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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Fallacy Of Petitio Principii

सिद्ध साधन-दोष
वह दोषपूर्ण युक्ति जिसमें निष्कर्ष आधारवाक्यों में पहले से ही सिद्ध मान लिया जाता है।

Fallacy Of Quoting Out Of Context

असंदर्भोद्धरण-दोष
किसी उक्ति को उसके मूल संदर्भ से हटाकर उद्धृत करने से उत्पन्न दोष।
उदाहरणार्थ : यदि किसी फिल्म-समीक्षक ने कहा हो कि अमुक फिल्म खराब अभिनय और खराब फोटोग्राफी के अलावा निर्दोष है, और कोई वितरक उसे देखने-योग्य बताने के लिए यह उद्धरण दे कि अमुक फिल्म समीक्षक ने उसे निर्दोष कहा है, तो यह दोष होगा।

Fallacy Of Reduction

अपचय-दोष
वस्तुओं का उनके घटकों में विश्लेषण करने की सामान्य वैज्ञानिक प्रणाली के फलस्वरूप इस गलत धारणा का बन जाना कि वस्तुएँ उन घटकों के अतिरिक्त कुछ हैं ही नहीं। जैसे : पानी ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं।

Fallacy Of Secundum Quid

विशेष-सामान्य भ्रम-दोष
वह दोषपूर्ण युक्ति जिसमें किसी प्रतिज्ञप्ति को जो विशेष परिस्थितियों में ही सत्य होती है, सामान्य रूप से सत्य मान लिया जाता है।

Fallacy Of Selected Instances

दृष्टांत-चयन-दोष
थोड़े-से चुने हुए दृष्टांतों के आधार पर कोई सामान्यीकरण कर लेने का दोष। जैसे : “बंगाली वाचाल होते हैं।”

Fallacy Of Simplism

आभासी-सरलता-दोष
दो प्राक्कल्पनाओं में से जो सरल हो उसे सत्य मान लेने का दोष।

Fallacy Of Undistributed Middle

अव्याप्त देतु-दोष
जब किसी न्यायवाक्य में मध्यम-पद आधारवाक्यों में एक बार भी व्याप्त नहीं होता तो उसे अव्याप्त मध्यम-पद-दोष कहा जाता है।
उदाहरण : “सभी मनुष्य जानवर हैं” तथा “सभी कुत्ते जानवर हैं” अतः “सभी कुत्ते मनुष्य है”। इस युक्ति में ‘जानवर’ पद में अव्याप्त मध्यम-पद-दोष विद्यमान है।

Fallacy Of Unproved Hypothesis

असिद्ध-प्राक्कल्पना-दोष
किसी बात की व्याख्या के लिए प्रस्तावित प्राक्कल्पना के सिद्ध न होने से उत्पन्न दोष।

Fallacy Of Use Mixing

प्रयोग-संकरण-दोष
भाषा के एक प्रकार के प्रयोग (जैसे : संवेगार्थक या आज्ञार्थक प्रयोग) को दूसरे प्रकार (जैसे : संज्ञानार्थक प्रयोग) का मान लेने से पैदा होने वाला दोष।
उदाहरण : “ईसा ने अपने शत्रुओं को प्यार करने का आदेश दिया: लेकिन इसके सत्य होने का कोई प्रमाण नहीं है और इसलिए यह मिथ्या है; अतः जो मिथ्या है उसका अनुसरण मैं नहीं कर सकता।”

False Analogy

मिथ्या साम्यानुमान
वह साम्यानुमान जो दो वस्तुओं के मुख्य गुणों की अपेक्षा उनके गौण गुणों की समानता पर आधारित हो या उपमा और रूपक के प्रयोग पर आश्रित हो।

Falsifiability

मिथ्यापनीयता
कार्ल पॉपर के अनुसार कोई प्रतिज्ञप्ति निर्णायक रूप में सत्यापित तो नहीं की जा सकती किन्तु वह निर्णायक रूप में असत्यापित अवश्य की जा सकती है।
उदाहरण : यदि व्यवहार में ‘एक भी कौआ सफेद दिखाई पड़ता है’ तो ‘सभी कौए काले होते हैं।’ यह प्रतिज्ञप्ति मिथ्यापनीय हो जायेगी।

Family Of Sense Data

इंद्रिय प्रदत्त-परिवार
समकालीन अंग्रेज दार्शनिक एच. एच. प्राइस के अनुसार, किसी भौतिक वस्तु से संबंधित इंद्रियदत्तों का समुच्चय, जिसका अन्य भौतिक वस्तुओं के इंद्रियप्रदत्त-समुच्चयों से भेद किया जा सकता है।

Fana

फना, तदाकार होना, लीन होना
मुसलमान सूफियों की मान्यता के अनुसार समाधि की अवस्था जिसमें साधक ईश्वर से एकाकार हो जाता है और अपने अस्तित्व को बिल्कुल भूल जाता है।

Fatalism

भाग्यावाद, दैववाद
वह मत कि मनुष्य जो कुछ भी होता है या करता है वह पहले से ही भाग्य के द्वारा नियत होता है।

Fecundity Of Pleasure

सुख की उर्वरकता
सुखवादी बेन्थम के अनुसार, सुख की अन्य सुखों की जन्म देने की क्षमता।

Felapton

फेलाप्टोन
तृतीय आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक पक्ष-आधारवाक्य सर्वव्यापी विध्यात्मक तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
जैसे : कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है;
कुछ मनुष्य विवेकशील हैं;
∴ कुछ विवेकपूर्ण प्राणी पूर्ण नहीं हैं।

Ferio

फेरीयो
प्रथम आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक पक्ष-आधारवाक्य अंशव्यापी विध्यात्मक, तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई बंगाली यूरोपीय नहीं है;
कुछ दार्शनिक बंगाली हैं;
∴ कुछ दार्शनिक यूरोपीय नहीं हैं।

Ferison

फेरिसोन
तृतीय आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक, पक्ष-आधारवाक्य अंशव्यापी विध्यात्मक और निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई भी मनुष्य बंदर नहीं है;
कुछ मनुष्य नीग्रो हैं;
∴ कुछ नीग्रों बंदर नहीं है।

Fesapo

फेसापो
चतुर्थ आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक, पक्ष-आधारवाक्य सर्वव्यापी विध्यात्मक तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई भी बंदर मनुष्य नहीं हैं;
कुछ मनुष्य द्विपद हैं;
∴ कुछ द्विपद बंदर नहीं है।

Festino

फेस्टीनो
द्वितीय आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साधय – आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक, पक्ष-आधारवाक्य अंशव्यापी विध्यात्मक तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई भी मनुष्य बंदर नहीं है;
कुछ प्राणी बंदर हैं;
∴ कुछ प्राणी मनुष्य नहीं हैं।

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