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Hindi Paribhashik Laghu Kosh (CHD)

Central Hindi Directorate (CHD)

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ओखली

(स्त्री.) (तद्.)

दे. ऊखल मुहा. ओखली में सिर देना = जानबूझकर मुसीबत में फँसना।

ओछा

(वि.) (तद्.<अपतुच्छ)

जो गंभीर न हो, छिछला। पर्या. तुच्छ, नीच जैसे: ओछा व्यक्‍ति, ओछी बात विलो. गंभीर

ओछापन

(पुं.) (तद्.)

छिछला होने यानी गंभीर न होने अथवा नीच प्रकृति का सूचक भाव।

ओज

(पुं.) (तद्. ओजस्)

1. ऊर्जा 2. प्राणवत्‍ता 3. सामर्थ्य, शक्‍ति।

ओजस्‍वी

(वि.) (तत्.)

1. ओज भरा, जोश पैदा करने वाला जैसे: ओजस्वी भाषण। 2. बल-वीर्य शाली जैसे: ओजस्वी व्यक्‍तित्व।

ओज़ोन

(स्त्री.)

(अं.) ऑक्सीजन का एक अन्य रूप (प्रतीक O3) जो अति अभिक्रियाशील और रंगहीन गैस है। वायुमंडल में इसकी पतली परत है जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों के कुप्रभाव से पृथ्वी की रक्षा करती है।

ओझल

(वि.) (देश.)

देख सकने की सीमा से दूर; किसी आड़ के हुआ; जो दिखाई न पड़े।

ओझल होना अ.क्रि.

(देश.)

नजर से दूर होना; छिप जाना, ओट में हो जाना जैसे: आँख से ओझल हो गया।

ओझा

(पुं.) (तद्.< उपाध्याय)

1. ब्राह्मणों की एक उपाधि 2. भूत-प्रेत की बाधा दूर करने वाला, झाड़-फूँक करने वाला।

ओट

(स्त्री.) (तद्.< अवटि)

ऐसी रुकावट जिसके कारण वस्तु या व्यक्‍ति स्पष्‍ट रूप से दिखलाई न पड़ सके। पर्या. आड़, व्यवधान। उदा. सूर्य बादलों की ओट में आ गया।

ओंठ

(पुं.) (तद्.>ओष्‍ठ)

मुख के बाहर का ऊपर-नीचे उभरा मांसल भाग जिससे मुँह का अंदर का भाग ढँका रहता है। पर्या. होंठ। टि. ऊपर के भाग को ‘ओष्‍ठ’ और नीचे के भाग को ‘अधर’ कहते हैं।

ओढ़ना क्रि.

(तद्.)

किसी वस्तु को अपने ऊपर पसारना या फैलाना। उदा. रात में सोते समय चादर ओढ़ लेना, नहीं तो मच्छर काटेंगे। 2. दूसरे की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना।

ओढ़नी/ओढ़निया

(स्त्री.) (तद्.)

1. सिर पर ओढ़ने का स्त्रियों का एक मर्यादित वस्त्र। 2. शरीर छिपाने हेतु स्त्रियों द्वारा प्रयुक्‍त दुपट्टा या चादर।

ओत-प्रोत [ओत = बुना हुआ (ताना) + प्रोत = कसा हुआ/ अच्छी तरह बुना हुआ]

(वि.) (तत्.)

शा.अर्थ ताने-बाने की तरह (अच्छी तरह) बुना हुआ। सा.अर्थ इस तरह मिला हुआ कि उसके अंशों को सामान्यत: अलग करना कठिन हो। जैसे: प्रेम से ओत-प्रोत।

ओर

(स्त्री.) (तद्. >अबर)

दिशा की सूचना देने हेतु प्रयुक्‍त शब्द जैसे: इस ओर, दाहिनी ओर, नीचे की ओर, गाँव की ओर इत्यादि। पर्या. तरफ़, दिशा में।

ओला

(पुं.) (तद्.> उपल)

आकाशीय वायुमंडल में अत्यधिक ठंडक के कारण जमकर बर्फ के टुकड़ों के रूप में बरसने वाला जलकण। मुहा. सर मुँडाते ही ओले पड़ना = कार्यारंभ में ही विघ्न उपस्थित होना। टि. सामान्‍यत: बहुवचन में ही प्रयोग होता है।

ओलावर्षण

(पुं.) (तद्.+ तत्.)

ओलों की बरसात पर्या. उपलवर्षा दे. ओला।

ओषजन

(पुं.)

ऑक्सीजन नाम की एक गैस।

ओस

(स्त्री.) (देश.)

वातावरण में फैली भाप जो सघन होकर रात में बारीक-बारीक जल कणों के रूप में ठंडे स्थान पर गिरती है। पर्या. शबनम dew
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