भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)(CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Antarctic Treaty

दक्षिण ध्रुव प्रदेशीय संधि, एन्टार्कटिका संधि
सन् 1959 में संपन्न संधि जिसके अनुसार दक्षिण ध्रुव प्रदेश पर राष्ट्रीय दावों के संबंध में मौन रहते हुए यह व्यवस्था की गी कि इस प्रदेश में वैज्ञानिक अन्वेषण करने का अधिकार सब राष्ट्रों को समान रूप से होगा, परन्तु ये अन्वेषण केवल शांतिमय उद्देश्यों के लिए होने चाहिए । यह पूरा प्रदेश शास्त्रों और नाभिकीय शास्त्रों से उन्मुक्त होगा और इसमें किसी भी प्रकार के नाभिकीय विस्फोट करने की अनुमति नहीं होगी । सभी राज्य अपने – अपने अन्वेषण कार्यक्रमों से प्राप्त सूचनाओं का परस्पर आदान – प्रदान करने के लिए सहमत ह गे और हस्ताक्षरकर्त्ता राज्यों में से किसी राज्य के पर्यवेक्षक पूरे प्रदेश का निरीक्षण कर सकेंगे । इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देश हैं – अर्जेन्टीना, आस्ट्रेलिया, बेल्जियम चिली, फ्रांस, जापान, न्यूजीलैंड, नार्वे, दक्षिणी अफ्रीका, सोवियत संघ, ब्रिटेन तथा सं. रा. अमेरिका ।

anti – apartheid movement

रंगभेद विरोधी आंदोलन
प्रजाति पार्थक्य विरोधी आंदोलन
दक्षिण अफ्रीका मे रंगभेद और अश्वेत प्रजातियों के पृथक्वासन का विरोध करने वाला आंदोलन ।
संयुक्त राष्ट्र संघ में सन् 1953 से किया जा रहा रंगभेद और पृथक्वासन – विरोधी अभियान । यह उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने दक्षिण अफ्रीकी शासन की नीतियों को मानव अधिकारों का हनन और अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताया है । सं.रा. संघ की महासभा द्वारा स्वीकृत एक अभिसमय में प्रजाति पार्थक्य को एक दंडनीय अपराध घोषित किया गया है और इसकी रोकथाम के लिए भी विस्तृत व्यवस्था की गई है ।

anti – colonialism

उपनिवेश विरोध
प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत विश्व में उपनिवेशवाद के विरूद्ध एक भावना ने जन्म लिया जिसने शनैः शनैः आंदोलन का रूप धारण कर लिया और जिसका लक्ष्य सभी लोगों के आत्म निर्णय के अधिकार की माँग करते हुए सभी उपनिवेशों को स्वतंत्र करने के लिए औपनिवेशिक शक्तियों पर दबाव डालना था । द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत सभी उपनिवेश धीरे – धीरे स्वतंत्र हो गए । साम्यवादी देश और गुट निरपेक्ष राज्य उपनिवेशवाद के कट्टर विरोधी रहे हैं ।

anti – hijacking law

विमान अपहरण विरोधी विधि
दूसरे महायुद्ध के पश्चात संसार के अनेक भागों में राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों का उद्भव हुआ और इनमें से अनेक ने विमानों में हिसात्मक एवं आतंकवादी क्रियाओं का भी सहारा लिया । इससे एक नई समस्या उत्पन्न हुई जिसे विमान अपहरण का नाम दिया जाता है । इस प्रक्रिया में विमान के निर्दोष यात्रियों और कर्मियों का जीवन संकटग्रस्त हो जाता है और विमान – यात्रा जो सादारण रूप से भी जोखिमपूर्ण है, भयावह बन जाती है ।
अतः इस ओर ध्यान आकृष्ट हुआ कि विमान के अपहरणकर्ताओं को दंड देने की समुचित व्यवस्था की जाए, चाहे वे अपहरणकर्ता राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित क्यों न हों । दूसरे, यह भी सुनिश्चित काय जाए कि क्षेत्राधिकार के अभाव में कोई इस प्रकार का अपराधी दंड से न बच सके । तीसरे, यह भी आवश्यक समझा गया कि विमान अपहरण को प्रत्यर्णता के लिए एक साधारण फौजदारी अपराध माना जाए न कि राजनीतिक अपराध ताकि विमान – अपरहणरकर्ता इस आधार पर दंड अथवा प्रत्यर्पण से बच न सके कि वह एक राजनीतिक अपराधी है और उसके द्वारा किया गया कृत्य राजिनीतिक अपराध है ।
इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जिस विधि का विकास हुआ उसे विमान अपहरण विरोधी विधि का नाम दिया जा सकता है । इस विधि के मुख्य रूप से तीन स्ततंभ हैं 1. टोकियो अभिसमय, 1963 2. हहेग अभिसमय, 1970 और 3. मांट्रियल अभिसमय, 1971
सन्म 1982 में भारतीय संसद ने एक कानून बनाकर विमान अपहरण विरोधी विषयक टोकियो और हेग अभिसमयों को अपनी राष्ट्रीय विधि में रूपांतरित कर लिया ।
इन अभिसमयों की विस् जानकारी के लिए संबंधित प्रविष्टियाँ देखिए ।

Arab League

अरब संघ, अरब लीग
सन् 1944 के शरतकाल में अलैक्जौंडिया में आयोजित अरब एकता उपक्रम सम्मेलन के निर्णयों के परिणामस्वरूप 10 मी, 1945 को मिस्र (संयुक्त अरब गणराज्य) ईराक, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, यमन और सीरिया द्वारा स्थापित स्वैच्छिक संघ । इसका मूल उद्देश्य अरब राष्ट्रों की एकता की भावना को दृढ़ बनाना, उपनिवेशवाद और शीतयुद्ध का विरोध, गुट निरपेक्षता का समर्थन एवं इज़रायल राज्य का विरोध करना रहा है । इस संघ में फिलिस्तनी अरबों के प्रतिनिधित्व की विशएष व्यवस्था की गई थी । अब इसकी सदस्य संख्या 22 हो गी है और पी. एल.ओ. (फिलिस्तीनी मुक्त संगठन ) इसका पूर्ण सदस्य बन गया है ।

arbitral tribunal

विवाचन न्यायाधिकरण
अंतर्राष्ट्रीय विवादों के पंचनिर्णय के लिए विवादग्रस्त पक्षों की पारस्परिक सहमति से संगठित निकाय अथवा आयोग जिसमें दोनों पक्षों के बराबर संख्या में सदस्य होते हैं और अध्यक्ष सबकी सहमति से चुना जाता है । ऐसा न्यायाधिकरण एक सदस्यीय भी हो सकता है । न्यायाधिकरण को विवाचन – समझौते की शर्तें के अनुसार निर्णय करने का अधिकार होता है और इसके निर्णय को पंचाट कहा जाता है जो दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है ।

arbitration

विवाचन, माध्यस्थम्
दो या अधिक पक्षों (संस्था, व्यक्ति या राज्य) के मध्य उत्पन्न विवादों के समाधान की वह पद्धति अथवा प्रक्रिया जिसमें विवादग्रस्त पक्ष पारस्परिक समझौते से एक या अधिक परस्पर स्वीकृत व्यक्ति या व्यक्तियों को संबधित विवाद का अंतिम रूप से निर्णय करने के लिए नियुक्त करते हैं । प्रायः इस निर्णय को पंचाट कहा जाता है । निर्णय दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है । विशिष्ट प्रकार के विवादों के समाधान के लिए विवाचन की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया जा सकता है । इस प्रक्रिया को पंचनिर्णय की प्रक्रिया भी कहा जाता है । न्यायाधिकरण में एक या एक से अधिक सदस्य हो सकत हैं । प्रायः इस प्रकार के पंचों की नियुक्ति तद्रथ रूप से की जाती रही है । 1899 के प्रथम हेग सम्मेलन द्वारा एक स्थायी विवाचन न्यायालय की भी व्यवस्था की गई थी परन्तु व्यवहार में यह व्यवस्था अधिक उपयोगी नहीं रही ।

arbitration agreement

विवाचन समझौता
दो या अधिक राज्यों के मध्य विवाह उत्पन्न होने पर विवाचन अथा पंच निर्णय की प्रक्रिया द्वारा उस विवाद को तय करने के लिए किया गया तदर्थ समझौता । इसमें पंचों के नाम, उनका क्षेत्राधिकार और पालन की जाने वाली प्रक्रिया व नियमावली का उल्लेख रहता है ।

archipelagic states

द्वीपसमूह वाले राज्य
ऐसे राज्य जो पूर्णतः एक या एकाधिक द्वीपसमूहों () से मिलकर बने हों । इस प्रकार के राज्यों के जलक्षेत्रों पर अधिकार के बारे में 1982 के समुद्र – विधि संबंधी सं. रा. अभिसमय के अनुच्छेद 47 तथा 49 में व्याख्या की गई है । इन अनुच्छेदों के अनुसार कुछ शर्तों के साथ द्वीपसमूह वाले राज्यों को अपने सबसे बाहर वाले द्वापों के सबसे बाहर वाले परिधि – बिन्दुओं को जोड़ने वाली आधार रेखाओं के भीतर आने वाले जल क्षेत्र, उसके ऊपरी आकाश क्षेत्र, जल क्षेत्र के तल तथा उसके अंदर के संसाधनों के दोहन का अधिकार है ।
दे. archipelago भी ।

archipelago

द्वीपसमूह
10 दिसंबर, 1982, के समुद्र विधि संबंधी संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के अनुच्छेद 46 के अनुसार ऐसे द्वीपों का समूह जो समुद्री जल कें हो और जो इस प्रकार एक दूसेर से घनिष्ठ रूप से जुड़े हो कि उनको उनके चारों तरफ के समुद्री जल सहित एक भौगोलिक, आर्थिक अथवा राजनैतिक इकाई माना जा सकता है अथवा ऐतिहासिक दृष्टि से उसे एक इकाई माना जाता रहा है ।

Arctic claims

आर्कटिक दावे
उत्तरी ध्रुव संबंधी दावे
आर्कटिक दावे का सिद्धांत भूप्रदेश के सातत्य और सामीप्य पर आधारित है । इसीलिए इसके आस – पास के दो राज्यों अर्थात् कनाडा और भूतपूर्व सोवियत संघ ने क्षेत्रक सिद्धांत के आधार पर उत्तीर ध्रुव प्रदेश पर अपनी प्रबूसत्ता के दावे किए थे । किन्तु उस भूप्रदेश की जलवायु और पर्यावरणीय स्थिति को देखते हुए इन दोवों पर बाद में कोई जोर नहीं दिया गया ।

armed action (=non war hostility)

सशस्त्र कार्रवाई
किसी राज्य की सशस्त्र सेनाओं द्वारा किसी दूसरे राज्य के विरूद्ध की गई आक्रामक या रक्षात्मक कार्रवाई जिससे युद्धावस्था उत्पन्न भी हो सकती है और नहीं भी हो सकती । इस प्रकार की सशस्त्र कार्रवाई को ‘गैर युद्धक शत्रुतापूर्ण कार्रवाई’ भी कहते हैं ।

armed conflict

सशस्त्र संघर्ष
दो या अधिक राज्यों के मध्य होने वाला ऐसा सशस्त्र सैनिक संघर्ष जिसे न तो वे राज्य और न ही अन्य राज्य “युद्ध” की मान्यता देते हैं । उदाहरणार्थ, 1962 भारत चीन संघर्ष या 1965 में भारत – पाक संघर्ष ।

armed hostilities

सशस्त्र युद्ध
औपचारिक युद्ध घोषणा करने के पश्चात् अथवा उसके बिना, दो या अधिक राज्यों की सशस्त्र सेनाओं के बीच होने वाली शत्रुतापूर्ण कार्रवाई । इस प्रकार की कार्रवाई युद्ध में होती है अथवा इसके होते हुए भी युद्धावस्था का होना आवश्यक नहीं है । कभी – क भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई युद्धविराम समझौते से समाप्त हो जाती है परन्तु वैधिक अर्थ में “युद्ध “बना रहता है ।

armed intervention

सशस्त्र हस्तक्षेप
एक राज्य द्वारा दूसरे राज्य के आंतरिक या बाह्य मामलों में इच्छित परिवर्तन लाने या यथास्थिति बनाए रखने के लिए की गी सैनिक कार्रवाई ।

armed merchantman

सशस्त्र व्यापारी जहाज, सशस्त्र वाणिज्य – पोत
किसी तटस्थ राज्य का ऐसा व्यापारी जहाज जो युद्धकाल में आत्मरक्षार्थ अस्त्र – शस्त्रों से लैस कर दिया जाता है । किन्तु वह इन अस्त्र – शस्त्रों का प्रोयग केवल आत्मरक्षा में ही कर सकता है ।

armed neutrality

सशस्त्र तटस्थता
युद्ध काल में किसी तटस्थ राज्य द्वारा युद्धरत राज्यों से अपनी तटस्थता की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर, सैनिक बल का प्रयोग करने के लिए तैयार रहना ।

armistice

1. युद्ध स्थगन
2. युद्ध स्थगन समझौता
1. युद्ध स्थगन शांति – संधि – वार्ता चलाने के लिए अल्पकालिक युद्ध स्थगन । यह युद्ध – स्थागन स्थानीय या व्यापक होता है । यदि यह स्थगन युद्ध क्षेत्र – विशेष तक सीमित होता ह तो स्थानीय कहा जाता है और यदि यह समस्त रणक्षेत्र पर लागू होता है तो व्यापक कहलाता है ।
2. युद्ध स्थागन समझौता युद्धकारी पक्षों की सैनिक और सामरिक गतिविधियों को रोकने के लिए काय गया अस्थायी समझौता । यह समझौता करने का अधिकार दोनों पक्षों के प्रधान सेनापतियों या राजनयिक प्रतिनिधियों को होता है और यह तब तक अपूर्ण माना जाता है जब तक इस की पुष्टि संबद्ध राज्य की उच्च और समर्थ सत्ता द्वारा नहीं हो जाती । युद्ध स्थगन समझौते से सशस्त्र संघर्ष की स्थिति तो तात्कालिक रूप से समाप्त हो जाती है किंतु ‘युद्ध – अवस्था’ समाप्त नहीं होती है ।

armistice day

युद्ध स्थगन दिवस
1. अल्पकालिक या अस्थायी रूप से सशस्त्र संघर्ष के स्थगित होने का दिवस ।
2. प्रथम विशअव युद्ध में युद्ध विराम संधि के हस्ताक्षरित होने का ऐतिहासिक दिन अर्थात 11 नवंबर, 1918 । युद्धोत्तर काल में हर वर्ष 11 नवंबर के ऐतिहासिक दिन ठीक ग्यारह बजे (वह समय जब उस संधि पर हस्ताक्षर हुए थे ) दो मिनिट का मौन रखकर स्मृति दिवस मनाया जाने लगा । अब भी हर वर्ष यह पर्व 11 नवंबर के निकटवर्ती रविवारि के दिन मनाया जाता है और गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जाती हैं ।

armistice demarcation line

युद्ध स्थगन सीमांकन रेखा
युद्धरत राज्यों या उनके सेनापतियों द्वारा युद्धात्मक गतिविधियाँ स्थगित करने और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से किए गए अंतरिम समझौते के अंतर्गत निश्चित और निर्धारित विभाजन रेखा, जिस प र दोनों सेनएँ यथावत बनी रहती है ।

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