भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)(CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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arms control

आयुध नियंत्रण, शस्त्र नियंत्रण
युद्ध के संकट को दूर करने के उद्देश्य से परस्पर सहमति द्वारा अपनाई गई ऐसी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था जिसके अंतर्गत राज्यों द्वारा अपने अस्त्र भंडारों में अभिवृद्धि करने, नए अस्त्र – शस्त्रों का उत्पादन करने या विदेशों से आयात करने पर प्रतिबंध लगाया जाता है । इस प्रकार का नियंत्रण कुछ विशेष संदर्मों में सफलतापूर्वक किया गया है जैसे, आण्विक परीक्षणों पर रोक, किन्हीं भौगोलिक क्षेत्रों जैसे एन्टर्कटिका का विसैन्यीकरण आदि ।

arms embargo

शस्त्र प्रतिषेध, आयुध प्रतिषेध
प्रारंभ में ‘प्रतिषेध’ पद का अभिप्राय युद्ध छिड़ने पर बन्दरगाहों मे खड़े जलपोतों के निर्गमन पर रोक लगाने से होता था परन्तु कालांतर मे इसका व्यापक अर्थ लिया जाने लगा और सभी अस्त्रि – शस्त्रों के निर्यात पर प्रतिबंध इसकी परिधि में आ गय़आ और इस प्रकार इसे शस्त्र प्रतिषएध कहा जाने लागा । इस प्रकार के ‘शस्त्र प्रतिषेध’ संयुक्त राज्य अमेरिका ने अनेक बार लगाए हैं ।

arrangment

अनंतिम समझौता
अंतर्राष्ट्रिय विधि में अनंतिम अथवा अस्थायी प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय समझौता ।

artificial boundaries

कृत्रिम सीमाएँ
जब दो राज्यों के बीच प्राकृतिक सीमाएँ नहीं होती तो काल्पनिक रेखाओं द्वारा उनकी सीमाएँ निर्धारित की जाती है । ये रेखाएँ अक्सर अक्षआंश रेखाएँ (latitudes) होती हैं किन्तु कभी – कभी दीवारें बनाकर, स्तंभ या खंभे खड़े करके अथवा काँटेदार तार लगाकर भी सीमाओं का अंकन किया जाता है । उत्तरी और दक्षिणी कोरिया की सीमा 38 वीं उत्तरी अक्षआंश तथा अमरीका और कनाडा की 19 वीं उत्तरी अक्षआंश रेखा निश्चित की गी ।

ASEAN

दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संघ, आसियान
1967 में स्थापित एक क्षेत्रीय संगठन जिसके सदस्य राष्ट्र इंडोनेशिया मलयेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर और थाईलैंड हैं । इस संगठन का उद्देश्य सदस्त देशों की राजनीतिक, आर्थिक सामाजिक वं सांस्कृतिक विषयों से संबंधित सामान्य समस्याओं एवं विकास की योजनाओं पर समय – समय पर विचार -विमर्श कर कार्यक्रम निर्धारित करना है ।

Asian African Legal Consultative Committee

एशियाई अफ्रीकी विधि परामर्श दात्री समिति
यह अंतर्राष्ट्रीय विधि के विभिन्न प्रश्नें पर विचार करने और सरकारों को अंतर्राष्ट्रीय विधि की समस्याओं पर परामर्श देने वाली संस्था है । यह 1956 में एशियाई राज्यों से ही संबंधित थी किन्तु 1958 में अफ्रीकी राष्ट्रों के जुड़ जाने से इसका वर्तमान नामकरण हुआ है । समिति ने अंतर्राष्ट्रीय विधि के कतिपय महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य किया है जिनमें शरणार्थियों से जुड़ प्रश्नों, राजनयिकों से संबंधित नियमों और समुद्र विधि के कई पक्षों पर एशियाई और अफ्रीकी राज्यों के दृष्टिकोण को अंतर्राष्ट्रीय विधि के निर्माण मे विभिन्न मंजों पर प्रसुत्त किया है । समिति का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है । नवोदित राज्यों के प्रमुख मंचों में इसकी गिनती की जाती है ।

associate membership

सहसदस्यता
किसी संगठन या संघ के उन सदस्यों की स्थिति जिन्हें सदस्यता के पूर्ण अधिकार और मुख्य रूप से मताधिकार प्राप्त न हो ।
संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट अभिकरणों, जैसे विशअव स्वास्थ्य संगठन आदि से संबंध्ध ऐसी इकाइयाँ जिन्हें राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त न होते हुए भी इन अभिकरमो की सदस्यता प्रदान कर दी जाती है परन्तु इन्हें मताधिकार प्राप्त नही होता ।
संयुक्त राष्ट्र में अनेक बार यह चर्चा हुई है कि अति लघु राज्यों को पूर्ण सदस्यता के अधिकार न दिए जाकर उन्हें इस संगठन का केवल सहसदस्य माना जाए और उन्हें महासभा में मताधिकार से वंचित कर दिया जाए । परन्तु इस मत को कभी व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया ।
भारतीय संघ में प्रारंभ में सिक्किम का प्रवेश सह – राज्य के रूप में हुआ था परन्तु कुछ समय पश्चात वह भारतीय संघ का पूर्ण सदस्य राज्य बन गया ।

asylum

शरण
एक राज्य द्वारा किसी अन्य राज्य के राष्ट्रिक को अपने यहाँ प्रवेश एवं निवास की अनुमति दिया जाना । यह सुविधा साधारणतया उन राजनीतिक अपराधियों को दी जाती है जो किन्हीं कारणों से स्वदेश छोड़ने के लिए विवश हुए हों ।
शरण से आशय किसी राज्य के उस अधिकार से है जिसके अनुसार वह अपने यहाँ किसी अन्य देश के नागरिकों को आश्रय दे सकता है अथवा आश्रय देने से इन्कार कर सकता है । यह शरण सामान्यतः कोई भी राज्य अपने भूभाग अथवा अपने जहाजों पर दे सकता है । यद्यपि दूतावास में अपवादस्वरूप शरम दी जा सती है परन्तु प्रत्येक मामले में उसका औजित्य अथवा उसकी वैधता सिद्ध करना आवश्यक होता है ।

Atlantic charter

अटलांटिक घोषणा पत्र
अगस्त 1939 में अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेलट और ब्रिटश प्रधान मंत्री चर्चिल द्वरा अटलांटिक सागर में एक जलपोत पर हुई बैठक के पश्चात् जारी किया गाय घोषणा पत्र जिसमें युद्ध के उपरांत विशअव व्यवस्था के पुनर्निर्माण के आधारभूत सिद्धांतों का निरूपण किया गया था । इन सिदधांतों में प्रमुख ये थे आत्म निर्णय के सिद्धांत को युद्धोपरांत हुए परिवर्तित प्रदेशओं पर लागू किया जाएगा सभी लोगों को अपनी शासन प्रणाली चुनने का अधिकार होगा आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक व्यापार में और कच्चे माल की प्राप्ति में सभी को बराबर का अधिकार होगा और राष्ट्रों के मध्य आर्थिक सहयोग होगा सब राज्यों को सुरक्षा और शांति दी जाएगी समुद्रों की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाएगा बल प्रयोग का परित्याग किया जाएगा और सामान्य सुरक्षा के लिए एक स्थायी स्थापना की जाएगी । इस घोषणापत्र में भावी संयुक्त राष्ट्र संगठन की बाजारोपण देखा जा सकता है ।

Atlantic community

अटलांटिक समुदाय
उन राज्यों का समूह जिनके प्रतिनिधियों ने 4 अप्रैल, 1949 को वाशिंगटन में अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर किए । ये राज्य थे – बेल्जियम, कनाडा, डेन्मार्क, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, आहसलेंड, इटली, लक्समबर्ग, नीदरलैंड, नार्वे, पुर्तगाल तथा संयुक्त राज्य अमेरिका । इस संधि का लक्ष्य इन राज्यों को एक सामूहिक रक्षा – व्यवस्था में बांधना था ।

Atlantic treaty

अटलांटिक संधि
वह संधि जिस प र 4 अप्रैल, 1949 को बेल्जियम, कनाडा, डेन्मार्क, फ्रांस ग्रेट ब्रिटेन, आहसलेंड, इटली, लक्सम्बर्ग, नीदरलेंड, नार्वे, पुर्तगाल तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए । इस संधि का मुख्य उद्देश्य संबद्ध राज्यों को विदेशी आक्रमणों के विरूद्ध सामूहिक सुरक्षा प्रदान करना था । सभी पक्षों ने स्पष्ट रूप से यह उद्घोषित किया कि किसी भी अन्य राज्य द्वारा इनमें से किसी एक राज्य पर किए गए सशस्त्र आक्रमण को सभी राज्यों पर काय गया आक्रमण माना जाएगा । संधिबद्ध राज्य आक्रांत राज्य को सभी प्रकार की सैनिक तथा नैतिक सहायता प्रदान करेंगे ।

Atomic club (= Nuclear club)

परमाणु क्लब
विश्व के परमाणु शक्ति के उत्पादक विभिन्न राज्यों जैसे, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस ब्रिटेन, फ्रांस और चीन का एक अनौपचारिक गुट जिसे परमाणु समूह भी कहा जाता है । ये शक्तियाँ परमाणु शक्ति पर अपना एकाधिकार मानती थी इस अभिप्राय से इन्होंने एक बहुराष्ट्रीय संधि का भी संपादन किया जिसे परमाणविक प्रसारण निरोधक संधि कहते हैं, और जिस पर लगभग सौ राज्यों ने हस्ताक्षर किए हैं, परन्तु अनेक राज्य जैसे भारत, पाकिस्तान आदि ने इस संधि को स्वीकार नहीं किया है ।

atomic energy control

परमाणु ऊर्जा – नियंत्रण
परमाणु शक्ति के उत्पादक राष्ट्रों द्वारा प्रायोजित तथा अंतर्राष्ट्रीय समाज द्वारा सामान्य रूप से अनुमोदित ऐसे प्रतिबंध जिनसे परमाणु शक्ति के आविष्कार, उत्पादन, विकास और परमाणु अस्त्र – शस्त्रों के निर्माण पर नियंत्रण लगाने के प्रयत्न किए गए हैं । उनका उद्देश्य समस्त मानव जाति को परमाणु युद्ध के व्यापक विनाश अथवा विध्वंस से बचाना और परमाणु शक्ति का प्रयोग अधिकाधिक शांतिपूर्ण प्रयोजनों तथा कार्यों तक सीमित करना है ।

authoritative Interpretation

प्राधिकृत निर्वचन,
प्रामाणिक व्याख्या
संधि के हस्ताक्षरकर्ता पक्षकारों द्वारा पारस्परिक सहमति से की गी संधि के किसी विवादास्पद खंड की व्याख्या को प्रामाणिक व्याख्या कहते हैं ।

automatic renewal

स्वतः नवीकरण
किन्ही दो अथवा अधिक राज्यों द्वारा किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए किए गए समझौते या संधि में निर्धारित अवधि के पश्चात् उसे स्वतः पूर्ववत् बनाए रखने के लिए दो प्रकार के उपाय किए जा सकते हं () संधि की अवधि समाप्त ह ने पर संबद्ध राष्टों के प्रतिनिधि औपचारिक रूप से इसका नवीकरण कर सकते हैं या () संधि पर हस्ताक्षर करते समय ही संबंधित पक्षों द्वारा ऐसी धारा का समावेश कर दिया जाता है जिसके अंतर्गत निश्चित अवधि समाप्त होने पर यदि कोई क पक्ष इसके विपरीत इच्छा व्यक्त न करे, तो उस संधि का नवीकरण स्वतः हो जाता है ।

award

पंचाट, अधिनिर्णय
किसी पंच – न्यायालय या न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया निर्णय ।

Axis Powers

धुरी राष्ट्र
द्वितीय महायुद्धापूर्व जर्मनी, इटली और जापान के मध्य हुआ एक गठबंधन जिसका उद्देश्य इन राष्ट्रो की वैदेशिक और सैनिक नीतियों में समन्वय करना था । द्वितीय महायुद्ध में ये देश और इनके अन्य सहयोगी राज्य धुरी राष्ट्र कहलाए ।

Baghdad Pact

बगदाद समझौता
मध्य पूर्व के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा संगठनों की श्रृंखला में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रोत्साहन से निर्मित एक संगठन जिसका प्रादुर्भाव 24 फरवरी, 1955 को ईराक और तुर्की के मध्य एक परस्पर सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने से हुआ । अप्रैल, 1955 में ब्रिटेन, जुलाई में पाकिस्तान और नवंबर में ईरान इसके सदस्य बने । सुरक्षा के क्षेत्र में परस्पर सहयोग, एक दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप न करना तथा अपने पारस्परिक विवादों को शआंतिमय उपायों से तय करना, इसके प्रमुख सिद्धांत थे । अप्रैल 1955 में ब्रिटेन से किए गए एक विशेष समझौते में, जिसमें ब्रिटेन बगदाद समझौते का एक सदस्य बन गाय ब्रिटेन ने ईराक पर क्रमण होने की दशा में ईराक सरकार के अनुरोध पर उसे हर प्रकार की सहायता, जिसमें सैनिक सहायता शामिल थी, देने का वचन दिया ।
इस क्षेत्रीय व्यवस्था में संयुक्त राज्य अमेरिका ने पूरा सहयोग काय और इन दोशों की प्रादेशिक अखंडता की गारंटी करने की भी घोषणा की । जुलाई, 1956 में स्वेज संकट से बगदाद समझौता भी संकटग्रस्त हो गया । जुलाई, 1958 में नूरी अल सईद को अपदस्थ कर जनरल कासिम ईराक में सत्तारूढ़ हुआ और उसने सत्ता में आते ही बगदाद समझौते को नकार दिया । 24 मार्च, 1959 को ईराक औपचारिक रूप से बगदाद समझौते से अलग हो गाय । बगदाद समझौते का मुख्यालय अक्टूबर, 1958 में स्थानांतरित कर दिया गया था । 21 अगस्त, 1959 को यह घोषणा की गई कि अब बगदाद समझौते को मध्यवर्ती संधि संगठन () के नाम से जाना जाएगा ।

Bandung Conference

बांहुंग सम्मेलन
29 देशों का यह सम्मेलन इंडोनेशिया के नगर बांडुंग में 29 अप्रैल, 1955 को संपन्न हुआ था । इसका उद्देश्य विश्व राजनीति में एशियाई – अफ्रीकी देशों को एक सुदृढ़ इकाई के रूप में प्रदर्शित करना था और विशअव राजनीति में उनके भावी महत्व को दर्शआना था । परंतु सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर मतैक्य की अपेक्षा मतभेद अधिक देखने में आए ।
इसमें विश्व राजनीति की अनेक समस्याओं पर विचार – विमर्श किया गया, जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन, उपनिवेशवाद, संयुक्त राष्ट्र में साम्यवादी चीन का प्रतिनिधित्व चीन के संयुक्त राज्य अमेरिका तथा एशियाई देशों के साथ संबंध, प्रजातीय पृथक्करण और भेदभाव, निःशस्त्रीकरण, एशियाई – अफ्रीकी देशों में आर्थिक, सांस्कृतिक तथा तकनीकी मामलों में सहयोग की संभावनाएँ आदि
सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में चीन के महत्व और उसकी भूमिका को मान्यता प्राप्त हुई । सम्मेलन ने विश्व शआंति व सहयोग के दस सिद्धांतों का भी प्रतिपादन किया , जो इस प्रकार हैं :-
1. संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों तथा मूल मानवीय अधिकारों के प्रति सम्मान
2. सब राष्ट्रों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान
3. सभी प्रजातियों और राष्ट्रों की समानता के सिद्धांत को मान्यता
4. दूसरे देशओं के मामलों में हस्तक्षेप न करना
5. संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरूप प्रत्येक देश का स्वयं अथवा सामूहिक रूप से अपनी रक्षा करने का अधिकार
6. किसी महाशक्ति की विशिषअट हितपूर्ति में निर्मित सामूहिक सुरक्षा संगठनों से दूर रहना
7. परस्पर आक्रमण न करना
8. अंतर्राष्ट्रीय विवादों को शांतिमय उपायों से तय करना
9. पारस्परिक सहयोग एवं हितों की अभिवृद्धि तथा
10. न्याय एवं अंतर्राषअट्रीय दायित्वों का सम्मान ।

Bangkok Conference

बैंकाक सम्मेलन
22 जुलाई, 1956 को बैंकाक में एक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें एशियाई देशओं के बीच अंतर्देशीय नौपरिवहन को सुकर बनाने के लिए एक अभिसमय स्वीकृत किया गया ।

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