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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Inalienable rights

अहस्तांतरणीय अधिकार वे अधिकार जिनका व्यक्ति परित्याग नहीं कर सकता, जैसे जीवन का अधिकार या स्वतंत्रता का अधिकार। कोई व्यक्ति जीवन के अधिकार का परित्याग कर आत्महत्या करने का दावा नहीं कर सकता। इन अधिकारों का न परित्याग किया जा सकता है, और न ही किसी दूसरे को हस्तांतरण। ये व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकार हैं।

Interest aggregation

हित समुच्चयन राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत संगठित समूहों का कार्य समाज में अपने अनुयाइयों व समर्थकों की इच्छाओं व आकांक्षाओं का समायोजन कर उसे नीति व कार्यक्रम का रूप देना होता है। यह कार्य हित समूहों अथवा दबाव समूहों द्वारा किया जाता है।

Interest group

हित समूह अपनी हितवृद्धि के प्रयास के लिए राज्य अधिकारियों अथवा शासन के अंगों, अभिकरणों अथवा जन-निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के प्रयोजन से संगठित एक हितपरक व्याक्ते समूह। इस प्रकार, समाज के अनेक हितों के लिए अनेक हितसमूह संगठित हो जाते हैं तथा इनमें से कुछ असंगठित रूप से भी कार्यरत रहते हैं। दबाव समूहों (pressure groups) से ये इस रूप में भिन्न हैं कि ये किसी एक उद्देश्य के लिए काम करते हैं जबकि दबाव समूहों का उद्देश्य सामान्य हितों की अभिवृद्धि करना होता है।

Interim charge d’affaire

अंतरिम कार्यदूत अस्थायी रूप से नियुक्त कार्यदूत। कार्यदूत राजनयिक प्रतिनिधियों की चार श्रेणियों में से निम्नतम कोटि का होता है।

Interim government

अंतरिम सरकार वह तदर्थ शासन जो किसी राज्य में नियमित सरकार का निर्माण करने से पूर्व गठित किया जाता है और नियमित सरकार बनने पर विघटित हो जाता है।

International affairs

अंतर्राष्ट्रीय विषय, अंतर्राष्ट्रीय मामले 1. दो या दो से अधिक राज्यों के पारस्परिक हित संबंधी विषय या मामले। 2. राजनीतिशास्त्र का वह अंग जो उपरोक्त विषयों अथवा मामलों अथवा राज्यों की विदेश नीतियों का अध्ययन करता है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का अध्ययन भी शामिल है।

International Bank for Reconstruction and Development (= World Bank)

अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण तथा विकास बैंक, विश्व बैंक इसकी स्थापना 1944 में हुई थी और 1945 में यह संयुक्त राष्ट्र का एक विशिष्ट अभिकरण बन गया। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य राज्यों को उत्पादन-वृद्धि और विकास कार्यक्रमों के लिए पूँजी उपलब्ध कराना है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के निरंतर विकास के लिए भी कार्यक्रम बनाता है। इसने अनेक अवसरों पर राज्यों को उद्योग-धंधों के विकास और जल विद्युत संयंत्रों के निर्माण तथा विकास कार्यक्रमों के लिए ऋण प्रदान किया है। इसे आम बोलचाल में “विश्व बैंक” कहा जाता है और इसका मुख्यालय वाशिंगटन में है।

International Boundary Commission

अंतर्राष्ट्रीय सीमा आयोग दो या अधिक राज्यों के मध्य सीमा विवादों का समाधान करने अथवा सीमा-निर्धारण करने के लिए संगठित आयोग।

International Civil Aviation Organisation

अंतर्राष्ट्रीय सिविल विमान-चालन संगठन वह अंतर्राष्ट्रीय संगठन जिसका संबंध विमान-चालन तथा असैनिक विमान-परिवहन की समस्याओं से है। यह अंतर्राष्ट्रीय विमान परिवहन के लिए तकनीकी मानकों तथा प्रक्रियाओं को सूत्रबद्ध करता है और सदस्य-राज्यों की सरकारों द्वारा इनका अंगीकरण किए जाने की सिफारिश करता है। इसकी स्थापना 1944 में शिकागो सम्मेलन में स्वीकृत एक अनुबंध के अंतर्गत हुई और यह भी संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट अभिकरणों में से एक है।

International comity

अंतर्राष्ट्रीय शिष्टाचार राज्यों के परस्परिक संबंधों में आवरण के ऐसे नियम जिनका पालन क़ानूनी रूप से बाध्यकारी न होने पर भी सुविधा अथवा नैतिकता के कारण प्रायः किया जाता है। उदाहरणार्थ, प्रत्यर्पण संधि न होने पर भी एक राज्य का किसी दूसरे राज्य के अपराधी को प्रत्यार्पित करने के लिए सहमत हो जाना।

International community

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय राज्यों का समूह जो सामान्य हितों एवं उद्देश्यों से इस प्रकार एक-दूसरे के साथ संबद्ध हो गए हैं कि उनका यह समूह एक अलग इकाई अर्थात् समुदाय का स्वरूप धारण कर गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आज 160 से अधिक स्वतंत्र एवं संप्रभु राज्य सम्मिलित हैं।

International Court of Justice

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय इस न्यायालय की स्थापना 1946 में की गई थी। वास्तव में यह प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत स्थायी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का रूपांतरण है। वह न्यायालय संयुक्त राष्ट्र के 6 मुख्य अंगों में से एक है। इसमें 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका निर्वाचन सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा द्वारा किया जाता है। न्यायाधीश विभिन्न देशों से चुने जाते हैं और किसी भी देश का एक से अधिक न्यायाधीश नहीं हो सकता। प्रत्येक न्यायाधीश का कार्यकाल 9 वर्ष होता है। इस न्यायालय का मुख्यालय हेग में है। इस न्यायालय का मुख्य कार्य संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों के पारस्परिक विवादों का निर्णय करना है। इसका परमर्शदात्री क्षेत्राधिकार स्वीकार करना राज्यों की इच्छा पर निर्भर करता है। साम्यवादी देशों में से किसी ने भी इसका क्षेत्राधिकार स्वीकार नहीं किया है। एक धारा के अंतर्गत राज्य इसका क्षेत्राधिकार निर्धारित विषयों से संबंधित मामलों में निर्णय के लिए अनिवार्य रूप से स्वीकार करने के लिए अपने को वचनबद्ध कर सकते हैं।

International crime

अंतर्राष्ट्रीय अपराध अंतर्राष्ट्रीय विधि के विरूद्ध किया गया कृत्य जैसे, समुद्री डाका, नशीली वस्तुओं का अवैध व्यापार, दास-व्यापार इत्यादि।

International custom

अंतर्राष्ट्रीय प्रथा, अंतर्राष्ट्रीय परंपरा इसे अंतर्राष्ट्रीय विधि का मूल स्रोत माना जाता है। इसका अर्थ है राज्यों के संबंधो को सतत् रूप से नियमित करने वाले आचरण के ऐसे नियम जो लिपिबद्ध न होते हुए भी बाध्यकारी माने जाते हैं। इनका आधार दीर्घ और सतत् व्यवहार और इनके प्रति राज्यों की मौन सहमति है।

Internationalisation

अंतर्राष्ट्रीयकरण 1. किसी संधि के अंतर्गत विश्व के किसी क्षेत्र, भूभाग या जलमार्ग का सभी राज्यों द्वारा प्रयोग किए जा सकने की स्थिति जैसे स्वेज नहर, पनामा नहर, अंटार्कटिका, अंतरिक्ष आदि। 2. किसी राष्ट्रीय विवाद अथवा स्थिति अथवा समस्या का अन्य राष्ट्रों की अभिरुचि अथवा हस्तक्षेप के कारण अंतर्राष्ट्रीय रूप धारण कर लेना।

Internationalism

अंतर्राष्ट्रवाद वह सिद्धांत जो स्थितियों और समस्याओं को संकीर्ण राष्ट्रीय हित अथवा उद्देश्य अथवा नीति की दृष्टि से न देखकर उनके प्रति व्यापक विश्वव्यापी अथवा संपूर्ण मानवीय हितों का दृष्टिकोण अपनाता हो।

International Labour Organisation

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन 1920 में स्थापित यह संस्था अब संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट अभिकरणों में से एक है। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिक कल्याण संबंधी विधि-संहिताओं के-प्रारूप तैयार करना और राष्ट्रीय सरकारों द्वारा उनके अनुसमर्थन का प्रयास करना है। इस कारण इसे विश्व के श्रमिकों की संसद की संज्ञा दी गई है। इसके प्रमुख अंगों में एक सामान्य सभा और एक सचिवालय हैं। सामान्य सभा की बैठक वर्ष में एक बार होती है जिसमें प्रत्येक सदस्य राष्ट्र अपने चार प्रतिनिधि भेज सकता है जिसमें दो सरकार द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, एक श्रमिकों द्वारा तथा एक मालिकों द्वारा।

International law

अंतर्राष्ट्रीय क़ानून, अंतर्राष्ट्रीय विधि सभ्य राष्ट्रों के पारस्परिक संबंधों और उनके अधिकारों आदि से संबंधित नियमावली। ओपेनहाइम ने अंतर्राष्ट्रीय विधि की परिभाषा करते हुए लिखा है कि “अंतर्राष्ट्रीय विधि प्रथागत एवं संधिगत नियमों के उस समूह को कहते है जिन्हें सभ्य राष्ट्र अपने पारस्परिक संबंधों में बाध्यकारी मानते हैं।” परंतु वर्तमानकाल में ओपेनहाइम की यह परिभाषा कालातीत हो गई है। अब अंतर्राष्ट्रीय विधि केवल यूरोपीय ईसाई राज्यों तक सीमित न रहकर विश्वव्यापी विधि बन गई है। इसके विषय केवल राज्य नहीं हैं बल्कि कुछ सीमा तक व्यक्ति और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी माने जाते हैं। अतः वर्तमान काल में अंतर्राष्ट्रीय विधि को संपूर्ण मानव जाति की विधि अथवा विश्व विधि के रूप में देखा जा रहा है जिसका उद्देश्य मानव कल्याण अथवा मानव-उत्यान है। विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय विधि से भिन्नता स्थापित करने के लिए (जिसका उल्लेख हम यथास्थान करेंगे) इसे “सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय विधि” अथवा “सामान्य अंतर्राष्ट्रीय विधि” अथवा “सर्वदेशीय अंतर्राष्ट्रीय विधि” भी कहा जाता है। दे. particular international law भी।

International Law Association

अंतर्राष्ट्रीय विधि संघ अंतर्राष्ट्रीय विधि विशेषज्ञों का एक गैर सरकारी संघ जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और विकास के लिए विविध विषयों पर प्रस्तावित विधि के प्रारूप तैयार करना है। इसका मुख्यालय लंदन में है। इसकी राष्ट्रीय शाखाएँ विश्व के अनेक देशों में स्थापित हैं। इसके सदस्यों में अंतर्राष्ट्रीय विधि के विद्वान, विधिशास्त्री, न्यायाधीश आदि होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और उत्तरोत्तर विकास में इस संघ के योगदान की सर्वथा सराहना की गई है।

International legislation

अंतर्राष्ट्रीय विधि-निर्माण अंतर्राष्ट्रीय विधि जो मूलतः प्रथागत विधि थी वर्तमानकाल में संधिगत क़ानून को अधिक स्थान देती जा रही है। विधि-निर्मात्री संधियों का प्रारंभ 19वीं शताब्दी के मध्य से हुआ। परन्तु वर्तमान शताब्दी के प्रारंभ से अंतर्राष्ट्रीय विधि-निर्मात्री संधियों की संख्या बहुत तेज़ गति से बढ़ने लगी। इन संधियों का निर्माण प्रायः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से हुआ है जिससे इनके निर्माण की प्रक्रिया भी लगभग सुनिश्चित हो गई है। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय विधि-निर्मात्री संधियों का ग्रहण किया जाना “अंतर्राष्ट्रीय विधि-निर्माण” कहलाता है। मेनले ओ हडसन ने 1920 में प्रकाशित अपनी पुस्तक को यही नाम दिया था और जब से इस पद का अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्रोतों के अध्ययन में एक विशिष्ट स्थान हो गया है।
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