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Hindi Paribhashik Laghu Kosh (CHD)

Central Hindi Directorate (CHD)

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(पुं.)

देवनागरी वर्णमाला का दूसरा (स्वर) वर्ण और ‘अ’ का दीर्घ रूप।

आंकलन

(पुं.) (तत्.)

1. शा. अर्थ-ठीक मूल्य से गिनना। calculation 2. मूल्य, संख्या अथवा मात्रा के बारे में लगाया गया मोटा अनुमान। estimation

आंचलिक

(वि) (तत्.)

किसी अंचल (क्षेत्र विशेष) की भाषा, संस्कृति आदि से संबंधित या समन्वित। उदा. फणीश्‍वरनाथ रेणु के उपन्यास आंचलिक उपन्यास की श्रेणी में आते हैं।

आंतर कर्ण

(पुं.) (तत्.)

कान के तीन भागों, बाहरी, मध्य एवं भीतरी में से अंतिम यानी भीतर वाला भाग जो तीन अर्धवृत्‍ताकार नलिका और कर्णावर्त Cochlea का बना होता है। तु. बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण।

आंतरिक

(वि.) (तत्.)

1. भीतरी, अंदरूनी, 2. भीतरी भाग से संबंधित। जैसे: आंतरिक व्यवस्था, आंतरिक भू-भाग, 3. मन में विकसित होने वाला। जैसे: आंतरिक प्रेम।

आंतरिक निषेचन

(पुं.) (दे.)

जीव. मादा के शरीर के अंदर होने वाला निषेचन internal fertilization तु. बाह्य निषेचन निषेचन।

आंत्रज्वर

(पुं.) (तत्.)

शा.अर्थ आँतों का बुखार दे. ‘टाइफाइड’।

आंदोलन

(पुं.) (तत्.)

शा.अर्थ झूलना; हिलना-डुलना; कंपन, कँपकँपा। 1. राज. किसी उद्देश्य विशेष को ध्यान में रखते हुए किसी व्यक्‍ति विशेष द्वारा या उसके नेतृत्व में जनसमूह द्वारा अपनी माँगे मनवाने के लिए किया गया प्रदर्शन भले ही उसमें सफलता मिले या नहीं movement 2. संगी. तंतुवाद्यों को उँगली से बजाने पर उत्पन्न नादमय कंपन।

आंशिक (अंश+इक)

(वि.) (तत्.)

अंश-संबंधी, किसी एक भाग से संबंधित partial

आँक

(पुं.) (तद्.)

संख्या

आँकड़ा

([आँक < अंक < ड़ा]) (तद्.)

1. संख्या सूचक चिह् न, अंक, 2. धातु निर्मित किसी वस्तु के सिरे पर बना टेढ़ा या तिरछा काँटेनुमा हिस्सा।

आँकड़े

(पुं.)

बहु. 1. संख्याओं का समुच्चय, 2. गणित में-अक्षरों, संख्याओं, आकृतियों का समूह जिसे विश्‍लेषण के लिए प्रस्तुत किया गया हो अथवा 3. कम्प्यूटर में विश्‍लेषण के फलस्वरूप प्राप्‍त सूचना जो अंकों के रूप में होती है। data

आँकना स.कि

([तद्. < अंकन])

1. संख्या सूचक चिह् न लगाना, 2. किसी वस्तु के मूल्य का अंकन करना या अनुमान लगाना। पर्या. कूतना। आज कल

आँख

(तद्.<अक्षि) (स्त्री.)

1. मनुष्यों और पशुओं की वह इंद्रिय जिसके द्वारा उन्हें किसी वस्तु या व्यक्‍ति के बाह् य हाव-भाव तथा आकार-प्रकार का ज्ञान होता है। पर्या. नेत्र, नयन, लोचन 2. गन्ने (ईख) के दो पोरों के संधि स्थल पर (आँख जैसा) उभार जिससे अँखुआ फूटता है। मुहा. 1. आँख में खून उतर आना = अत्यंत क्रोधित होना। 2. आँख में गड़ना, खटकना, अच्छा न लगना। 3. आँख ऊपर न उठाना = अपने-आप को लज्जित महसूस करना। 4. आँख में चुभना = पसंद न करना। 5. आँखों में धूल झोंकना = अपना हित साधने के लिए दूसरे को धोखा देना। 6. आँख में पानी भरना = किसी भी बुरे काम के लिए लज्जित न होना। 7. आँखें फेर लेना = पहले की तरह लगाव महसूस न करना। 8. आँख लगना = झपकी लेना या थोडे़ समय के लिए नींदआ जाना। 9. आँखे लड़ाना = स्त्री-पुरुष का परस्पर प्रेमपूर्वक देखना। 10. आँख उठाकर न देखना = बिलकुल ध्यान न देना। 11. आँख से ओझल होना = दिखाई न पड़ना, गायब हो जाना। 12. आँख से अंधा नाम नयन सुख = नाम और गुण में मेल न होना। 13. आँख का काँटा = स्वभाव न मिल पाने के कारण अच्छा न लगना। 14. आँख का तारा = अत्यंत प्रिय व्यक्‍ति। 15. आँख की किरकिरी = पीड़ाकारी व्यक्‍ति या वस्तु। 16. आँख खुलना = 1. नींद से जागना, 2. भ्रम दूर होना। 17. आँखें न मिलाना = किसी हीन भावना की वजह से सामने वाले से आँखे चुराना यानी उससे नजरें मिलने से बचना। 18. आँख मारना = आँख से इशारा करना (ताकि जिसे इशारा किया गया है वह तो संकेत समझ ले किंतु दूसरे इसकी भावना भाँप न पाएँ। 19. आँखों-आँखों में ही रात काटना = किसी परेशानी के कारण सारी रात जगते रहना या सो न पाना। 20. आँखों से खून टपकना = बहुत क्रोधित होना। 21. आँखों से गंगा-जमुना बहना/बहाना = बहुत रोना। 22. आँखों देखते मक्खी नहीं निगली जाती = जानते बूझते कोई अप्रिय काम न करना। 23. आँखों से विष उगलना = बहुत क्रोधित होना। 24. फूटी आँखों न सुहाना = बिलकुल अच्छा न लगना।

आँख मिचौनी

([तद्.+देश.]) (स्त्री.)

कई बच्चों का सम्मिलित खेल जिसमें एक बच्चा किसी दूसरे बच्चे की आँखें मूँदता (ढाँकता) है। इस बीच बाकी बच्चे इधर-उधर छिप जाते हैं। आँखें खुलने पर वह बच्चा छिपे बच्चों को ढूँढता है। जिस बच्चे को वह सबसे पहले ढूँढ लेता है उसे अपनी आँखें बंद करवानी पड़ती है। इस तरह यह खेल चलता रहता है। hide and reak

आँगन

([तद्< अंगण]) (पुं.)

घर के अंदर का चारों ओर से घिरा वह खाली स्थान जिस पर छत न बनी हो। पर्या. सहन, चौक।

आँगनवाड़ी

(दे.)

शाकवाटिका। शिक्षा-छोटे बच्चों की आरंभिक पाठशाला जहाँ खेल-कूद के माध्यम से भावी शिक्षा के लिए उन्हें तैयार किया जाता है। nursury

आँच

([तद्< अर्चि] ) (स्त्री.)

1. वह गरमी या ताप जिसे आग के पास जाने पर महसूस किया जाता है। 2. आग की लपट, लौ। उदा. धीमी आँच पर बनी सब्ज़ी स्वादिष्‍ट होती है।

आँचल

([तद्.< अंचल]) (पुं.)

 < अंचल] 1. टूटे साड़ी आदि के दोनों छोरों में से वह छोर। पर्या. पल्ला, छोर जो सामने छाती पर और पीछे लटका रहता है। मुहा. आँचल फैलाना-कुछ माँगने के लिए दीनतापूर्वक कपड़े का पल्ला फैलाना।
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