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Hindi Paribhashik Laghu Kosh (CHD)

Central Hindi Directorate (CHD)

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लंगर

(पुं.) (तद्<लांगल)

<लांगल) 1. लोहे का वह बहुत बड़ा वजनदार काँटा जिसे नाव आदि से बाँधकर नदी या समुद्र तट पर गिरा देने से नाव या समुद्री जहाज, स्टीमर आदि एक ही स्थान पर ठहरे रहते हैं। पुं. फा. 2. किसी स्थान या धामिक स्थान से वितरित किया जाने वाला वह भोजन जो बिना किसी भेदभाव के सभी भक्तों एवं आगंतुकों को प्रदेय हो। 3. बिना किसी शुल्क के पंगत में बैठाकर खिलाने की क्रिया। जैसे: इस गुरूद्वारे में तो प्रतिदिन सभी के लिए लंगर चलता रहता है। 4. उक्‍त कार्य के लिए प्रयुक्‍त भोजनालय।

लंगूर

(पुं.) (तद्.<लाड.मूमिलन)

बंदर प्रजाति का एक बड़ा प्राणी जिसका मुख काले रंग का तथा पूँछ लंबी होती है। पर्या. कपि, वानर।

लंगोट

(पुं.) (तद्<लिंगपट)

कमर पर बाँधा जाने वाला पुरुषों का वह पहनावा या वस्त्र जिससे गुप्‍तांग ढके रहते हैं। इसे प्राय: ब्रह्मचारी, साधु संयासी, पहलवान आदि पहनते हैं।

लंगोटी

(स्त्री.) (तद्)

छोटा लंगोट। मुहा. लंगोटिया यार-बचपन का घनिष्‍ठ साथी।

लंघवत

(अव्य.) (तत्.)

लंब जैसा। दे. ‘लंब’।

लंपट

(वि.) (तत्.)

शा.अ. स्वच्छंद आचरण करने वाला। सा.अ.-स्वेच्छाचारी, व्याभिचारी, कामुक, बदचलन। प्रयो. लंपट व्यक्‍ति समाज को प्रदूषित करते हैं।

लंब

(पुं.) (तत्.)

किसी सरल रेखा के किसी बिंदु से 90o पर खींची गई रेखा। वि. तत् लंबा।

लंबा

(वि.) (तद्<लंब)

1. लंबाई से युक्‍त। 2. एक ही दिशा में दूर तक फैला हुआ। 3. जब दो अलग-अलग दिशाओ में (जैसे-पूरब-पश्‍चिम और उत्‍तर-दक्षिण में) कोई वस्तु या स्थान फैला हो तो कम लंबाई वाले माप की तुलना में अधिक लंबाई वाला, अधिक लंबा।

लंबाई

(स्त्री.) (तद्<लंब)

दो बिंदुओं के बीच की रेखीय दूरी। (किसी भी दिशा में) तुल. ऊँचाई=दो बिंदुओं के बीच की ऊर्ध्वाकार दूरी। विशेष-लंबाई में सा तत् य होता है पर ऊँचाई में सातत्य आवश्यक नहीं है। चौड़ाई-चौकोर वस्तु का कम लंबाई वाला भाग। टि. वस्त्र में ताना लंबाई में और बाना चौड़ाई में होता है।

लँगड़ा

(वि.) (फा.<लंग)

1. जिसका (मनुष्य, पशु, पक्षी आदि) पैर टूटा हुआ हो या जो ठीक से चल न पाता हो। 2. पोलियो आदि रोग या किसी दोष के कारण लचक के साथ चलने वाला (कोई व्यक्‍ति आदि) पैरों से अपाहिज। पुं. देश. उत्‍तम प्रकार के आम की एक किस्म।

लकड़दादा

(पुं.) (देश.)

1. दादा के दादा। पिता के पिता-दादा/पितामह। दादा के पिता-परदादा/ पड़दादा। परदादा के पिता-लकड़दादा/ प्रपितामह। 2. कोई पूवर्ज जो प्राय: 100 वर्ष की अवधि से पूर्व के हों।

लकड़बग्घा

(पुं.) (देश.)

भेड़िए की जाति का एक खूँखार जंगली जानवर जो सामान्य भेडि़ए से बड़ा हेाता है तथा जिसके जबड़े बहुत मज़बूत होते हैं। जैसे: लकड़बग्घा गांव से एक सोते हुए बच्चे को उठाकर ले गया। टि. इसके आगे के पैर सामान्य भेडि़ए से बड़े होते हैं। Hyena

लकड़हारा

(पुं.) (देश.)

लकड़ियाँ काटकर जीवन-निर्वाह करने वाला व्यक्‍ति।

लकड़ी

(स्त्री.) (देश.)

1. किसी वृक्ष के तने या शाखाओं का ठोस और कठोर भाग जो जलाने या फर्नीचर, खिलौने, उपकरण इत्यादि बनाने के काम आता है। 2. लाठी, छड़ी। 3. ईंधन 4. लंगड़े या अपंग व्यक्‍ति के चलने का सहारा, बैसाखी। मुहा. अंधे की लकड़ी-असर्थ का सहारा। लकड़ी हो जाना-दुर्बल जाना।

लकवा

(पुं.) (अर.)

एक स्नायुजन्य रोग जिसमें शरीर या उसका कोई अंग संवेदनाहीन हो जाता है। पर्या. पक्षाघात। paralysis मुहा. लकवा मारना-अचानक निष्क्रिय हो जाना।

लकीर

(स्त्री.) (तद्<लेखा)

सा.अर्थ 1. रेखा। 2. रेखा जैसा चिह्न। उदा. सांप निकल जाने पर लकीर पीटना। ला.अर्थ प्रथा, रीति, पंरपरा। मुहा. लकीर कर फकीर-पंरपरावादी, बिना सोचे-समझे रूढि़ पर चलने वाला।

लक्ष

(वि.) (तत्.)

एक लाख की संख्या (1,00,000), सौ हजार।

लक्षण

(पुं.) (तत्.)

1. निशान, 2. कोई ऐसी विशेषता जो किसी की स्पष्‍ट पहचान बताए। 3. आचार, विचार, चरित्र आदि के विशेष गुण। जैसे: इसके लक्षण तो महापुरुषों जैसे हैं। 4. शारीरिक रोगों के सूचक चिह्न। 5. परिभाषा।

लक्षणा

(स्त्री.) (तत्.)

साहि. शब्द का अर्थ सामान्य रूप से न निकल पाने की स्थिति में, लक्षणों आदि के आधार पर अर्थ का बोध कराने वाली (शब्द की) शक्‍ति। जैसे: मेरा घर मुख्य मार्ग पर है। (यहाँ मार्ग पर घर की संभावना नहीं हो सकती अत: उससे जुड़ा अर्थ प्रकट होता है कि घर मुख्य मार्ग के किनारे है।) टि. लक्षणा द्वारा प्रकट अर्थ लक्ष्यार्थ कहलाता है।
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