनन्य क्षेत्र का दावा कर सकता है । प्रारंभ में मत्स्याहरण क्षेत्र भूभागीय समुद्र के समुद्री छोर से 12 मील तक का माना जाता था । परंतु राज्यों के राष्ट्रीय दावों में कोई एकरूपता या स्थिरता नहीं थी । आइसलैंड अपने तट से पहले 50 मील तक और फिर 100 मील तक अनन्य मत्स्याहरण का अनन्य राष्ट्रीय दवा करता था जिसका ग्रेट ब्रिटेन ने सदैव विरोध किया ।
ये विभिन्न विवाद संभवतः 200 मील के अनन्य आर्थिक क्षेत्र के स्वीकार हो जाने से अब समाप्त समझे जाने चाहिए ।

Five Freedoms Agreement (=International Transport Agreement)

पांच स्वतंत्रताएँ समझौता, अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन समझौता
सन् 1944 में शिकागो सम्मेलन में संपन्न अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन समझौते के अंतर्गत आकाश मे परिवहन हेतु निम्नलिखित स्वतंत्रताओं को मान्यता दी गई :-
1. बिना धरती पर उतरे विदेशी वायु क्षेत्र से उड़ान का अधिकार ;
2. गैर – यातायात उद्देश्यों के लिए भूमि पर उतरने का अधिकार ;
3. विदेश में उन यात्रोंयों माल व डाक को उतारने का अधिकार, जो वायुयान के मूल राज्य से लिए गए हों ;
4. विदेश में उन यात्रियों, माल अथवा डाक को लेने का अधिकार जिनका गन्तव्य स्थान वायुयान का मूल राज्य हो ; और
5. दो विदेशी राज्यों के बीच माल, डाक तथा यात्री लाने – ले जाने का अधिकार ।
ये पाँच स्वतंत्रताएँ अनुसूचित अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं के लिए नहीं थीं । इस तरह की सेवाओं को संबंधित राज्यों के मध्य परस्पर समझौतों पर छोड़ दिया गया ।

flag state

ध्वज राज्य
अंतर्राष्ट्य नियमों के अनुसार महासमुद्र में परिवहन करने वाले राज्य के जलपोत पर उस राज्य का ध्वज होना अनिवार्य है जहाँ वह जलपोत पंजीकृत है । यह ध्वज उस जलपोत की राष्ट्रिकता का द्वयोतक है ।

floating island

तिरता द्वीप तैरता टापू
क्षेत्राधिकार की दृष्टि से जलपोत को उस र्जाय के प्रदेश का अंग माना जाना जिस देश का ध्वज उस पर लगा हुआ है । इसके अनुसार यह जहाज चाहे महासमुद्र में हो या किसी अन्य देश की सामुद्रिक सीमा में इसे ध्वज वाले देश का तैरता हुआ टापू समझा जाता है और यदि उस जहाज पर कोई अपराध होता है तो उसकी सुनवाई और निर्णय करने का अधिकार ध्वज राज्य का ही होता है ।
यह सिद्धांत विशेष रूप से युद्धपोतों और सरकार के स्वामित्व में अन्य गैर – वाणिज्यिक कोतों पर लागू होता है । परंतु अनेक विद्वान् यह स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं हैं कि जलपोत को ध्वज राज्य का तैरता ह आ भाग माना जाए । इस संदर्भ में लोटस (1927) के मामले में स्थायी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय और चंग ची चुंग बनाम सम्राट (1939) के मालमे में ग्रेट ब्रिटेन की प्रिवी कौंसिल का निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं ।

Food and Agriculture Organisation (FAO)

खाद्य तथा कृषि संगठन
संयुक्त राष्ट्र संघ कासबसे पहले स्थापित विशेष अभिकरण । इसकी स्थापना 1945 में क्यूबेक (कनाडा) में की गई । इसका उद्देश्य विश्व की जनता के जीवन तता पोषण स्तर मे सुधार करना, खाद्य तथा कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाना और उनके कुशल वितरण को बढ़ावा देना है ।

force majeure

दैवी बाध्यता
प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न ऐसी विपदाजनक स्थितियाँ जो मानवीय नियंत्रण में न हों और जिनके कारण अंतर्राष्टरीय विधि के अनेक नियमों के उल्लंघन क्षम्य माने जा सकते हैं जैसे युद्धकाल में खराब मौसम के कारण किसी तटस्थ जलपोत की किसी नाकेबंद बंदरगाह मे प्रवेश ।

foreign policy

विदेश नीति
विदेश नीति से तात्पर्य किसी राज्य द्वारा अपनाए गए उन सिद्धांतो तथा निर्णयों से है जिनका विषय उस राज्य के अन्य राज्यों से संबंध एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों तता संस्तानों में उस राज्य की स्थिति एवं दृष्टिकोण से होता है । इसका केंद्रभीत उद्देश्य राष्ट्र हित की अभिवृद्धि करना होता हो, अतः इसके निर्धारण में अनेक राष्ट्रीय तत्व प्रभावकारी होते हैं ।

franchise du quartier

शरण अधिकार
किसी राज्य के भागे हुए व्यक्ति को शरण देने का अधिकार । इसका प्रयोग बहुधा राष्ट्रीय विधि अथवा अंतर्राष्ट्रीय विधि द्वारा नियमित होता है । उदाहरणार्थ युद्ध में किसी युद्धकारी के भगोड़े सैनिकों को आश्रय देना ।

free articles

मुक्त वस्तुएँ
वे वस्तुएँ जो किसी भी दशा में युद्धकाल में विनिषिद्ध वस्तुएँ घोषित नहीं की जा सकती जैसे काँच और जीनी मिट्टी के बर्न, साबुन, रंग इत्यादि । वर्तमान परिस्थितियों में वस्तुतः किसी भी वस्तु को इस श्रेणी में नहीं रखा जा सकता अतः यह संकल्पना ही ऐतिहासित महत्व की बनकर रह गई है ।

freedom of fishing

मछली पकड़ने की स्वतंत्रता
मत्स्यहरण स्वतंत्रता समुद्री स्वतंत्रताओं में से एक है, जिसे परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि में मान्यता दी जाती रही है और जिसे 1958 के तत्संबंधी जेनेवा अभिसमय और 1982 के तृतीय समुद्री विधि अभिसमय ने भी मान्यता दी । इनके अनुसार सभी राज्यों को खुले समुद्र में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों को प्राप्त करने और मछली कपड़ने का पूरा अधिकार है तथा ऐसा कार्य करने वाले जहाजों को स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने से कोई राज्य रोक नहीं सकता । मछली पकड़ने के इस विशेष अधिकार के साथ – साथ राज्यों को कुछ कर्तव्य और दयित्व निभाने के लिए भी कहा गया है, जैसे कि वे संधियों से उत्पन्न दायित्वों का निर्वाहि करें, तटवर्ती राज्यों के हित और अधिकारों की अवहेलना न करें, जीवित प्राणियों के संरक्षण के लिए किए जाने वाले उपायों में एक दूसरे का सहयोग करें और यदि खुले समुद्र के किसी भाग में दो या अधिक राज्यों के नागरिक मछली पकड़ते हैं तो एक दूसरे के ऐतिहासिक अधिकार का सम्मान करें ।

freedom of navigation

नौ- परिवहन की स्वतंत्रता
प्राचीन काल से मनुष्य समुद्रों में परिवहन करता रहा है और सोलहवीं शताब्दी में ग्रोशस ने सर्वप्रथम यह सिद्धांत प्रतिपादित किया कि महासमुद्र मे सभी राज्यों के नागरिकों को समान एवं निर्बाध रूप से नौ- वहन का अधिकार होना चाहिए । इस प्रकार महासमुद्र में नौ – वहन का अधिकार एक सुस्थापित अधिकार के रूप में प्रतिष्ठित हो गया जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि ने मान्यता दी । सन् 1958 के महासमुद्र विषयक जेनेवा अभिसमय में जिन समुद्री स्वतंत्रताओं का उल्लेख किया गया है उनमें नौ – परिवहन की स्वतंत्रता को प्रथम स्थान दिया गया है । इसका र्थ यह है कि महासमुद्रों में नौ – परिवहन का अधिकार सभी राज्यों और उनके नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है ।
इस परंपरागत अधिकार को वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय विधि का योगदान यह है कि इसने उन राज्यों को भी महासमुद्र में नौ – परिवहन का अधिकार प्रदान किया है जिनका अपना कोई समुद्र – तट नहीं है और जो चारों ओर से अन्य देशों से घिरे हुए हैं और जिन्हें भूबद्ध – राज्य कहा जाता हैं ।
ऐसे भूबद्ध राज्य पड़ौसी समुद्रतटीय राज्यों से समझौता करके समुद्र का प्रयोग नौ – परिवहन के लिए कर सकते हैं । ऐसे राज्यों के जलपोतों को साथ विदेशी पत्तनों में अन्य राज्यों के जलपोतों के समान व्यवहार किए जाने की भी व्यवस्था की गई है ।

freedoms of the high sea (= freedoms of the open sea)

महासमुद्र की स्वतंत्रताएँ
1958 में जेनेवा में हुए समुद्री सम्मेलन में खुले समुद्रों पर एक अभिसमय पारित किया गया जिसके अनुसार समुद्र के वे भाग जो राज्य के प्रादेशिक समुद्र तथा उसके आंतरिक जल की सीमा के अंतर्गत नहीं आते, सबदेशों के लिए समान रूप से खुले हुए हैं और इनके किसी भाग पर कोई राज्य वैध रूप से अपनी प्रभुसत्ता स्थापित नहीं कर सकता ।
खुले समुद्र की स्वतंत्रताओं में निम्नलिखित बातें शामिल हैं नौचालन की स्वतंत्रता मछली पकड़ने की स्वतंत्रता, समुद्रतल में तार तथा पाइप लाइन बिछाने की स्वतंत्रता खुले समुद्र के ऊपर उड़ने की स्वतंत्रता, कृत्रिम टापू एवं अन्य प्रतिष्ठान निर्मित करने की स्वतंत्रता तथा वैज्ञानिक अनुसंधान की स्वतंत्रता । अंतिम दो स्वतंत्रताएँ 1982 के अभिसमय का योगदान हैं । इसके अतिरिक्त 1982 के आभिसमय में अनन्य आर्थिक क्षेत्र के प्रावधान से महासमुद्र में राज्यों के मत्स्याहरण का अधिकार तटवर्ती राज्य के अनन्य आर्थिक क्षेत्र के समुद्रवर्ती छोर से प्रारंभ होता है क्योंकि अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मत्स्याहरण का एकमात्र अधिकार तटवर्ती राज्य का होता है ।

freedoms of the open sea

महासमुद्र की स्वतंत्रताएँ
दे. Freedoms of the high sea.

Full Powers

पूर्ण अधिकार – पत्र
वह अधिकारि – पत्र जो राज्य की ओर से संधि के संपादन करने के उद्देश्य से प्रत्यायित प्रतिनिधि को दिया जाता है । यह अधिकार – पत्र राज्याध्यक्ष अथवा विदेश – मंत्री द्वारा दिया जाता है । यह इस बात पर निर्भर करता है कि संधि राज्याध्यक्षों के नाम से की जा रही है या राज्य अथवा सरकार के नाम से ।
संधि करने के लिए यदि राज्याध्यक्ष अथवा शासनाध्यक्ष अथवा विदेश मंत्री स्वयं व्यक्तिगत रूप से जाते हैं तो उन्हें इस प्रकार के अधिकार – पत्र की आवश्यकता नहीं होती
राजदूत जिस देश में प्रत्यायित है, यदि उस देश से संधि संपादन मे भाग लेता है तो उसे भी अधिकार – पत्र की आवश्यक्ता नहीं होती ।
इन सभी पदाधिकारियों का संधि करने का अधिकार पदेन अथवा इनके पद में निहित होता है ।

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