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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Too Wide Definition

अतिव्याप्त परिभाषा
वह दोषयुक्त परिभाषा जिसमें पूरा गुणार्थ नहीं बताया जाता और फलतः जो परिभाष्य पद के वस्त्वर्थ को अनुचित रूप से बढ़ा देती है, जैसे ‘मनुष्य एक प्राणी है’ (इसमें विवेकशीलता को छोड़ दिया गया है, जिससे कुत्ते-बिल्ली भी ‘मनुष्य’ हो जाते हैं।

Traditionalism

परंपरावाद
सामान्यतः परंपरागत विचारों, आचारों आदर्शों और मूल्यों के अनुसरण में विश्वास। विशेषतः उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में फ्रांस में प्रचलित वह विचारधारा की सत्य की खोज व्यक्ति की सामर्थ्य से परे है, वह केवल परंपरा में ही सुलभ है।

Traducianism

देहात्मसहजननवाद
वह मत कि आत्मा तथा शरीर की उत्पत्ति एक साथ माता-पिता की आत्माओं से होती है; प्रजनन की प्राकृतिक प्रक्रिया ही आत्मा को भी उत्पन्न करती है।

Transcendent

अनुभवातीत, इंद्रियातीत
इंद्रियों की पहुँच से परे, अनुभव से परे, प्रकृति से परे, इहलोक से परे। विशेषतः कांट ने इस शब्द का प्रयोग उन वस्तुओं के विशेषण के रूप में किया है जो अनुभव या ज्ञान की सीमा से बाहर हैं।

Transcendental

इंद्रियातीत, लोकातीत
सामान्यतः इसका trascendent से कोई भेद नहीं किया जाता।

Transcendental Aesthetic

संवेदनालंब-समीक्षा
कांट के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘शुद्ध बुद्धिमीमांसा’ का प्रथम खंड, जिसमें संवेदन के आकारों का विवेचन किया गया है : ये आकार हैं दिक् और काल, जो साँचों का काम करते हैं, जिनमें से ढलकर ऐंद्रीय सामग्री मन के सामने व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत होती है।

Transcendental Analytic

बोधालंब-समीक्षा
कांट के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘शुद्ध बुद्धिमीमांसा’ के दूसरे खंड का प्रथम भाग, जिसमें वस्तुओं के ज्ञान के लिए आवश्यक उन तत्त्वों अर्थात् उन आधारभूत (‘शुद्ध’) संप्रत्ययों अथवा ‘पदार्थों’ (categories) का विश्लेषण किया गया है जो संवेदनों का एकीकरण करते हैं।

Transcendental Apperception

प्रागनुभविक अहंप्रत्यय
कांट के अनुसार, संवेदनों की विविधता और अवस्था-परिवर्तन के बावजूद ज्ञाता के रूप में आत्मा के सदैव अभिन्न और एक बने रहने की चेतना जो किसी भी अनुभव के होने की एक अनिवार्य शर्त है।

Transcendental Dialectic

प्रागनुभविक द्वंद्व समीक्षा
कांट की “शुद्ध बुद्धिमीमांसा” का तीसरा खंड जिसमें प्रागनुभविक “आकारों” और “पदार्थों” के अनुभव के क्षेत्र के बाहर लागू किए जाने को अवैध बताया गया है तथा तर्कबुद्धि के “प्रत्ययों” को नियामक मात्र मानते हुए तर्कबुद्धिपरक मनोविज्ञान, ब्रह्मांडमीमांसा और ईश्वरमीमांसा का खंडन किया गया है।

Transcendental Illusion

प्रागनुभविक भ्रम
कांट के अनुसार, प्रागनुभविक आकारों और संप्रत्ययों को अनुभवातीत जगत् में लागू करने की मानसिक प्रवृत्ति के कारण उत्पन्न भ्रम।

Transcendentalism

1. प्रागनुभविकवाद : ज्ञान के प्रागनुभविक तत्त्वों पर बल देने वाला अथवा वास्तविकता के अज्ञेय या ज्ञानातीत स्वरूप में विश्वास करने वाला कांटीय सिद्धांत।
2. अनुभवातीतवाद, इंद्रियातीतवाद : विश्व में अनुभवातीत तत्वों को आधारभूत माननेवाला कांटोत्तर प्रत्ययवाद।

Transcendental Logic

प्रागनुभविक तर्कशास्त्र
इमानुएल कांट के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘शुद्ध बुद्धिमीमांसा’ का द्वितीय खंड, जिसमें पदार्थों (Categories) का अर्थात्, उन प्रागनुभविक आकारों का जिनके द्वारा बोधशक्ति संवेदनों का संश्लेषण करती है, विवेचन किया गया है।

Transcendental Method

ज्ञानालंब-विश्लेषण-प्रणाली
कांट के अनुसार, उन हेतुओं (संवेदन के आकारों, पदार्थों तथा तर्कबुद्धि के आदर्शों) का विश्लेषण करने की प्रणाली जो अनुभव और ज्ञान को संभव बनाते हैं और स्वयं इनकी पहुँच के बाहर रहते हैं।

Transcendental Philosophy

प्रागनुभविक दर्शन
मुख्य रूप से, कांट का दार्शनिक सिद्धांत जिसमें अनुभव और ज्ञान में दत्त सामग्री की व्यवस्था या उसके संश्लेषण के लिए प्रागनुभविक मानसिक तत्त्वों (आकारों, पदार्थों इत्यादि) को आवश्यक माना गया है।

Transcendental Proof

प्रागनुभविक प्रमाण
कांट के अनुसार, वह प्रमाण जो प्रमेय को मानवीय अनुभव का एक प्रागनुभविक आलंब सिद्ध करता है, जिसके बिना अनुभव संभव नहीं होता।

Transcendentals

विशेषातीत प्रत्यय
स्कॉलेस्टिक दर्शन में, वे प्रत्यय जो समस्त वस्तुओं पर लागू होते हैं, जैसे, सत्ता, वस्तु, कुछ, एक, सत्य तथा शुभ।

Transitive Relation

संक्रामी संबंध
वह संबंध जो यदि अ का ब से हो और ब का स से हो तो अ का स से अवश्य होता हो, जैसे : “- से बड़ा होना”।

Transitive States

संक्रामी अवस्थाएँ
विलियम जेम्स के अनुसार, चेतना-प्रवाह की वे अवस्थाएँ जो एक स्थिर अवस्था से दूसरी स्थिर अवस्था तक पहुँचने में सहायता देती हैं। ये संबंधात्मक होती हैं और भाषा में भी ‘ऊपर’ इत्यादि शब्दों में प्रकट होती हैं।

Transmigration

पुनर्जन्म, जन्मान्तरण
आत्मा का एक शरीर की मृत्यु के पश्चात् दूसरा (मानवीय या मानवेतर) शरीर ग्रहण करना।

Transvaluation Of Values

मूल्यों का मूल्यांतरण
मुख्यतः नीत्शे (Nietzsche) के द्वारा प्रयुक्त पद जो युग की प्रधान और परंपरागत प्रवृत्तियों, मूल्यों और आदर्शों में क्रांति लाने के प्रयोजन से प्रेरित हैं।

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