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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Sense, Internal And External (Kant)

अन्तर्ज्ञान एवं बहिर्ज्ञान (कांट)
काल तथा कालावधि का प्रागनुभविक, अन्तर्बोध। दिक् के गुणों और दिक् के आकार का प्रागनुभविक बोध।

Sense-Manifold

संवित्त-विविधक
अनुभव में समाविष्ट रंग, ध्वनि, स्वाद इत्यादि विविध संवेदनों के अंश।

Sense Moral

देखिये “moral sense”।

Sense Perception

इन्द्रिय प्रत्यक्ष
एक अविश्लेष्य मानसिक अवस्था या क्रिया जो ज्ञानेन्द्रियों के कार्यों से संबंधित और उन पर आश्रित होती है।

Sense-Qualia

संवेद्य-गुण
1. संवेदनाओं के गुणों का अमूर्तरूप में ग्रहण जैसे : स्वेतता, खट्टापन।
2. विशिष्ट वस्तुओं के साहचर्य में निहित गुण जैसे श्वेत कमल, खट्टा अंगूर।

Senses, The Five

पंच ज्ञानेन्द्रियाँ
कर्ण, नासिका, जिह्वा, त्वक् एवं चक्षु इन्द्रियाँ।

Sensibles, Proper (Aristotle)

विशिष्ट संवेद्य
एकेन्द्रिय मात्र से गृहीत विषयों के गुण यदि उक्त ज्ञानेन्द्रिय सक्षम है तो वह उस गुण के प्रत्यक्ष में विफल नहीं होती। यथा दृष्टि हमारे चक्षु के लिये, ध्वनि श्रवण के लिये, स्पर्श, त्वक् के लिये स्वाद, रसना के लिये तथा गन्ध, घ्राण के लिये विलक्षण है।

Sensibilia (Sing., Sensibile)

संवेद्यार्थ
रसल के अनुसार, वे वस्तुएँ जिनकी तत्त्वमीमांसीय तथा भौतिक स्थिति इंद्रियप्रदत्त के तुल्य ही होती हैं किंतु जिनके बारे में यह जरूरी नहीं है कि वे सामने प्रस्तुत हों। जैसे मनुष्य विवाह-संबंध के होने पर पति बन जाता है वैसे ही संवेद्यार्थ किसी मन से संबंध (प्रत्यक्ष) होने पर इंद्रियप्रदत्त कहलाता है।

Sensibility

संवेदन-शक्ति
कांट के अनुसार, मन की वह शक्ति जिसके द्वारा वह ऐंद्रिय संस्कारों को ग्रहण करता है।

Sensualism

विषयभोगवाद, इंद्रियसुखवाद
नीतिशास्त्र में, वह मत कि इंद्रियों की तृप्ति अर्थात् विषयों का भोग ही परम शुभ है।

Sensum

संवित्त
वह सामग्री जो किसी बाह्य ज्ञानेंद्रिय के माध्यम से मन के समक्ष प्रस्तुत होती है, संवेदन की अंतर्वस्तु।

Sentence

वाक्य, दंडादेश, दंड
1. शब्दों (प्रतीकों) पदों का सार्थक समूह।
2. विधिशास्त्र के संदर्भ में दंड एवम् दंडादेश।
3. तर्कशास्त्र व गणित में अभिकथन के रूप में प्रयुक्त।

Sentence Categorical

निरूपाधिक वाक्य
वह वाक्य जिसमें उद्देश्य-विधेय-क्रिया क्रमशः हों और जो किसी व्यक्ति या वर्ग के विषय में किसी गुण या सदस्यता का निरपेक्षरूपेण विधि या निषेध करे।

Sentence Connectives

वाक्य-संयोजक
1. वे शब्द जिनका प्रयोग दो या दो से अधिक वाक्यों या कथनों को संयुक्त करने के लिये होता है जैसे “और”, “अथवा”, इत्यादि।
2. तर्कशास्त्र में प्रयुक्त प्रतीक जो दो या अधिक वाक्यों या कथनों का संयोजन करते हैं, जैसे v या כ।

Sentential Calculus

वाक्यी कलन
प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र का वह भाग जहाँ वाक्यों का परस्पर निगमन किया जाता है। इसे तर्कवाक्यीकलन भी कहते हैं।

Sentient

संचेतन
वह जो चेतना से युक्त हो।

Sentiment

भावना
मनोविज्ञान में प्रयुक्त स्थायीभाव।

Separable Accident

वियोज्य आगंतुक गुण
वह आकस्मिक गुण जो वर्ग के कुछ व्यक्तियों में हो और कुछ में न हो, जैसे कुत्तों में सफेद रंग, अथवा एक व्यक्ति में कभी हो और कभी न हो, जैसे, राम का व्यवसाय इत्यादि।

Serfdom

दासता, कृषिदासता
सामाजिक विकास के ऐतिहासिक संदर्भ में उस युग विशेष में दासों के लिये प्रयुक्त प्रत्यय, जब भू-स्वामियों द्वारा लोगों को दास के रूप में रखा जाता था। (मार्क्सवाद्)

Sermon

धर्मोपदेश, प्रवचन
धार्मिक एवम् आध्यात्मिक प्रयोजन से दी जाने वाली शिक्षा।

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