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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Arterioplasty

धमनीसंधान
शस्त्रकर्म द्वारा किसी धमनी का विरोहण।

Arteriosclerosis

धमनी-कठोरता
(1) वृद्धावस्था में पाया जाने वाला धमनी-काठिन्य, जिसके अन्तर्गत धमनियों का लचीलापन समाप्त हो जाता है, जिससे रक्त की आपूर्ति में बाधा पहुँचती है।
(2) धमनियों का दीर्घकालिक रोग, जिसमें वाहिकाएँ मोटी तथा कठोर हो जाने के कारण धमनी का लचीलापन समाप्त हो जाता है।

Arteriospasm

धमनी संकोचन
धमनियों के संकुचित होकर अकड़ जाने की विकृति। इस विकृति में धमनी की दीवारें इस तरह संकुचित हो जाती है जिससे उस धमनी में संकुचन के आगे रक्त प्रवाह रूक जाता है। यह संकुचन अधिकांशतः अचानक होता है और इसका कारण भी अधिकांशतः अज्ञात ही रहता है किंतु मानसिक तनाव व ठंडे मौसम में यह अवस्था ज्यादा दिखाई पड़ती है। शरीर के अति आवश्यक अंगों की धमनियों के प्रभावित होने की दशा में गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उदा. के लिये कुछ किस्म के हृदयशूल (angina) व दिमागी दौरों अपस्मार के वेगों (epileptic fits) का कारण धमनी संकुचन ही माना जाता है। इसके अलावा (Raynauds Phenomenon) नामक अवस्था जिसमें हाथ पैर की उगलियां नीली पड़ जाती है। उसमें भी धमनी संकोचन ही मुख्य कारण होता है। इसका उपचार प्रायः पूर्ण व संतुष्टिप्रद नहीं होता तथा रक्त वाहिकाओं का विस्फार करने वाली औषधियां कुछ आराम प्रदान करती हैं।

Arteriostosis

धमन्यस्थीकरण
धमनी का अस्थिकरण होना।

Arteriostepsis

धमनीविमोटन
कटी हुई धमनी में रक्तस्राव को रोकने के लिए सीरे पर विमोटन/ मरोड़ना।

Arteriotome

धमनीछेदक
धमनी का छेदन करने के लिए उपयोग में आने वाला उपकरण।

Arteriotomy

धमनीछेदन
धमनी का छेदन करना।

Arterioversion

धमनी-भित्ति-परिवर्तन
शस्त्रकर्म के समय-रक्त स्राव को रोकने के लिए धमनी-भित्ति को उलट देना होता है।

Arteritis

धमनीशोथ
किसी विशिष्ट तथा सामान्य (specific and nonspecific) कारण से धमनी का शोथ होना। धमनी की दीवार की तीन परतों में से एक या सभी प्रभावित हो सकती हैं। यह धमनी शोथ बिल्कुल स्वतंत्र (isolated) या अन्य किसी रोग से संबंधित हो सकता है जैसे रयूमैटिक धमनी शोथ (Rheumatic arteritis), ताकायासू धमनीशोथ (Takayasu arteritis), टेम्पोरल धमनी शोध (Temporal arteritis) मधुमेह व कुष्ठ रोग में भी धमनी शोथ होता है। धमनी शोथ से प्रभावित अंग में दर्द व रक्त प्रवाह में कमी आ जाती है। सामान्य तौर पर संबंधित रोग का इलाज होने पर धमनी शोथ भी शान्त हो जाता है।

Artery

धमनी
शुद्ध रक्त वाहिका, विशुद्ध रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों में ले जाती हैं।

Artery Forceps

धमनी संदश
एक संदंश जिसका उपयोग शलय क्रिया के दौरान धमनियों के कटे रक्तस्राव करने वाले सिरों (Bleeding ends) को पकड़ने व दबाने के काम में किया जाता है। पकड़ने के बाद इन सिरों (Bleeding ends) को विशेष धागों से बांध (Ligate) दिया जाता है। ये संदश अलग-अलग प्रकार व आकार के उपलब्ध है तथा स्वयं बंद होने वाले (Self locking) होते है। इन सभी के हत्थे कैंची सदृश होते है।

Arthrectomy

अस्थि सन्धि-उच्छेदन
शल्यृक्रिया द्वारा अस्थिसंधियों का उच्छेदन करना।

Arthritide

संधिशोथ संरूप
संधिशोथ जनित उत्सेद्य।

Arthritides (Autoimmunity)

संधिशोथ
विभिन्न किस्म के संधिशोथ। सभी प्रकार के संधिशोथों का सबसे सामान्य लक्षण जोड़ों का दर्द है। इसके अलावा संबंधित जोड़ में सूजन व लाली भी आ सकती है। कभी-कभी शोथ की तीव्रता की वजह से पूरे शरीर में जकड़न या दर्द हो सकता है। संधिशोथ मोटे तौर पर दो प्रकार का होता है तीव्र (Acute) व दीर्घ (Chronic)। मनुष्य स्वभावतः विचरणशील प्राणी है अतः संधिशोथों के फलस्वरूप विचरण में अयोग्यता अत्यन्त दयनीय व तनाव कारक होती है। संधिशोथों को उत्पन्न करने वाले प्रमुख कारक हैं संक्रमण (Infection), चोटग्रस्त संधि में रक्तस्राव (Haemarthrosis), स्वप्रतिरक्षा (Autoimmune) जैसे रयूमेटायड संधि शोथ (Rheumatoid arthritis), अस्थिक्षरण जन्य (Osteo arthritis) आदि। संधिशोथों की विविधता व जटिलता को देखते हुये चिकित्सा विज्ञान की एक नई शाखा का विकास केवल जोड़ों के रोगों के अध्ययन के लिये किया गया है जिसे संधिरोग विज्ञान (Rheumatology) कहते हैं। इन रोगों का सामान्य उपचार दर्द निवारक दवायें (Non steroidal anti inflamatory drugs-NSAIDS) व चिकित्सीय व्यायाम (Physio therapy) है। विशेष परिस्थितियों में छोटे या बड़े शल्यकर्म (Minor or major surgical Procedures) की आवश्यकता पड़ सकती है। उदा. के लिए संक्रमित संधि शोथ (Infected arthritis) में संबंधित जोड़ का विषैला द्रव निकालकर परीक्षणार्थ भेजा जाता है व तदनुसार उपचार किया जाता है।

S

संधिवेधन
यह कुछ किस्म के संधि शोथों के लिये की जाने वाली नैदानिक प्रक्रिया है। इसमें एक विशेष सुई को संधि गुहा में प्रवेशित कराकर, गुहा में उपस्थित द्रव को बाहर खींच लेते हैं। इस प्रक्रिया के सुचारू रूप से होने के लिये संबंधित जो को विशेष औषधियों (Local anaesthetic agent) की मदद से संज्ञाशून्य कर देते हैं। संबंधित जोड़ की त्वचा का संक्रमण हीन (aseptic) होना आवश्यक है। जोड़ों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला संधि-द्र (Synovial fluid) पारदर्शक, पीताभ (Straw coloure) व हल्का चिपचिपा (Viscous) होता है जिसे यदि एसेटिक एसिड (Glacial acetic acid) में मिलाया जाय तो सफेद चिपचिपा थक्का प्राप्त होता है। किंतु संधि रोग होने पर संधि द्रव अपारदर्शक (Turbid) व द्रवीय (Watery) होता है जिसे एसेटिक अम्ल में मिश्रित करने पर भुरफुरा व शीघ्र विखंडीय (Flocculent & easily broken) थक्का बनता है। शोथ होने पर संधि द्रव में श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या और प्रोटीन बढ़ जाता है तथा शर्करा (Glucose) की मात्रा कम हो जाती है। विशेष परिस्थितियों में संधि द्रव का (Culture) व सूक्ष्मदर्शीय अध्ययन भी किया जाता है।

Arthrodesis

सन्धि स्थिरीकरण
जोड़ों को शल्य-कर्म द्वारा स्थायी रूप से संयुग्मित करना। इस प्रकार के शल्य-कर्म का मुख्य उद्देश्य पीड़ा रहित करना, रोग को रोकना (Halt disease) या स्थायित्व (Stability) प्रदान करना है। इस प्रक्रम के शल्य कर्म को अब पहले की तुलना में कम किया जाता है। इसकी प्रमुख वजह पूर्ण संधि परिवर्तन (Total Joint arthroplasty) विशेष तौर पर घुटने व कूल्हे के जोड़ों के लिये। इसी प्रकार जोड़ों के तपेदिक (Joint T.B.) के लिये किये जाने वाले संधि-संघ में कमी आने का कारण ज्यादा प्रभावी निदान व उपचार है। यद्यपि संधि-संघ अभि भी प्रतिरोधी संक्रमण (Resistant infections) के लिये तथा उन परिस्थितियों में जिनमें जोड़ों की हड्डियां नष्ट हो गई हों, सबसे बेहतर विकल्प है। पूर्ण संधि-परिवर्तन की तुलना में इसका एक फायदा यह है कि इसमें क्षरण (Mechanical wear & tear) या ढीलापन (Loosening) नहीं होता जिसकी वजह से युवा (Adolescent & young adults) में संधि-संघ को वरीयता दी जाती है।

Arthrogram

संधिचित्र
जोड़ों का एक विशेष एक्स-रे चित्रण। किरण अपारदर्शक (Ray opaque) रसायनों की मदद से खींचा गया जोड़ों का एक्स-रे।

Arthrography

संधिचित्रण
जोड़ों के एक्स-रे की एक विशेष विधि जो मुख्यतः नैदानिक कठिनाइयों (Diagnostic difficulties) दूर करने के लिये प्रयोग की जाती है। इस विधि में किरण अपरदर्शक (Ray-opaque) रसायनों को जोड़ों (सधियों) की गुहाओं में (Injection) द्वारा प्रवेशित करा कर एक्सरे ले लेते हैं। इस विधि को अब आर्थोस्कोपी नामक विधि ने लगभग हटा दिया है।

Arthrometry

संधिमिति
संधिगतियों का नापना। संधि कोणों को नापने की विधि। इस विधि का प्रमुख उपयोग जोड़ों के रोगों की (Degree of involvement) व (Taging process) उपचार से पड़े प्रभाव के आंकलन के लिये किया जाता है।

Arthrophyte Osteophyte

अस्थि वृद्धि
संधि गुहा में उपस्थित हड्डियों के किनारों में उत्पन्न होने वाली असामान्य वृद्धि। यह वृद्धि हड्डी के गलन व कमजोर होने को (degeneration) दर्शाती है। इस कमजोरी की वजह अवस्था संबंधित (Taging process) या अन्य शरीर यांत्रिक (Biomechancal) हो सकती है। साधारणतः यह वृद्धि उन संधियों में पायी जाती है जहां प्रति क्षेत्रफल दबाव अत्यधिक होता है जैसे कशेरुकाओं (vertebraes) व घुटनों में। कशेरुकाओं में स्थिति वृद्धि संबंधित स्पाइनल तंत्रिका पर दबाव डालकर नष्ट कर सकती है।

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