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Hindi Paribhashik Laghu Kosh (CHD)

Central Hindi Directorate (CHD)

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ऊँघ

(स्त्री.) (दे.)

नींद आने की पहली अवस्था जब व्यक्‍ति हलकी और अल्पकालिक नींद की खुमारी में आता है और उसका सिर झटके खाने लगता है। पर्या. अर्धनिद्रा, झपकी। उदा. ऊँघ क्यों रहे हो? क्या नींद आ रही है?

ऊँघना अक्रि.

(देश.)

1. निद्रा की आरंभिक स्थिति में होना। 2. थकावट या मन न लगने के कारण बैठे-बैठे ही झपकी लेना।

ऊँच-नीच

(स्त्री.) (तद्.)

1. वर्णव्यवस्था संबंधी श्रेणी विभाजन। उदा. आजकल के लोग ऊँच-नीच पर ज्यादा विचार नहीं करते। 2. परिणाम उदा. कोई कदम उठाने से पहले उसके ऊँच-नीच पर विचार कर लेना ठीक रहेगा।

ऊँचा

(वि.) (तद्.<उच्च)

1. ऊपर उठा हुआ, उन्नत। 2. श्रेष्‍ठता में बढ़ा हुआ, महान्, बड़ा। 3. जिसका स्तर अत्यंत उन्नत हो ऐसा (स्वर), तीव्र तुल. लंबा टि. ‘लंबा’ में लगातार विस्तार देखा जाता है जबकि ‘ऊँचा’ में उच्चतम बिंदु पर ध्यान दिया जाता है। उदा. छत ऊँची है। मुहा. ऊँची नाक होना = इज्ज़त होना। ऊँचा सुनना = ज़ोर से बोली गई बात ही सुन पाना (यानी धीरे बोली गई बात को सुनने में कठिनाई होना।)

ऊँचा-नीचा

(वि) (तद्.)

1. जो समतल न हो। पर्या. ऊबड़-खाबड़ 2. हानि-लाभ, भला-बुरा।

ऊँचाई

(स्त्री.) (तद्.)

ऊँचा होने का भाव।

ऊँचे

(क्रि.वि.) (तद्.< उच्चै:)

1. ऊँचाई पर, ऊँचाई की ओर उदा. फल ऊँचे (ऊँचाई पर) लगे हैं। वहाँ तक तुम्हारा हाथ नहीं पहुँचेगा। 2. ज़ोर से (शब्द करना) उदा. ज़रा ऊँचे बोलो।

ऊँट

(पुं.) (तद्.< उष्‍ट्र)

ऊँचे कद का गद् दीदार पंजों और लंबी टाँगों वाला, जुगाई करने वाला, स्तनपोषी और कूबड़ वाला रेगिस्तानी चौपाया जो सवारी व बोझा ढोने के काम आता है और बिना पानी पिए अधिक दिनों तक सरलता से चल सकता है। camel मुहा. बेनकेल का ऊँट = ऐसा व्यक्‍ति जिस पर कोई बंधन न हो।

ऊट-पटाँग

(वि.) (देश.)

(काल्पनिक व्युत्पत्‍ति < ऊँट पर टाँग) 1. अटपटा, टेढ़ा-मेढ़ा, बेढंगा, विचित्र, 2. निरर्थक, व्यर्थ, वाहियात, 3. अंटसंट। उदा. कैसी ऊट-पटाँग बातें करते हो!

ऊतक

(पुं.) (तत्.)

समान कार्य करने के लिए समान कोशिकाओं का समूह। प्राणी शरीर में संयोजी ऊतक, तंत्रिका ऊतक, पेशी ऊतक आदि कई प्रकार के ऊतक होते हैं जिनके अलग-अलग कार्य होते हैं। (टिशु tissue)

ऊदबिलाव

(पुं.) (तद्.< उद्बिडाल)

शा.अर्थ पानी की (में रहने वाला) नेवले की आकृति का मीन भक्षी, स्तनपोषी, सघन जलसह लोमकेशी, जालपाद् प्राणी जो जल में भी रह सकता है। oter

ऊधम

(पुं.) (तद्.> उद्धम)

शोरगुल, लड़ाई-झगड़ा, वस्तुओं की उठापटक-इन सबका सम्मिलित रूप। पर्या. उपद्रव, उत्पात।

ऊधमी

(वि.) (< तद्)

ऊधम करने वाला। दे. ऊधम।

ऊन

(पुं.) (तद्.< ऊर्ण)

1. भेड़, बकरी आदि के बालों को काटकर बनाया गया लंबा धागा, जिससे वस्त्र, कंबल आदि बनाते हैं। 2. वि. तत्. कम या एक कम जैसे: उनतीस, नि + ऊन = न्यून।

ऊनी

(वि.) (तद्.)

ऊन का (बना हुआ)। दे. ऊन, तु. रेशमी, सूती आदि।

ऊपर क्रि.

(वि.) (तद्.< उपरि)

1. ऊँचाई पर, ऊँचे स्थान पर। उदा. शर्माजी ऊपर रहते हैं। 2. आधार पर उदा. पुस्तक संदूक के ऊपर है। 3. ऊँची श्रेणी का उदा. उनका पद मेरे ऊपर है। 4. (लेख आदि में) पहले उदा. ऊपर कहा गया है कि…। 5. अतिरिक्‍त उदा. ऊपर की आमदनी….।

ऊपरवाला

(वि./पु.) (तद्.)

ऊपर (आसमान, स्वर्ग में) निवास करने वाला यानी ईश्‍वर।

ऊपरी

(वि.) (तद्.)

1.जो ऊपर स्थित हो, 2. बाहरी, बाहर का, 3. दिखावटी।

ऊब

(स्त्री.) (तद्.)

किसी एक ही क्रिया को बार-बार करते रहने पर मन में उसके प्रति पैदा हुई अरुचि; किसी चीज से जी भर जाने की स्थिति। उदा. 1. शादी में कई दिनों से मिठाई खाता रहा हूँ। अब मेरा मन मिठाई से ऊब गया है। 2. चुप हो जाओ। सुबह से ही तुम्हारी बातों की रट सुनते-सुनते में ऊब गया हूँ।

ऊबड़-खाबड़

(वि.) (तद्.)

अप. उब्भड़-खब्बड़ < उर्बट-खर्बट) ऊँचा-नीचा (स्थल) वह भूमि जो समतल न हो और जहाँ चलना कष्‍टप्रद हो।
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