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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Service

सेवा
1. सामान्यतः स्वामिभक्ति तथा आजीविका हेतु किसी पद या कार्य विशेष का दायित्व।
2. भक्ति के क्षेत्र में सेवक भाव से किया जाने वाला कार्य।

Servility

दास्य-प्रवृत्ति
समाज-दर्शन में प्रयुक्त अवधारणा, जिसके अनुसार व्यक्ति किसी का दास बने रहना चाहता है।

Servitor

सेवक, दास
1. भक्ति-दर्शनों में गुरू भक्ति अथवा भगवद् भक्ति के विशेष अर्थ में प्रयुक्त
2. वैष्णव सिद्धांत में अनन्यता एवम् समर्पण के अर्थ में प्रायः प्रयुक्त।

Servitude

सेवा-भाव,दास्य-भाव
विशेष रूप से वैष्णव भक्ति सम्प्रदायों में ईश्वर के प्रति सेवा भाव हेतु प्रयुक्त।

Set

समुच्चय, सेट
वस्तुओं (सदस्यों) का साकल्प (अवयवी)।

Sign

संकेत, चिह्न
1. कोई भी वस्तु जो किसी अन्य वस्तु की पहचान हो।
2. कोई भी वस्तु जो किसी अन्य वस्तु, संबंध या क्रिया का उस व्यक्ति के लिए द्योतक हो, जो उसे समझता है। जैसे > चिह्न ‘अपेक्षाकृत अधिक’ का द्योतक है।

Sign Conventional

पारम्परिक संकेत
वह संकेत जो विशिष्ट वस्तु के लिये बनाया जाता है या अभीष्ट होता है जैसे ‘चले जाओ’ के लिये आंगिक चेष्टा, रूक जाने के लिये विशिष्ट रंग या काम समाप्त करने के लिये घण्टी बजना। प्रत्येक शब्द एक संकेत होता है या किसी वस्तु का अर्थ होता है। इन्हें पारम्परिक इसलिये कहा जाता है कि इनका अर्थ परम्पराश्रित है। इन्हें अन्य अर्थों में लेने की परम्परा बनाई जा सकती थी।

Sign Natural

प्राकृतिक संकेत
1. जब हम रटते हैं कि ‘क’ ख का प्राकृतिक संकेत है तो ‘क’ और ‘ख’ के बीच अनेक दृष्टांतों में (कारणता का) संबंध होता है। ऐसा होने पर ‘क’ से ‘ख’ का अनुमान या भविष्यवाणी हो सकती है जैसे : बादल वर्षा के संकेत हैं, ध्रूम्र अग्नि का संकेत है।

Signification

अर्थाभिधान, अर्थसन्निवेशन
1. किसी वस्तु का अर्थ, 2. किसी वस्तु को अर्थ प्रदान करने की क्रिया। 3. किसी अर्थ का प्रतीकों, चिह्नों, हावभाव इत्यादि से ज्ञान कराना, वस्त्वर्थ की अपेक्षा गुणार्थ का संकेतन।

Similia Similibus Percipiuntur

सदृशं सदृशेण गृह्यते (समान से समान का ग्रहण)
एक प्राचीन ज्ञानमीमांसीय सिद्धांत जिसके अनुसार “सदृश, सदृश के द्वारा जाना जाता है।” इसी से प्रेरित होकर यूनानी दर्शन में वस्तुओं से निकलने वाले सूक्ष्म कणों की कल्पना की गई तथा भारतीय दर्शन में चक्षु को तैजस, कर्ण को आकाशमय तथा अन्य ज्ञानेंद्रियों को तत्तद्भूतमय माना गया।

Simple Conversion

सरल परिवर्तन
एक प्रकार का अव्यवहित अनुमान जिसमें आधारवाक्य के उद्देश्य और विधेय निष्कर्ष में क्रमशः विधेय और उद्देश्य बन जाते हैं, गुण वही बना रहता है और परिमाण भी वही रहता है (अर्थात् यदि आधारवाक्य सर्वव्यापी या अंशव्यापी है तो निष्कर्ष भी वही होता है)। (केवल ए (E) और ई (I) वाक्यों का परिवर्तन सरल होता है।

Simple Dilemma

सरल उभयतोपाश
वह उभयतोपाश जिसका निष्कर्ष एक निरूपाधिक वाक्य होता है।
उदाहरण : यदि अ ब है तो स द है,
और यदि र ल है तो स द है।
या तो अ ब है या र ल है।
∴ स द है।

Simple-Enumeration

सरल गणनामूलक सामान्यानुमान
आगमन पद्धति में एक प्रक्रिया जिसमें निष्कर्ष का अनुमान व्यक्तियों की गणना मात्र के आधार पर किया जाता है। जैसे सभी कौए काले होते हैं।

Simple Location, (Fallacy Of)

सरल अबरस्थिति (तर्कदोष)
ह्वाइटहेड द्वारा प्रयुक्त अवधारणा जिसके अनुसार यह विश्वास सदोष है कि सत्ता की संरचना दिक्काल में पदार्थों के विश्रृंखलित परस्पर असंबद्ध टुकड़ो से हुई है।

Simple Term

एकशब्दीय पद
वह पद जिसमें केवल एक शब्द होता है, जैसे मनुष्य, राम इत्यादि।

Simplicity, Principle Of

लाघव सिद्धांत, सरलता (का सिद्धांत)
वह सिद्धांत जिसके अनुसार किसी घटना की व्याख्या या स्पष्टीकरण के लिये इकाइयों की संख्या न्यूनतम होनी चाहिए।

Sin

पाप
धर्म, नीति, परम्परा और समाज के विपरीत किया गया कर्म।

Sine-Qua Non

अपरिहार्य
वह आवश्यक और अपरिहार्य गुण जिसके बिना कोई वस्तु, वह वस्तु नहीं है।

Single General Proposition

एक परिमाणक सामान्य प्रतिज्ञप्ति
प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र में, वह सामान्य प्रतिज्ञप्ति जिसमें केवल एक परिमाणक हो, जैसे “सभी कुत्ते पशु हैं”। (‘एकपरिमाणक’ प्रतिज्ञप्ति वही है जो पारंपरिक तर्कशास्त्र में ‘सरल प्रतिज्ञप्ति’ है।)

Singular Proposition

एकव्यापी प्रतिज्ञप्ति
वह प्रतिज्ञप्ति जिसका उद्देश्य-पद एकवाचक हो अर्थात् जो एक व्यष्टि के बारे में हो, जैसे “शंकर एक महान् दार्शनिक है”।

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