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Hindi Paribhashik Laghu Kosh (CHD)

Central Hindi Directorate (CHD)

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संकट

(पुं.) (तत्.)

1. ऐसा समय या स्थिति जब मनुष्य अत्यंत कष्‍ट अनुभव करता है। पर्या. आफत, विपत्‍ति। 2. अचानक आई हुई विपत्‍ति या उत्‍तेजनापूर्ण स्थिति crisis उदा मुहा. संकट के समय मंडराना = विपत्‍तियों से घिर जाने की स्थिति।

संकटकाल [संकट+काल]

(पुं.) (तत्.)

वह समय जिसमें संकट बना रहे। दे. संकट।

संकटापन्न [संकट-आपन्न]

(वि.) (तत्.)

1. संकट या कष्‍ट में पड़ा हुआ (व्यक्‍ति)। 2. संकटपूर्ण (परिस्थिति या कार्य) जैसे: संकटापन्न स्थिति में धैर्य रखना चाहिए। 3. संकटग्रस्त (व्यक्‍ति) जैसे: संकटापन्न व्यक्‍ति की सहायता धर्म ही है।

संकर

(वि.) (तत्.)

दो अलग-अलग जातियों या नस्लों आदि के मिश्रण से उत्पन्न। जैसे: संकर गाय-भिन्न नस्ल की गाय और बैल से उत्पन्न गाय। संकर शब्द-भिन्न भाषाओं के शब्दों से बना शब्द। संकर गेहूँ-भिन्न प्रजातियों के कृत्रिम मिश्रण से उत्पन्न गेहूँ। संकर राग-दो रागों को मिलाकर बनाया राग। वर्णसंकर। दे. साँकल। पुं. देश. प्रांतीय बोलियों में शंकर या साँकल (जंजीर) का तद् भव रूप।

संकलन

(पुं.) (तत्.)

1. संग्रह, एकत्रीकरण। 2. अच्छी-अच्छी बातों या विचारों का विभिन्न ग्रंथों से चयन। 3. चुनी हुए सूक्‍तियों या अच्छी बातों को इकट् ठा करके बनाया हुआ ग्रंथ या पुस्तक। compilation 4. (गणि.) जोड़ने की क्रिया। addition

संकलित

(वि.) (तत्.)

1. विशेष दृष्‍टिकोण से चुना हुआ, जिसका संकलन किया गया हो। उदा. हमारी पाठ्य-पुस्तक में एक पाठ रामायण से संकलित है। 2. लिया हुआ, संगृहीत, एकत्रित। उदा. इस पत्रिका में विविध स्त्रोतों से संकलित कहानियाँ हैं। compiled

संकल्प

1. कोई कार्य करने का दृढ़ विचार। 2. कोई धार्मिक कार्य करते समय प्रारंभ में पढ़े जाने वाले मंत्र जिनका अर्थ ‘कार्य पूर्ण करने की दृढ़ता’ होता है। 3. मन में आते-जाते रहने वाले कई प्रकार के विचारों में से वह विचार जिसे मन पकड़ लेता है।

संकल्पना [सं+कल्पना]

(स्त्री.) (तत्.)

व्य.अर्थ सम्यक्=अच्छी तरह या पूरी तरह+कल्पना। सा.अ. 1. किसी बात की समग्र रूप से कल्पना या उसके कारणों और परिणामों की समझ, अवधारणा। 2. किसी बात को नए ढंग से करने या प्रस्तुत करने का विचार या रूपरेखा। 3. किसी कार्य का स्थूल विवरण। 4. किसी विषय में वह मूलभूत धारणा जिसके आधार पर व्यक्‍ति कार्य की योजना बनाता है। concept

संकल्पबद्ध [संकल्प+बद्ध]

(वि.) (तत्.)

1. वह, जिसने अपनी दृढ़ इच्छा शक्‍ति से कोई संकल्प कर रखा हो और जिसके कारण वह कुछ सीमाओं या नियमों में बँध गया हो। 2. दृढ़ निश्‍चयी।

संकीर्ण

(वि.) (तत्.)

1. कम चौड़ा, सँकरा। 2. छोटा, 3. तुच्छ सोच वाला, 4. अनुदार। विलो. विशाल (1,2) उदार (3,4)

संकीर्णता [संकीर्ण+ता]

(स्त्री.) (तत्.)

संकीर्ण होने का भाव, सँकरापन। दे. संकीर्ण। विलो. विशालता, उदारता। narrowness narrowmindedness

संकुचित

(वि.) (तत्.)

1. सिकुड़ा, सिमटा, विलो. प्रसृत। 2. जन-लज्जा से युक्‍त, हिचक से युक्‍त, संकोच युक्‍त, शर्माया हुआ। विलो. विस्तृत। 4. दूसरों के विचारों को स्वीकार न करने वाला, अनुदार। विलो. उदार।

संकुल

(पुं.) (तत्.)

अनेक व्यक्‍तियों या वस्तुओं का एकत्रित स्वरूप। पर्या. भीड़, झुंड, मजमा; समूह। cluster वि. घना, भरा हुआ, सँकरा; जटिल।

संकेंद्रित [सं+केंद्र+इत]

(वि.) (तत्.)

व्यु.अर्थ एक केंद्र विशेष पर एकत्र किया गया, संचित। 1. किसी विशेष स्थान, विषय या विचार इत्यादि को केंद्र मानकर उसी के चारों ओर किया गया (कार्य, चिंतन इत्यादि) centralized 2. घनीभूत; केंद्रित; घनीकृत, केंद्रीकृत। concentrated

संकेत

(पुं.) (तत्.)

1. मन की भावनाओं को या इच्छा को प्रकट करने के लिए आँख, हाथ आदि से प्रकट की गई चेष्‍टा, इशारा। 2. कोई ऐसी बात या क्रिया जो किसी कार्य या घटना की सूचक मानी जाए। जैसे: 1. ठंडी हवा का अचानक चलना वर्षा होने का संकेत है। 2. इस पर्वतीय मार्ग पर मुड़ने व पुल के संकेत पहले से ही दे दिए गए हैं। 3. चिह्न, निशान, पहचान।

संकेतक

(वि./पुं.) (तत्.)

1. संकेत करने वाला, संकेत-बिंदु, संकेत-स्थल। 2. मार्ग बतलाने वाला। indicator पुं. तत्. संकेत। indication

संकोच

(पुं.) (तत्.)

1. सिकुड़ने की क्रिया या भाव। 2. नम्रता या हीनभावना के कारण होने वाला झिझक, हिचक। उदा. उसे बड़ों के समक्ष कुछ बोलने में संकोच होता है। 3. न कहने या न करने योग्य काम होने वाली स्‍थिति के कारण लज्जा।

संकोची

(वि.) (तत्.)

संकोच करने वाला, शरमाने वाला। जैसे: वह बहुत ही संकोची स्वभाव का लडक़ा है।

संक्रमण

(पुं.) (तत्.)

1. किसी निश्‍चित दिशा में चलना या बढ़ना। 2. एक अवस्था से दूसरी अवस्था में पहुँचने। transition 3. (आयु.) रोगकारी जीवों का एक स्थान या शरीर से दूसरे स्थान या शरीर में स्थापित होना और रोग के लक्षण उत्पन्न करना। infection 4. (समान.) विचारों, गुणों इत्यादि का सामाजिक क्रांति के माध्यम से एक व्यक्‍ति या क्षेत्र से अन्य व्यक्‍तियों, क्षेत्रों आदि में फैलना। 5. (खगोल) संक्रांति। दे. संक्रांति।
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