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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

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Fallacy Of Ambiguous Minor

द्वयर्थक-पक्ष-दोष, संदिग्ध पक्ष-दोष
पक्ष-पद की द्वयर्थकता से युक्ति में उत्पन्न होने वाला दोष।
उदाहरण : सभी जलाशय मछलियों के निवास हैं;
चश्मा जलाशय है;
अतः चश्मा (पहनने का) मछलियों का निवास है।

Fallacy Of Amphiboly (Or Amphilology)

वाक्यछल दोष
वह दोष जो किसी शब्द की अनेकार्थकता से नहीं बल्कि वाक्य की भ्रामक रचना के कारण उसमें अनेकार्थकता आने से पैदा होता है। जैसे : “मैं स्वयं को साथियों से भिन्न दिखाने के लिए ऐसे कपड़े नहीं पहनूँगा।”

Fallacy Of Begging The Question

आत्माश्रय दोष
देखिए “fallacy of petitio principii”।

Fallacy Of Category Mixing

कोटि-संकरण-दोष
एक दोष जो किसी युक्ति में तब पैदा होता है जब उसमें एक कोटि के शब्द को ज्ञात अथवा अज्ञात रूप में एक भिन्न कोटि के शब्द की तरह इस्तेमाल किया गया होता है, अर्थात् जब उसमें एक शब्द कोटि-परिवर्तन के कारण अर्थहीन हो जाता है।
उदाहरण : मैं काल की गति को नहीं रोक सकता, अतः मैं बलवान नहीं हूँ। (यहाँ काल को मोटर जैसी गतिमान् वस्तु के रूप में लिया गया है जो कि एक भिन्न कोटि की वस्तु है।)

Fallacy Of Circular Argument

चक्रक-युक्ति दोष
आत्माश्रय-दोष का एक जटिल रूप जिसमें एक प्रतिज्ञप्ति एक अन्य प्रतिज्ञप्ति के द्वारा सिद्ध की जाती है और फिर इस अन्य प्रतिज्ञप्ति को सिद्ध करने के लिए पिछली प्रतिज्ञप्ति को आधार बनाया जाता है।
उदाहरण :” ईश्वर है क्योंकि धर्मग्रंथ ऐसा कहते हैं।” “पर धर्मग्रंथों की बात क्यों मानी जाए?” “इसलिए कि वे ईश्वर के वचन हैं।”

Fallacy Of Co-Effects

सह-कार्य-दोष
एक ही कारण के कार्यों में से एक को अन्य का कारण मान लेने का दोष। जैसे : विद्युत का चमकना, बादल के गर्जन का कारण माना जाता है जबकि विद्युत का चमकना और बादल गर्जन दोनों एक ही कारण के सहकारी हैं।

Fallacy Of Co-Existence

सह-अस्तित्व-दोष
साथ-साथ अस्तित्व रखने वाली बातों में कारण-कार्य का संबंध मान लेने का दोष, क्योंकि यह संबंध आनुक्रमिक घटनाओं में होता है।
उदाहरण : यदि बिल्ली के रास्ता काटने से कोई दुर्घटना घटित हो जाती है तो सामान्यतः लोग बिल्ली द्वारा रास्ता काटे जाने को दुर्घटना का कारण मान लेते हैं जबकि दोनों के बीच कारण-कार्य संबंध न होकर सह-संबंध मात्र होता है।

Fallacy Of Complex Question

छल प्रश्न दोष
यह दोष तब होता है जब प्रतिवादी से ऐसा प्रश्न किया जाता है जिसमें कोई अनुचित मान्यता छिपी रहती है। देखिए fallacy of many questions तथा fallacy of double question (ये सभी एक दोष के नामांतर हैं)।
उदाहरणार्थ : यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से प्रश्न करता है कि क्या आपने अपनी पत्नी को पीटना बन्द कर दिया है तो दूसरा व्यक्ति उक्त प्रश्न के उत्तर में न तो “हाँ” कह सकता है और न ही “नहीं” क्योंकि दोनों अवस्थाओं में उसे स्वीकार करना पड़ेगा कि वह अपनी पत्नी को कभी अवश्य पीटता रहा होगा।

Fallacy Of Composition

संग्रह-दोष, संहति-दोष
किसी पद को व्यष्टिक अर्थ में ग्रहण करने के बाद उसका समष्टिक अर्थ में प्रयोग करने से उत्पन्न दोष।
उदाहरण : प्रत्येक आदमी का सुख उसके लिए शुभ है; इसलिए सभी का सुख सम्पूर्ण समाज के लिए शुभ है। देखिए collective use तथा distributive use।

Fallacy Of Confusing Cause With Effect

कार्य-कारण-विपर्यय-दोष
कार्य-कारण के रूप में संबंधित दो घटनाओं में से यह न समझ पाना कि कौन कारण है और कौन कार्य है। जैसे : मुर्गी और अण्डे के संबंध में यह न बता पाना कि मुर्गी अण्डे का कारण है अथवा अण्डा मुर्गी का कारण है।

Fallacy Of Consequent

फलवाक्य दोष
हेतु और फल को परस्पर विनिमेय मान लेने से उत्पन्न होने वाला तर्कदोष।
उदाहरण : यदि धर्म सचमुच आत्मोन्नति का साधन है, तो उसका कभी नाश नहीं होता; हिंदू धर्म का जो कि अनादिकाल से चला आ रहा है, नाश नहीं हुआ है; अतः हिंदू धर्म सचमुच आत्मोन्नति का साधन है।

Fallacy Of Context Mixing

संदर्भ-संकरण-दोष
एक प्रकार का दोष जो किसी युक्ति में तब पैदा होता है जब उसमें एक भिन्न में ही सार्थकता रखने वाले शब्द का प्रयोग होता है।
उदाहरण : भेडिए अभिमान नहीं करते, झूठ नहीं बोलते; इसलिए वे मनुष्य से अधिक नीतिपरायण हैं। (यहाँ भेड़िए के संदर्भ में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो मनुष्य की चर्चा में ही सार्थकता रखते हैं।)

Fallacy Of Denying The Antecedent

हेतुवाक्य-निषेध-दोष
पक्ष-आधारवाक्य में हेतुवाक्य का निषेध करके निष्कर्ष में फलवाक्य का निषेध करने का दोष। जैसे : ” यदि ‘अ’ है तो ‘ब’ है; ‘अ’ नहीं है; अतः ‘ब’ नहीं है। “यदि युद्ध होता है तो विनाश होता है; युद्ध नहीं हो रहा है; अतः नहीं हो रहा है।”

Fallacy Of Division

विग्रह-दोष
किसी पद को पहले समष्टिक अर्थ में ग्रहण करके बाद में व्यष्टिक अर्थ में इस्तेमाल करने से उत्पन्न तर्कदोष।
उदाहरण : “इस कमरे में विद्यमान सभी व्यक्तियों का वजन आठ क्विन्टल है; हरि इस कमरे में मौजूद एक व्यक्ति है; अतः हरि का वजन आठ क्विन्टल है।”

Fallacy Of Double Question

द्विगुणित प्रश्न-दोष
देखिए “fallacy of complex question”।

Fallacy Of Doubling The Bet

पण-द्विगुणन-दोष
यह मानने की गलती करना कि चितपट जैसे खेल में, जिसमें विकल्प समान रूप से प्रसंभाव्य होते हैं, यदि कोई एक ही बात पर शर्त लगाता जाए और हारने पर शर्त को दुगना करता जाए तो अंत में वह अवश्य जीतेगा।

Fallacy Of Equivocation

अनेकार्थक दोष
युक्ति में किसी अनेकार्थक शब्द के प्रयोग से उत्पन्न होने वाला दोष।
जैसे : “लाल एक रंग है; रक्त लाल होता है; अतः रक्त एक रंग है।”

Fallacy Of Exclusive Linearity

ऐकान्तिक रेखीयता-दोष
अनुचित रूप से यह मान बैठना कि अनेक तत्व इस प्रकार संबंधित हैं कि उनसे अनिवार्यतः एक रेखावत् क्रम बन जाता है।

Fallacy Of Exclusive Particularity

ऐकान्तिक विशिष्टता-दोष, व्यावर्तक विशेषता-दोष
यह मान लेने का दोष कि यदि एक वस्तु एक संदर्भ में एक संबंध रखती है तो वह उसी या किसी अन्य संदर्भ में कोई अन्य संबंध नहीं रख सकती।
उदाहरण : यदि एक व्यक्ति किसी स्त्री का पति है तो यह मान लेना कि वह किसी का पिता या भाई नहीं हो सकता। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आर. बी. पैरी ने विज्ञानवाद का खण्डन एवं वस्तुवाद का खण्डन एवं वस्तुवाद का मण्डन करने के लिये किया था।

Fallacy Of Existential Assumption

अस्तित्वाभिग्रह-दोष
यदि स्पष्ट रूप से यह न बताया गया हो कि एक वस्तु का अस्तित्व है तो उसके अस्तित्व को नहीं मान लेना चाहिए। इस नियम के विपरित अस्तित्व मान लेने का दोष।

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