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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Stacking The Deck

एकांगी बलन (दोष)
पदाघात-दोष का एक प्रकार जो तथ्यों का एकपक्षीय चयन करके इष्ट प्रभाव उत्पन्न करने में प्रकट होता है, जैसे महत्त्वहीन बातों पर जोर देकर किसी नाटक या कृति की आलोचना करने में अथवा केवल प्रतिकूल बातों को प्रस्तुत करके किसी के चरित्र को नष्ट करने में।
देखिए “fallacy of accent”।

Statement

कथन
वह वाक्य जो विध्यात्मक या निषेधात्मक हो, और जो सत्य या असत्य हो।

Stipulative Definition

स्वनिर्मित परिभाषा
वह परिभाषा जिसमें नये शब्दों का प्रयोग किया गया हो अथवा पुराने शब्दों को स्वेच्छा से नया अर्थ प्रदान किया गया हो।

Strengthened Syllogism

अतिबल न्यायवाक्य
वह न्यायवाक्य जिसमें एक आधारवाक्य आवश्यकता से अधिक बल वाला होता है, अर्थात् अंशव्यापी निष्कर्ष को प्राप्त करने के लिए, आधारवाक्य का अंशव्यापी होना पर्याप्त है। जबकि वह सर्वव्यापी है। जैसे : चतुर्थ आकृति में ब्रामान्टीप (Bramantip)।

Strict Implication

कठोर आपादन
वह आपादन जिसमें आपाद्य आपादक से अनिवार्यतः निगमित होता है। जैसे ‘यदि क तो ख’, में यदि ‘क’ से ‘ख’ का निगमन।

Strong Disjunction (=Exclusive Disjunction)

प्रदत्त वियोजन
वह कथन जिसमें ‘या’ के प्रयोग द्वारा ऐसे दो परस्पर व्यावर्तक विकल्प बताये गए हों, जो न तो एक साथ सत्य हों, और न असत्य। जैसे : राम या तो मृत है या जीवित।

Subalternant

उपाश्रयक
उपाश्रयण नामक विरोध-संबंध रखनेवाली प्रतिज्ञप्तियों में से वह जो सर्वव्यापी होती है। इसे subaltern भी कहते हैं। देखिए “subalternation”।

Subalternate

उपाश्रित
उपाश्रयण नामक विरोध-संबंध रखनेवाली प्रतिज्ञप्तियों में से वह जो अंशव्यापी होती है। इसे subaltern भी कहते हैं। देखिए “subalternation”।

Subalternation

उपाश्रयण
दो ऐसी प्रतिज्ञप्तियों का विरोध-संबंध जिनके उद्देश्य, विधेय और गुण समान होते हैं परन्तु परिमाण भिन्न होते हैं, अर्थात् जिनमें से एक सर्वव्यापी होती है और दूसरी अंशव्यापी, जैसे : आ (A) और ई (I) का अथवा ए (E) और (O) का, जैसे : सभी अ ब हैं (आ) से कुछ अ ब हैं (ई)। कोई अ ब नहीं (ए) से कुछ अ ब नहीं हैं (ओ)।

Subcontrariety

अनुविपरीत
विरोध-संबंध का एक प्रकार जो समान उद्देश्य और समान विधेयवाली परन्तु गुण में भिन्नता रखनेवाली दो अंशव्यापी प्रतिज्ञप्तियों अर्थात् ई (I) और ओ (O) के मध्य होता है, जैसे : कुछ अ ब हैं (ई)। कुछ अ ब नहीं हैं (ओ)।

Subject

विषय
ज्ञानमीमांसा में, वस्तु या विषय को जाननेवाला अथवा ज्ञान का कर्ता, अर्थात् ज्ञाता, जिसे कि आत्मा, मन, बुद्धि इत्यादि विभिन्न रूर्पो में कल्पित किया गया है।

Subjective Idealism

विषयिनिष्ठ प्रत्ययवाद
वह ज्ञानमीमांसीय सिद्धांत जिसके अनुसार ज्ञाता को केवल अपने प्रत्ययों का ही साक्षात् ज्ञान हो सकता है, और इसलिए
वाह्य जगत् जिसे हम वास्तविक मान बैठते हैं, कल्पना मात्र है, जिसके अस्तित्व का कोई पक्का प्रमाण नहीं है। आधुनिक दर्शन में बर्कले और भारतीय दर्शन में योगाचार बौद्ध इस मत के प्रतिपादक हैं।

Subjectivism

विषयिनिष्ठवाद, विषयिनिष्ठतावाद
मूल्यमीमांसा में, वह मत कि नैतिक तथा अन्य मूल्य व्यक्ति की अनुभूतियाँ और मानसिक प्रतिक्रियाएँ मात्र हैं और बाह्य जगत् में उनके अनुरूप किसी वस्तु का अस्तित्व नहीं है। देखिए “subjective idealism”।

Substance Theory Of Mind

मनोद्रव्य-सिद्धांत
सी. डब्ल्यू. मॉरिस के अनुसार, वह सिद्धांत कि मन एक स्थायी तथा अपनी एकता को बनाए रखनेवाला द्रव्य है।

Substantive Theory Of Mind

द्रव्यकल्प-मन-सिद्धांत
सी. डब्ल्यू. मॉरिस के अनुसार, वह सिद्धांत कि यद्यपि मन स्वयं एक द्रव्य नहीं है तथापि इसमें द्रव्य की विशेषताएँ विद्यमान हैं।

Substratum

अधिष्ठान
वह जिसमें गुण समवेत रहते हैं; गुणों का आधार; द्रव्य। अरस्तू के दर्शन में पुद्गल, जो कि आकार के मूल में रहता है; अथवा ठोस वस्तु जो गुणों को धारण करती है।

Sufism

सूफीमत, सूफीवाद
इस्लाम की कट्टरता के विरोध-स्वरूप बाह्य (ईसाई और हिंदू) प्रभाव से उसके अन्दर विकसित एक रहस्यवादी आंदोलन। इसमें इन्द्रिय-निग्रह, त्याग, दारिद्र्य, धैर्य तथा आस्था मुख्य गुण हैं जो ईश्वर-प्राप्ति के लिए आवश्यक माने गए हैं।

Summum Bonum

निःश्रेयस्, परमार्थ, परम शुभ, परम हित
मनुष्य का वह नैतिक लक्ष्य जो सर्वोच्च है, जिससे अधिक श्रेयस्कर कुछ हो नहीं सकता, जो मानवीय प्रयत्न का सबसे बड़ा साध्य है। विभिन्न विचारकों ने सुख, आत्म-सिद्धि, शक्ति इत्यादि विभिन्न मूल्यों को सर्वोच्च साध्य माना है।

Summum Genus

पराजाति, सर्वोच्चवर्ग
तर्कशास्त्र में, वह वर्ग जिससे बड़ा कोई वर्ग नहीं हो सकता या जो किसी भी वर्ग का उपवर्ग नहीं बन सकता, जैसे पॉरफिरी (Porphyry) के विभाजन में, सत्ता।

Superman

अतिमानव
नीत्शे एवं श्री अरविन्द आदि के दर्शन में, उस जाति के लिए प्रयुक्त शब्द जो वर्तमान मनुष्य-जाति से श्रेष्ठ होगी और जो विकास क्रम का लक्ष्य भी है।

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