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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Supernaturalism

अतिप्रकृतिवाद
ऐसी शक्तियों के अस्तित्व में विश्वास जो प्रकृति और उसके नियमों के बंधन से ऊपर हैं तथा विश्व की उत्पत्ति इत्यादि के कारण हैं।

Syllogism

न्यायवाक्य
व्यवहित अनुमान का एक प्रकार जिसमें निष्कर्ष दो आधारवाक्यों से संयुक्त रूप से निकलता है।
उदाहरण : सभी मनुष्य मरणशील हैं; }
सुकरात एक मनुष्य है; } (आधारवाक्य)
∴ सुकरात मरणशील है। (निष्कर्ष)

Syllogistic(S)

न्यायवाक्यीय
तर्कशास्त्र की वह शाखा जो न्यायवाक्य का वर्णन-विवेचन करती है।

Symbolic Logic

प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र
पारंपरिक आकारपरक तर्कशास्त्र को आधुनिक तर्कशास्त्रियों के द्वारा दिया गया रूप, जिसमें साधारण प्रयोग की भाषा की अस्पष्टता, अनेकार्थकता और अपर्याप्तता से बचने के लिए गणित की प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग किया जाता है।

Symmetrical Relation

सममित संबंध
दो पदों का ऐसा संबंध जो यदि ‘क’ और ‘ख’ के बीच में है तो ‘ख’ और ‘क’ के बीच में भी रहता है। जैसे, ‘विवाह’, ‘भिन्नता’ इत्यादि। (यदि कमल का शीला से विवाह हुआ है तो शीला का कमल से विवाह हुआ है, यदि क ख से भिन्न है तो ख ख से भिन्न है।)

Syncategorematic Word

स्वतःपदायोग्य शब्द
वह शब्द जो स्वतः किसी तार्किक वाक्य का उद्देश्य या विधेय नहीं बन सकता, परंतु अन्य शब्दों के साथ संयुक्त होकर बन सकता है, जैसे ‘का’, ‘और’ इत्यादि।

Synergism

अनेककर्तृत्ववाद
ईसाई धर्ममीमांसा में, वह सिद्धांत कि मनुष्य की मुक्ति के लिए अनेक कारक क्रियाशील हैं। इस शब्द का प्रचलन सोलहवीं शताब्दी से आरंभ हुआ जब मेलेंक्थॉन ने इस बात पर बल दिया कि ‘पवित्र आत्मा’, ‘ईश्वर का वचन’ तथा ‘मनुष्य का संकल्प’ मिलकर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

Synonymous Definition

पर्याय-परिभाषा
वह दोषयुक्त परिभाषा जिसमें परिभाष्य पद का कोई पर्याय दे दिया जाता है, जैसे : “पौधा एक वनस्पति” है।

Syntax

वाक्य-विन्यास, वाक्यविचार
वाक्यों की व्याकरणीय एवं तार्किक व्यवस्था, क्रमबद्धता तथा संरचना
1. काव्यों का व्याकरणीय ढाँचा।
2. वाक्यों की व्याकरणीय संरचना।
3. शब्दों का व्याकरणीय नियम और प्रयोग के अनुसार, वाक्यों में रखकर, उचित स्वरूप देना।
4. प्रतीकों के बीच व्याकरणीय संबंध या ढाँचे का अध्ययन। उस विधि का अध्ययन जिससे ये प्रतीक अर्थ सम्प्रेषण हेतु व्यवस्थित किये जाते हैं।

Synthesis

1. सश्लेषण : विचार के अलग-अलग तत्वों को संयुक्त करके एक समन्वित रूप देने की क्रिया या उसका परिणाम।
2. समन्वय : हेगेल के दर्शन में, द्वंद्वात्मक प्रक्रिया का तीसरा चरण जिसमें ‘पक्ष’ और ‘प्रतिपक्ष’ का समाहार होता है।

Synthetic Philosophy

संश्लेषणात्मक दर्शनशास्त्र
विभिन्न दार्शनिक मत-मतान्तरों के मध्य सांमजस्य निरूपित करने वाली दर्शनशास्त्र की शाखा।

Synthetic Proposition

संश्लेषणात्मक प्रतिज्ञप्ति
वह प्रतिज्ञप्ति, जिसमें विधेय, उद्देश्य में निहित न होकर, उसके विषय में अधिक जानकारी देता है। आधुनिक शब्दावली में वह प्रतिज्ञप्ति जो पुनरूक्त, विश्लेषणात्मक और आत्तमव्याघात्क न हो। यथाः ‘कमल लाल है’।

Synthetic Of Reasoning

संश्लेषणात्मक तर्कमाला
देखिए “progressive train of reasoning”।

Tabula Rasa

कोरी पट्टिका
इंद्रियामुभव को ज्ञान का एकमात्र स्रोत माननेवाले जॉन लॉक के द्वारा मन के लिए प्रयुक्त और अनुभवों से पहले की उसकी अवस्था का सूचक पद : मन एक ऐसी ‘कोरी पटिया’ है जिस पर अनुभव से ही संस्कार अंकित होते हैं। लॉक जन्मजात प्रत्ययों को अस्वीकार करता है।

Tautology

पुनरूक्ति
1. वह तर्कदोष जिसमें निष्कर्ष किसी नवीन तथ्य का ज्ञान अथवा सूचना नहीं देता बल्कि आधारवाक्य में कही गई बात को ही शाब्दिक हेर-फेर के साथ दोहराता है।
2. प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र में, वह सूत्र जिसके चरों (प्रतिज्ञप्ति-चरों) को चाहे जो सत्यता-मूल्य (सत्य या असत्य) प्रदान किया जाए, संपूर्ण का सत्यता-मूल्य सदैव सत्य होता है। साधारण भाषा में, वह प्रतिज्ञप्ति जो प्रत्येक वस्तुस्थिति में सत्य होती है, जैसे “अ या तो ब है या ब नहीं”।

Teleological Argument

उद्देश्यपरक युक्ति, प्रयोजनपरक युक्ति
वह युक्ति जिसमें विश्व की सप्रयोजनता के आधार पर ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध किया जाता है। इस युक्ति के अनुसार, विश्व में हमें सर्वत्र प्रयोजन के प्रमाण प्राप्त होते हैं; प्रयोजन एक चेतन शक्ति के अस्तित्व की ओर संकेत करता है; अतः कोई चेतन शक्ति है जो किसी प्रयोजन की पूर्ति के लिए विश्व की रचना करती है; वही ईश्वर है।

Teleological Ethics

प्रयोजनवादी नीतिशास्त्र
वह नैतिक सिद्धांत जो कर्मों के शुभाशुभ, उचित-अनुचित का मूल्यांकनकर्ता के प्रयोजन, उद्देश्य के आधार पर करना चाहता है।

Teleological Idealism

प्रयोजनपरक प्रत्ययवाद
वह सिद्धांत जिसके अनुसार अनिवार्य सत्यों, तथ्यों तथा मूल्यों के तीन पृथक् जगत् मान्य हैं, जिनमें मूल्य और तर्कबुद्धि को सर्वोपरि स्वीकार्य किया गया है और वही विश्व को एक विशिष्ट योजना के अनुसार संचालित करते हैं। लोत्से (Lotze 1817-1881, जर्मन दार्शनिक)

Teleology

1. प्रयोजनवाद, उद्देश्यवाद : यंत्रवाद के विपरीत, उद्देश्यों, लक्ष्यों तथा अंतिम कारणों का अस्तित्व मानने वाला सिद्धांत। यंत्रवाद भविष्य तथा वर्तमान को भूत के परिप्रेक्ष्य में देखता है, परंतु प्रयोजनवाद भूत तथा वर्तमान को भविष्य के परिप्रेक्ष्य में देखता है।
2. प्रयोजनात्मकता : सप्रयोजन या उद्देश्वान् होने की मान्यता।

Telepathy

मनःपर्याय, परचित ज्ञान
किसी भी दूरी पर स्थित व्यक्ति के मनोभावों को जान लेने की शक्ति या क्षमता, जिसमें इन्द्रिय प्रत्यक्ष माध्यम नहीं होता।

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